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डोनाल्ड ट्रंप आ गए तो फिर... अमेरिका में चुनाव के बीच पाकिस्तानी क्यों घबराए, सता रहा 'इंडिया कनेक्‍शन' का बड़ा डर

वॉशिंगटन: अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत पुराने और करीबी सहयोगियों के रहे हैं। पाकिस्तान को अमेरिका से लंबे समय से हथियार और दूसरी मदद मिलती रही है। दक्षिण एशिया में पाकिस्तान पर अमेरिका की खास इनायत रही लेकिन हालिया वर्षों दोनों दोनों देशों के रिश्ते में गर्माहट कम हुई है। ऐसे में पाकिस्तान की नजर इस बात पर लगी है कि अमेरिकी चुनाव के नतीजे क्या होंगे। पाकिस्तान के लोगों को खासतौर से डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने पर अमेरिका की ओर से सख्ती का अंदेशा है।

पाकिस्तान की मुनज्जा सिद्दीकी ने द न्यूज के लिए अपने लेख में अमेरिकी चुनाव नतीजे के अपने देश से रिश्ते पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण किया है। वह कहती हैं, 'वास्तविकता यह है कि अमेरिकी चुनाव में कोई भी जीत जाए, पाकिस्तान के साथ वह अपने संबंधों को चीन और कुछ हद तक भारत और ईरान के साथ अपने संबंधों के लेंस के जरिए से ही देखेगा, जैसा वह अब भी कर रहा है। ये जरूर है कि अगर ट्रंप राष्ट्रपति बने तो उनका हावभाव कुछ आक्रामक होगा और बयानबाजी के साथ वह ज्यादा स्पष्ट रुख अपनाएंगे।'


'अमेरिका अपना सकता है सख्त रुख'

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने पर वह 'अमेरिका फर्स्ट' सिद्धांत पर वापसी करेंगे। ये दृष्टिकोण बहुपक्षीय कूटनीति की कीमत पर अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देता है। ऐसे में पाकिस्तान को रक्षा सहयोग और दूसरी मदद पर सख्त शर्तों का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी सैन्य सहायता में 1.3 अरब डॉलर की कटौती की थी। ट्रंप के शासन में अमेरिका की करीबी भारत से बढ़ सकती है तो पाकिस्तान को चीन के साथ अपने सहयोग को लेकर मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता तेज हुई है। हालांकि सिद्दीकी का ये भी मानना है कि ट्रंप से पाकिस्तान को आतंकवाद जैसे मुद्दों पर अमेरिकी हितों के आधार पर बेहतर डील करने का मौका भी मिलेगा।

दूसरी ओर हैरिस ज्यादा संतुलित और जटिल रिश्ते की पेशकश करेंगी। वह बाइडन की नीतियों पर बढ़ते हुए पाकिस्तान के प्रति अपनी विदेशी सहायता नीति में लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और सामाजिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे सकती हैं। हैरिस रणनीतिक साझेदारों को अलग किए बिना व्यापक गठबंधन-निर्माण पर ध्यान केंद्रित करके संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर सकती हैं। इससे पाकिस्तान को अधिक संतुलित संबंध बनाने का मौका मिल सकता है।

पाकिस्तान के लिए दोनों में कोई आसान नहीं

सिद्दीकी कहती हैं कि अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बनें या कमला हैरिस, पाकिस्तान को अपने नाजुक संतुलन को बनाए रखने के लिए बेहतर कूटनीति की जरूरत पड़ेगी। पाकिस्तान अभी भी अमेरिका के लिए अहमियत रखता है और कई क्षेत्रों में दोनों देशों का काफी सहयोग है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों से पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों में नाटकीय रूप से बदलाव नहीं आएगा। रिश्तों में कुछ बदलाव आ सकते हैं, जिनसे पाकिस्तान को निपटना पड़ेगा।

 

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