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बाजीराव की तस्वीर देखकर क्यों गीला हो गया मुगल बादशाह का पायजामा, अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक था मराठों का खौफ

नई दिल्ली: यूरोप के एक विद्वान सर रिचर्ड टेंपल ने महान मराठा योद्धा पेशवा बाजीराव प्रथम के बारे में एक बात कही है, जो उनकी महानता के बारे में काफी है। अपनी किताब Sivaji and the Rise of the Mahrattas में टेंपल कहते हैं कि सवार के रूप में बाजीराव को कोई भी मात नहीं दे सकता था। युद्ध में वह हमेशा आगे रहते थे। मुश्किल से मुश्किल काम में भी वह हमेशा गोला-बारूद का सामना करने में आगे रहते थे। कभी न थकने वाले बाजीराव अपने सिपाहियों के साथ दुःख-सुख बांटते थे।

टेंपल कहते हैं कि मुस्लिम और यूरोपीय दुश्मनों के खिलाफ कामयाबी की बड़ी वजह हिंदुओं का उन पर गहरा यकीन और आस्था थी। बाजीराव के समय में मराठों की दहशत अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक संपूर्ण भारतीय महाद्वीप पर थी। उनकी मौत उस डेरे में हुई, जहां वह जिंदगी भर सिपाहियों के साथ रहा। महान योद्धा बाजीराव को पेशवा के रूप में और हिंदू शक्ति के महान अवतार के रूप में मराठे उन्हें हमेशा याद करते रहेंगे। टेंपल की इसी टिप्पणी को देखते हुए आज जानते हैं पेशवा बाजीराव की कहानी।

जब 48 घंटे में बाजीराव महाराष्ट्र से दिल्ली पर चढ़ आए

मराठों का इतिहास लिखने वाले विश्वनाथ गोविंद दीघे की किताब 'पेशवा बाजीराव प्रथम एंड मराठा एक्सपैंशन' के अनुसार, बाजीराव ने जब मराठा सत्ता को मजबूत कर लिया तो उन्होंने सादात खां और मुगलों को सबक सिखाने की सोची। उस वक्त तक मुगलों पर सीधा हमला करने की कोई सोच भी नहीं सकता था।
बाजीराव ने इसी खौफ को खत्म किया। उन्होंने केवल 500 घोड़ों के साथ बिना रुके बिना थके 10 दिन की दूरी 48 घंटे में पूरी कर ली। देश के इतिहास में अब तक 2 राजाओं के आक्रमण ही सबसे तेज माने गए हैं-एक अकबर का फतेहपुर से गुजरात के विद्रोह को दबाने के लिए 9 दिन के अंदर वापस गुजरात जाकर हमला करना और दूसरा बाजीराव का दिल्ली का सैन्य अभियान।

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