साल की शुरुआत में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है. भाजपा की राज्य इकाई ने सभी 70 सीटों के लिए उम्मीदवारों को मंथन कर लिया है, जो अब अनौपचारिक बैठक में केंद्रीय नेतृत्व के साथ विचार किया जाएगा, फिर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा.
पार्टी का प्रचार अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से शुरू होगा, हालांकि हरियाणा और महाराष्ट्र की बड़ी जीतों के बाद भाजपा नेतृत्व ने अपनी चुनावी रणनीति पर बहुत सोचा है. सूत्रों के अनुसार. पार्टी का मानना है कि जब तक वह सीधे जनता से जुड़ाव बनाए रखने में सफल रही है, तब तक वह जीतती है, जब तक कि वह इस मामले में कमजोर रही है.
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी दिल्ली में भी अपने अधिकांश वरिष्ठ नेताओं को चुनाव लड़ा सकती है, जिनमें लोकसभा चुनाव में टिकट कटने वाले पूर्व विधायकों और पर्व सांसदों भी शामिल हैं. वर्तमान और पूर्व पार्षदों की एक बड़ी दावेदारी है, लेकिन निर्णय उनकी छवि के आधार पर किया जाएगा. इसके लिए पार्टी ने कुछ संस्थाओं से भी संभावित उम्मीदवारों के बारे में फीडबैक लिया है.
जनता से जुड़ाव को दिया जा रहा महत्व
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जनता से जुड़ाव केवल यह नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति से बातचीत करें, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसे लगना चाहिए कि भाजपा की सरकार में ही लाभ होगा. अगर दूसरे पक्ष आते हैं तो उनकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी. यह काम मानसिकता में बदलाव लाना है, यानी तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर मानसिकता में बदलाव लाना है. ऐसा करने से साफ-सुथरे, सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को बनाए रखने से जीतने की संभावना बढ़ जाती है.