ढाई साल के युद्ध से जेलेंस्की को समझ आ गई दुनियादारी! भारत से उम्मीद की मजबूरी समझिए
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) को दिए एक इंटरव्यू में रूस के साथ युद्ध को खत्म करने के अपने नए विचार और रणनीति के बारे में विस्तार से बताया। उनका साक्षात्कार ध्यान से पढ़ने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि युद्ध को समाप्त करने प्रति जेलेंस्की की सोच किस तरह विकसित हो रही है।
सबसे पहले, ऐसा लगता है कि उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि भले ही उन्हें रूसी हमलों से बचाव के लिए अमेरिका और अपने पश्चिमी भागीदारों की आवश्यकता हो, लेकिन ग्लोबल साउथ के देशों के समर्थन के बिना युद्ध को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने साक्षात्कार के दौरान इस बात का संकेत दिया जब उन्होंने स्वीकार किया कि रूस के खिलाफ प्रतिबंध पूरी तरह से काम नहीं कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में, रूस कुछ देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार के माध्यम से प्रतिबंधों के प्रभाव से बचने में सक्षम रहा है।
जेलेंस्की की नजर में समस्या यह है कि ये देश युद्ध को समाप्त करने की जरूरत तो बताते हैं, लेकिन अपने आर्थिक स्वार्थ के लिए रूस के साथ व्यापार को आगे भी बढ़ा रहे हैं। वे युद्ध पर कोई रुख अपनाने से बचने के लिए बातचीत की आवश्यकता का हवाला देते हैं। इसलिए, जेलेंस्की की रणनीति अब दोहरी जान पड़ती है। उनकी रणनीति है कि तटस्थ देशों को रूस का परोक्ष समर्थक करार दें और जो शांति लाने की बात करते हैं, उन पर इस दिशा में कदम उठाने का दबाव बनाएं।
इस प्रक्रिया में, जेलेंस्की युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत के लिए मापदंड निर्धारित कर रहे हैं। इस तरह की बातचीत यूक्रेन के पीस फॉर्म्युले और पीस समिट की संयुक्त विज्ञप्ति से निकलनी चाहिए या उनका गंभीरता से अनुसरण किया जाना चाहिए। वार्ता फॉर्म्युले या विज्ञप्ति के विशिष्ट बिंदुओं पर भी हो सकती है, जैसे कि जबरन निर्वासित यूक्रेनी बच्चों की वापसी। इस तरह, जेलेंस्की को लगता है कि यूक्रेन बातचीत को अपने पक्ष में नियंत्रित कर सकता है।
दूसरा, जेलेंस्की को अच्छे से पता है कि अभी शांति वार्ता में शामिल होना यूक्रेन के लिए फायदेमंद नहीं है। यूक्रेन कुर्स्क ऑपरेशन के बावजूद रूसी हमले को पूरी तरह से रोक नहीं पाया है। इसकी वजह यूक्रेन को अमेरिका से सैन्य आपूर्ति मिलने में देरी जबकि रूस के पास पहले से पड़े हथियारों का खजाना है। रूस युद्ध के मैदान में लाशों की ढेर लगाने का जोखिम उठा सकता है, लेकिन यूक्रेन नहीं। इसलिए जैसा कि जेलेंस्की ने साक्षात्कार में कहा, यूक्रेन को अपनी जमीन देकर अपने लोगों को बचाना होगा। दूसरी तरफ, पुतिन, रूसी राजनीतिक व्यवस्था में अपनी स्थिति को देखते हुए जमीन के बदले यूक्रेन के लोगों छोड़ सकते हैं। यूक्रेन अगर रूस को अपनी जमीन दे दे तो युद्ध समाप्त करने का संभावित रास्ता तैयार हो सकता है।