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नौकरी से निकाला जा रहा, लव ट्रैप के फर्जी पोस्टर... बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ कट्टरपंथियों का नफरती प्रोपेगैंडा

नई दिल्ली: बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उथल पुथल के बीच हिंदुओं पर हमले काफी ज्यादा बढ़ गए। बांग्लादेशी हिंदुओं पर तरह-तरह के अत्याचार किए गए। मंदिरों को तोड़ा गया। हालांकि सीधे तौर पर अब ये हमले तो कम हो गए हैं, लेकिन कट्टरपंथी संगठन अभी भी हिंदुओं के साथ उत्पीड़न और भेदभाव करने से नहीं चूक रहे। राजनीतिक माहौल का फायदा उठाकर, ये संगठन हिंसा से लेकर सामाजिक बहिष्कार और बदनाम करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

बांग्लादेशी हिंदुओं पर बढ़े अत्याचार

बांग्लादेश में 5 अगस्त को शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से ही हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ गया। वहां नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ, जिसने कट्टरपंथी समूहों को काफी बल दिया। वे अब बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ जमकर हिंसा कर रहे हैं। हिंदू विरोधी घटनाओं के रूप में अब उन्हें सरकारी नौकरियों से निकाला जा रहा है। हिंदुओं को बर्खास्त किया जा रहा है या जबरन इस्तीफा देने को मजबूर किया जा रहा है। विशेष रूप से यूनिवर्सिटी में हिंदू शिक्षकों और प्रोफेसरों पर इस्तीफा देने का दबाव डाला जा रहा है।

नौकरी से इस्तीफा देने को किया जा रहा मजबूर

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की चटगांव यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर रोंतु दास को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। कट्टरपंथी ताकतों द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। दास ने अपने इस्तीफे में उनके साथ हुए भेदभाव का जिक्र किया था। ये इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

पुलिस फोर्स से भी हिंदुओं को निकाला जा रहा

हिंदुओं पर दबाव का ये दौर न केवल यूनिवर्सिटी और अन्य शैक्षणिक संस्थानों तक है बल्कि अब पुलिस फोर्स में तैनात हिंदू कैडेटों तक फैल गया है। हाल ही में, शारदा पुलिस अकेडमी में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने वाले 252 पुलिस उप-निरीक्षकों को अनुशासनहीनता और अनियमितताओं के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया, जिनमें से 91 हिंदू कर्मी थे। इन कैटेड की नियुक्तियां शेख हसीना के कार्यकाल में हुई थीं

इसके अलावा शारदा पुलिस अकेडमी में 60 से ज्यादा एएसपी-रैंक के अधिकारियों के लिए 20 अक्टूबर को होने वाली पासिंग आउट परेड को रद्द कर दिया गया, जिससे इन अधिकारियों की सरकारी भूमिकाओं में नियुक्ति में और देरी हुई।

'भेदभाव का सामना करना पड़ा'

एक हिंदू कैडेट, असित ने इन घटनाक्रमों पर दुख जताते हुए कहा, "हे भगवान! मेरी नाव तो किनारे पर ही डूब गई। मुझे बांग्लादेश में भेदभाव का सामना करना पड़ा। मैं बस इतना कह सकता हूं कि भगवान न्याय करेंगे और इतिहास समय का न्याय करेगा। इतिहास ने आज तक किसी को माफ नहीं किया है। भगवान साक्षी है”।

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