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Bihar Politics : इम्तिहान 'बच्चों' का और रिजल्ट के लिए परेशान 'गार्जियन', बिहार में 'खेला' का झमेला!

पटना: बिहार उपचुनाव के नतीजे कैसे आते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। जिन प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा, वे तो नतीजों के लेकर उत्सुक हैं ही, बिहार के लोग भी नतीजे जानने को लेकर बेचैन हैं। पहली बार चुनावी मैदान में उतरी प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी तो परिवारवाद के मोह से मुक्त है। पर, जेडीयू, भाजपा, हम (से) और आरजेडी ने परिवारवाद का ही सहारा लिया है। इसलिए माना जा रहा है कि उम्मीदवारों से अधिक उनके सियासी संरक्षकों की साख ही दांव पर लगी है।

रामगढ़ में जगदानंद की साख की परीक्षा

रामगढ़ सीट आरजेडी की रही है। यहां से आरजेडी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे और सांसद सुधाकर सिंह के भाई अजीत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। सुधाकर सिंह के सांसद निर्वाचित होने से यह सीट खाली हुई है। ऐसे में अजीत सिंह से अधिक जगदानंद सिंह और सुधाकर सिंह की सियासी साख दांव पर लगी है।

इमामगंज में जीतन राम मांझी की परीक्षा

इमामगंज सीट जीतन राम मांझी के सांसद निर्वाचित होने से रिक्त हुई है। मांझी अब केंद्र में मंत्री भी बन चुके हैं। अपनी जगह मांझी ने बहू दीपा मांझी को उम्मीदवार बनाया है। दीपा के पति संतोष सुमन विधायक हैं। यानी दीपा से अधिक जीतन राम मांझी और उनके विधायक बेटे संतोष सुमन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।


बेलागंज में सुरेंद्र यादव की साख दांव पर

बेलागंज सीट बीच के दो साल के अंतराल को छोड़ दें तो 1990 से ही आरजेडी नेता सुरेंद्र यादव के कब्जे में रही है। सुरेंद्र यादव के सांसद चुने जाने के बाद इस सीट पर चुनाव हो रहा है। आरजेडी ने सुरेंद्र यादव की सियासी साख को देखते हुए उन्हें बेटे विश्वनाथ को उम्मीदवार बनाया है। एनडीए में सीट बंटवारे के बाद बेलागंज जेडीयू के कोटे में गया है। जेडीयू ने अपनी पूर्व एमएलसी मनोरमा देवी पर दांव खेला है। दोनों उम्मीदवार दबंग सियासी घराने से ताल्लुक रखते हैं। इसलिए उम्मीदवारों से अधिक उनके सियासी संरक्षकों के रसूख की यहां परीक्षा होनी है। 

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