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अगर कार्रवाई नहीं हुई तो...' न्यायालयों में हो रहे वकीलों के अपमान पर बार एसोसिएशन ने CJI को लिखा पत्र

नई दिल्ली: ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर 'न्यायिक कदाचार' की हालिया घटनाओं का संज्ञान लेने का आग्रह किया है। एसोसिएशन का कहना है कि इन घटनाओं का कानूनी बिरादरी पर गहरा प्रभाव पड़ा है। पत्र में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा अदालतों में वरिष्ठ वकीलों, वकीलों और वादियों के प्रति 'अनादर और कदाचार' को दूर करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

पत्र में मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति आर सुब्रमणियन से जुड़ी एक घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। आरोप है कि उन्होंने एक वरिष्ठ अधिवक्ता, सांसद और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के प्रति 'बिना किसी कारण' अपमानजनक व्यवहार किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, आदिश अग्रवाल ने पत्र में निराशा व्यक्त करते हुए लिखा कि एसोसिएशन द्वारा विभिन्न प्रयासों के बावजूद, इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

'अगर कार्रवाई नहीं हुई तो गलत संदेश जाएगा'

उन्होंने पत्र में आगे लिखा गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आप यह सुनिश्चित करें कि कोर्ट की कार्यवाही के दौरान उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशों द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ताओं और अन्य अधिवक्ताओं के साथ अत्यंत सम्मान और गरिमा का व्यवहार किया जाए। उन्होंने आगे मद्रास उच्च न्यायालय की घटना न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ के कार्यकाल के दौरान हुई है। अगर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे गलत संदेश जाएगा। इससे लगेगा कि CJI वकीलों की गरिमा की परवाह नहीं करते हैं। पत्र में सवाल पूछा गया कि मद्रास उच्च न्यायालय के दोषी न्यायाधीश के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जिसमें उनका तबादला भी शामिल है

पत्र में यह भी कहा गया है कि वकीलों के प्रति न्यायिक कदाचार की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अपने पत्र में आगे लिखा कि ऐसे न्यायाधीशों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। उन्हें अपनी जिम्मेदारी का एहसास नहीं कराया जाता है। इससे उन्हें बढ़ावा मिलता है और वे आगे भी ऐसा ही करते रहते हैं। इससे न्यायपालिका और वकीलों के बीच के रिश्ते खराब होते हैं। 

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