देश-विदेश
भारत ने तंजानिया को दी 8.4 लाख डॉलर की मदद
नई दिल्ली । जलवायु परिवर्तन के खतरे से वित्तीय सुरक्षा देने के एक प्रोग्राम के लिए भारत, तंजानिया को 840,000 डॉलर की मदद दे रहा है। भारत के स्थायी मिशन ने कहा, भारत तंजानिया सरकार की इस प्रस्तावित परियोजना के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का पूर्ण समर्थन करता है, जो लोगों के जीवन और आजीविका के लिए खतरा बन रहे जलवायु संबंधी जोखिमों से निपटने में एक प्रभावी माध्यम साबित होगी। तंजानिया सरकार द्वारा अनुरोधित अनुदान भारत-यूएन विकास कोष के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। 2017 में संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से भारत ने 15 करोड़ डॉलर की राशि के साथ इस कोष को बनाया था, ताकि वैश्विक दक्षिण के देशों को विकास सहायता प्रदान की जा सके।
यह अनुदान कोष की कॉमनवेल्थ विंडो के तहत दिया जाएगा, जो विशेष रूप से राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) के सदस्य देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। भारत-यूएन विकास कोष की सबसे खास विशेषता यह है कि अनुदान प्राप्त करने वाले देश स्वयं तय करते हैं कि उन्हें किस उद्देश्य के लिए सहायता चाहिए और वे इस धनराशि का उपयोग किस प्रकार करेंगे। यह व्यवस्था अधिकांश विकास सहायता कार्यक्रमों से अलग है, जहां आमतौर पर दानदाता देश या संस्थाएं ही यह तय करती हैं कि सहायता राशि का उपयोग किस कार्य के लिए किया जाएगा।
मिशन ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रीय स्वामित्व सुनिश्चित किया गया है, क्योंकि तंजानिया के प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत आपदा प्रबंधन विभाग इस परियोजना का नेतृत्व कर रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परियोजना देश की प्राथमिकताओं और रणनीतिक योजनाओं के अनुरूप हो।
पाकिस्तान में कोयला खदान में धमाके से 15 की मौत, 24 से ज्यादा खनिक फंसे
क्वेटा । पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सोरेंज कोलफील्ड में एक कोयला खदान में मीथेन गैस का धमाका हुआ। शुक्रवार को स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस धमाके के बाद कम से कम 15 खनिकों की मौत हो गई, जबकि 24 से ज्यादा लोग अभी फंसे हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि जब एक प्राइवेट कोयला खदान में धमाका हुआ, तब एक खदान में 24 खनिक जमीन के करीब 4,000 फीट नीचे काम कर रहे थे।
धमाके के बाद खदान में आग लग गई, जिससे ढांचा गिर गया। धमाके से घटनास्थल के पास मौजूद एक और खदान पर भी असर पड़ा। दूसरी खदान में काम कर रहे करीब 12 खनिक फंसे हुए हैं। चीफ इंस्पेक्टर ऑफ माइंस मुहम्मद आतिफ ने कहा कि जब हादसा हुआ तो दोनों खदानों में 36 कोयला खनिक मौजूद थे। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, आतिफ ने कहा कि माइंस एंड मिनरल्स डिपार्टमेंट और प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (पीडीएमए) ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहने तक गुरुवार रात तक 21 माइनर्स लापता थे।
इससे पहले मई में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के शांगला जिले में दो अलग-अलग कोयला खदानों में हुए हादसों में दो खनिक मारे गए थे और एक अन्य घायल हो गया था। पहली घटना अखोरवाल कोयला खदान की माइन नंबर 5 में हुई थी। सूत्रों के अनुसार, खदान में ऑपरेशन के दौरान दो मजदूर मलबे में दब गए थे।
लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद लौटीं कोलकाता
कोलकाता । बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता लौट आई हैं। यहां नसरीन रवींद्र सदन में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। अपनी रचनाओं के कारण भारी विरोध देखने वाली नसरीन ने 1994 में बांग्लादेश छोड़ा था और तब से निर्वासन झेल रहीं हैं। वह शुक्रवार को सीधे न्यूयॉर्क से कोलकाता पहुंची हैं, जहां उनकी आत्मकथा का विमोचन होगा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
नसरीन ने शहर आने से पहले आशा व्यक्त की थी कि यह यात्रा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की आवाज़ों के संरक्षण के महत्व को पुनः स्थापित करेगी।
उन्होंने कहा, कोलकाता शहर में लौटना अपने देश में लौटने जैसा अहसास है, बंगाल के पूर्वी हिस्से का दरवाजा मेरे लिए बंद है, इसलिए फिलहाल बंगाल का यही हिस्सा मेरा घर है। मैं एक अजनबी या मेहमान के रूप में नहीं लौट रही हूं। बांग्लादेशी लेखिका-कार्यकर्ता नसरीन 'लज्जा' किताब के कारण बांग्लादेश छोड़कर कोलकाता आई थीं, लेकिन 2003 में जब उनकी आत्मकथा 'द्विखोन्दितो' प्रकाशित हुई, तो इसने विवाद खड़ा कर दिया।
ऐसा माना जाता है कि किताब ने मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुंचाया। किताब को लेकर कोलकाता में काफी बवाल हुआ। आगजनी-हिंसा के बीच भारतीय सेना बुलानी पड़ी। तत्कालीन सरकारों ने किताब को प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन कोर्ट से मंजूरी पर फिर हालात बिगड़ गए। इसके बाद नसरीन को 2007 में कोलकाता छोड़ना पड़ा।
वंदे भारत की रफ्तार अब मालगाड़ियों में भी, 145 Km/H की स्पीड से दौड़ी फ्रेट ईएमयू
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने माल परिवहन के क्षेत्र में एक नई तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए देश के पहले वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू (सुपरफास्ट पार्सल रेक) का सफल ट्रायल शुरू कर दिया है। पहले ही दिन इस अत्याधुनिक रेक ने 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर भारतीय रेलवे के हाई-स्पीड फ्रेट नेटवर्क की दिशा में नई शुरुआत कर दी।
अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की निगरानी में यह ट्रायल 29 जुलाई 2026 से शुरू हुआ है और लगभग एक महीने तक विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। परीक्षण कोटा-नागदा-सवाई माधोपुर रेलखंड पर किए जा रहे हैं।
पहले दिन सफल रहा हाई-स्पीड ट्रायल
परीक्षण के पहले दिन विशेष फ्रेट ईएमयू सुबह 6 बजे कोटा से महिदपुर रोड के लिए रवाना हुआ। शुरुआत में 120 किमी प्रति घंटे की गैर-अभिलेखित गति से परीक्षण किया गया, जबकि बाद में 120 और 135 किमी प्रति घंटे की अभिलेखित गति पर सफल ट्रायल हुए। वापसी के दौरान रेक ने 145 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की। पूरे परीक्षण के दौरान रेलवे ने निर्बाध ग्रीन सिग्नल उपलब्ध कराए।
एक महीने तक होंगे कई अहम परीक्षण
ट्रायल अवधि में इस फ्रेट ईएमयू पर विभिन्न परिस्थितियों में उच्च स्तरीय तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इनमें ऑसिलेशन ट्रायल, इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD), कपलर फोर्स, कर्व परफॉर्मेंस, ट्रैक्शन एवं ब्रेकिंग सिस्टम, पुनर्योजी ऊर्जा (Regenerative Energy), सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणाली, स्वचालित दरवाजों की कार्यक्षमता, सीसीटीवी, एलईडी लाइटिंग और सुरक्षा प्रणालियों का परीक्षण शामिल है।
वंदे भारत तकनीक से तैयार आधुनिक फ्रेट रेक
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई द्वारा विकसित यह 16 कोचों वाला फ्रेट ईएमयू भारतीय रेलवे का पहला वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित मालवाहक रेक है। इसमें 2 रेफ्रिजरेटेड वैन, 2 एनडीटीसी और 12 पार्सल कोच लगाए गए हैं।
इस रेक की कुल 397.02 टन पेलोड क्षमता है और इसे ई-कॉमर्स, एक्सप्रेस पार्सल, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स तथा समयबद्ध माल परिवहन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
सुरक्षा और तकनीक का आधुनिक संयोजन
फ्रेट ईएमयू में वंदे भारत ट्रेन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें स्वचालित चौड़े स्लाइडिंग दरवाजे, फोर्स्ड वेंटिलेशन, न्यूमैटिक रिट्रैक्टेबल रोलर फ्लोरिंग, सीसीटीवी, एलईडी लाइटिंग, अग्नि सुरक्षा प्रणाली और कंटेनर लॉकिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था के तहत 5 किमी प्रति घंटे से अधिक गति होने पर सभी दरवाजे स्वतः लॉक हो जाते हैं और सभी दरवाजों के पूरी तरह बंद होने के बाद ही रेक का संचालन संभव होता है।
माल परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार
भारतीय रेलवे का मानना है कि सफल परीक्षणों के बाद यह हाई-स्पीड फ्रेट ईएमयू देश में पार्सल और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में बड़ा बदलाव लाएगा। व्यावसायिक संचालन शुरू होने पर यह पारंपरिक मालगाड़ियों की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित, समयबद्ध और विश्वसनीय परिवहन विकल्प साबित होगा। इसके जरिए ई-कॉमर्स, कोल्ड-चेन और एक्सप्रेस पार्सल सेवाओं को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर को सड़क विकास की बड़ी सौगात
चार ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण के लिए 8.44 करोड़ रुपये से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति
बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार को मिलेगा नया संबल
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण सौगात मिली है। राज्य शासन ने वर्ष 2025-26 के बजट प्रावधान के अंतर्गत जिले के चार प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण के लिए कुल 8 करोड़ 44 लाख 68 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इन सड़कों के निर्माण से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा आवागमन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। शासन के इस निर्णय से क्षेत्रवासियों में उत्साह और खुशी का माहौल है।
राज्य शासन द्वारा जारी स्वीकृति के अनुसार बुलडेगा से रेचवाघाट पहुंच मार्ग (1.20 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 1 करोड़ 23 लाख 77 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस सड़क के निर्माण से ग्रामीणों को वर्षभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी तथा दैनिक आवागमन में आने वाली परेशानियां दूर होंगी।
इसी प्रकार खुंटापानी से सलियामुड़ा पहुंच मार्ग (3 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 3 करोड़ 46 लाख 67 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह मार्ग कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। सड़क बनने से विद्यार्थियों को विद्यालय, मरीजों को स्वास्थ्य संस्थानों तथा किसानों को कृषि उपज के परिवहन में बेहतर सुविधा मिलेगी।
कोसमभावना से बनगांव पहुंच मार्ग (1.20 किलोमीटर) के निर्माण, जिसमें पुल-पुलिया का निर्माण भी शामिल है, के लिए 1 करोड़ 43 लाख 84 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से विशेषकर बरसात के दौरान आवागमन बाधित होने की समस्या का स्थायी समाधान होगा और ग्रामीणों को पूरे वर्ष सुरक्षित आवागमन का लाभ मिलेगा।
इसके अतिरिक्त बुलडेगा मेन रोड से सुकबासुपारा होते हुए भिंजपुर पहुंच मार्ग (2.50 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 2 करोड़ 30 लाख 40 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र के अनेक गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और ग्रामीणों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।
इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में सड़क संपर्क व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी, विद्यार्थियों और मरीजों का आवागमन सुगम होगा तथा स्थानीय व्यापार और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी निर्णय ले रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सड़क निर्माण कार्यों से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने की भेंट, छत्तीसगढ़ के विकास और ‘बस्तर विजन’ पर हुई विस्तृत चर्चा
राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना, 461 गांवों में स्थायी ग्रिड कनेक्टिविटी और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना के लिए मांगा सहयोग
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखा बदलते बस्तर का रोडमैप
शांति और विश्वास के साथ अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है बस्तर - मुख्यमंत्री श्री साय
‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने’ से 5,542 गांवों के लगभग 39 लाख लोगों तक पहुंच रही शासन की योजनाएं
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में शामिल होने का दिया आमंत्रण
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प तथा राज्य की महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष बदलते छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप बस्तर आज व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, आजीविका, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना के लिए शीघ्र मंजूरी का किया अनुरोध
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा राज्य सरकार के स्तर की आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के स्थापित होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर होगी। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए मांगी विशेष सहायता
मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के ऐसे 461 गांवों का विषय भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखा, जहां पूर्व में सुरक्षा एवं भौगोलिक कारणों से विद्युत ग्रिड पहुंचाना संभव नहीं हो पाया था और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी विद्युत आपूर्ति से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, आजीविका और लघु उद्यमों के विस्तार को गति मिलेगी तथा दूरस्थ अंचलों में विकास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।
रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना का किया अनुरोध
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।
5,542 गांवों तक पहुंच रहा विकास, लगभग 39 लाख लोगों को लाभ
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री के समक्ष ‘बस्तर विजन’ की विस्तृत जानकारी रखते हुए बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्त मुन्ने’ के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में शासन की योजनाओं और सेवाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया जा रहा है जिससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राशन, आयुष्मान भारत, जनधन खाते, वनाधिकार, प्रधानमंत्री आवास सहित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दूरस्थ और पूर्व में अत्यधिक संवेदनशील रहे गांवों में प्रशासन की पहुंच बढ़ने से शासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।
421 बंद स्कूल फिर खुले, ओरछा और जगरगुंडा में बनेंगी एजुकेशन सिटी
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को बस्तर में शिक्षा के क्षेत्र में आए परिवर्तन की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है। जिन गांवों में कभी बच्चों के लिए नियमित शिक्षा तक पहुंच बड़ी चुनौती थी, वहां अब स्कूलों में फिर से पढ़ाई शुरू हुई है।
उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी राज्य सरकार कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवासीय सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ में 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के अंतर्गत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और आवश्यकता के अनुरूप उन्हें चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि बस्तर में चिकित्सा अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ गीदम में मेडिकल कॉलेज के माध्यम से क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार नए मेडिकल कॉलेजों और आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क से बदल रही बस्तर की तस्वीर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के स्थायी विकास के लिए कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसी दृष्टि से सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि लगभग ₹3,513 करोड़ की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना पर कार्य आगे बढ़ रहा है। इस रेल संपर्क से बस्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। जगदलपुर से नियमित हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण की प्रगति तथा इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि बैराज परियोजना से लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे क्षेत्र के किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।
बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड बनाने की दिशा में प्रयास
मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर की अनूठी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन संभावनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे विश्वस्तरीय प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करने के लिए अधोसंरचना एवं सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर का विकास उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के संरक्षण के साथ किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।
बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने दिया बदलाव का संदेश
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। खेलों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिला है और शांति, विश्वास तथा सामाजिक सहभागिता को भी मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर की नई पहचान खेल, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन, उद्यमिता और विकास से निर्मित हो रही है।
छत्तीसगढ़ को मिले लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को राज्य में तेजी से बदल रहे औद्योगिक परिदृश्य की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें अनेक परियोजनाओं पर क्रियान्वयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को परंपरागत क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों की ओर ले जाया जा रहा है। राज्य में पहली बार एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, गारमेंट, चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में निवेश आ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निवेशों से राज्य की अर्थव्यवस्था में विविधता आने के साथ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी निर्मित होंगे।
निवेश अनुकूल वातावरण में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि निवेशकों के लिए पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय सुगमता और संस्थागत वातावरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026’ की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य ने उद्योगों और उद्यमियों के लिए जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था, सेल्फ सर्टिफिकेशन और समयबद्ध अनुमतियों को कानूनी आधार प्रदान किया है। इससे निवेशकों को निश्चितता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित व्यवस्था मिल रही है।
10.42 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब 14 लाख और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर 10.42 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया है। अब अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर राज्य सरकार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।
₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन से तकनीक आधारित सुशासन की ओर छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शासन की सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
वित्तीय अनुशासन के साथ जनकल्याण, राजस्व वृद्धि में छत्तीसगढ़ का मजबूत प्रदर्शन
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को राज्य की सुदृढ़ होती वित्तीय स्थिति और राजस्व वृद्धि से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करते हुए राजकोषीय एवं राजस्व घाटे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। राज्य में जीएसटी राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं खनिज राजस्व में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खनिज क्षेत्र में नई संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के पहले टिन ब्लॉक और लिथियम ब्लॉक की नीलामी कर छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
तकनीक और पारदर्शिता से नागरिक-केंद्रित सुशासन को नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में निरंतर सुधार कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जिससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और लाखों आवेदनों का समयबद्ध निराकरण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान और प्रभावी निगरानी की व्यवस्था भी विकसित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व प्रशासन में व्यापक डिजिटल सुधार करते हुए रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू की गई है। आधार और वीडियो केवाईसी के माध्यम से घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का मूल उद्देश्य शासन को नागरिकों के और निकट लाना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक सहज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में विकास की गति तेज हुई है। प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के समग्र कायाकल्प से लेकर कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक विकास से जुड़े राज्य के इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिलेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा कभी चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ को शांति, समृद्धि और संभावनाओं के नए मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।
बस्तर के कायाकल्प की योजना को लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय
रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बस्तर के समग्र विकास का रोडमैप प्रधानमंत्री के सामने रखा और राज्य की कई प्रमुख परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से तीन प्रमुख विषयों पर विशेष सहयोग मांगा। पहला- राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र मंजूरी दी जाए। उन्होंने बताया कि इसके लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य सरकार की सभी आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी हो चुकी हैं। परियोजना शुरू होने से किसानों को बड़ी सुविधा मिलेगी और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी। दूसरा, जिन 461 गांवों में पहले सुरक्षा कारणों से बिजली का ग्रिड नहीं पहुंच पाया था और जहां फिलहाल ऑफ-ग्रिड बिजली व्यवस्था है, उन्हें स्थायी ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहायता देने का आग्रह किया गया। तीसरा, मुख्यमंत्री ने रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एआईआईए) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया।
सीएम साय ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘बस्तर विजन’ की जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर अब तेजी से बदल रहा है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुहिम’ के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में सरकारी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब राशन, आयुष्मान भारत, जनधन, वनाधिकार और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों की जानकारी देते हुए बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बंद पड़े 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। साथ ही दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है, ताकि दूरदराज के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं और राज्य में नए मेडिकल कॉलेजों एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना का भी विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बस्तर को कभी नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता था, वहां अब सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन का निर्माण कार्य जारी है। साथ ही जगदलपुर से नियमित हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। उन्होंने रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण और इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना की भी जानकारी दी, जिससे लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने बस्तर की संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड बनाने की दिशा में काम चल रहा है। साथ ही चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने क्षेत्र में शांति, विश्वास और सकारात्मक माहौल को मजबूत किया है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में तेजी से बढ़ रहे निवेश की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर प्लांट, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, गारमेंट और चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करने के कारण छत्तीसगढ़ को नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय और संस्थागत माहौल के लिए देश में पहला स्थान मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' एक्ट-2026 लागू किया है। यह देश का पहला ऐसा कानून है जिसमें जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था, सेल्फ सर्टिफिकेशन और समयबद्ध अनुमतियों को कानूनी रूप दिया गया है।
महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए सीएम विष्णुदेव साय ने बताया कि राज्य ने लक्ष्य से अधिक 10.42 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाया है। अब सरकार अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। उन्होंने वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित लखपति दीदी सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को राज्य की मजबूत होती वित्तीय स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित किया है। राज्य में राजकोषीय एवं राजस्व घाटे में उल्लेखनीय कमी आई है, जबकि जीएसटी में 18 प्रतिशत और खनिज राजस्व में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। देश के पहले टिन ब्लॉक एवं लिथियम ब्लॉक की नीलामी हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जिससे लाखों आवेदनों का समयबद्ध निराकरण हुआ है। राजस्व मामलों में रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू की गई है, वहीं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के जरिए शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही आधार और वीडियो केवाईसी के माध्यम से घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध कराकर आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी और सुगम बनाई गई हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के विकास से जुड़े इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा।
शहजाद पूनावाला ने छोड़ी भाजपा, सोशल मीडिया पर दी जानकारी
नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और नेता शहजाद पूनावाला ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। इसकी जानकारी खुद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दी। उन्होंने कुछ घंटे पहले अपना प्रोफाइल बायो अपडेट किया। नए बायो में भाजपा का नाम कहीं नहीं है। शहजाद पूनावाला ने अपने बायो का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। जिसमें लिखा था, "धर्म इस्लाम, संस्कृति-हिंदू, विचारधारा-भारतीय। लेखक: जीएसटी की यात्रा। पीएम मोदी के आजीवन अनुयायी।" यानी उन्होंने खुद को 'पीएम नरेंद्र मोदी का जीवन भर का समर्थक' बताया है, लेकिन भाजपा का कोई जिक्र नहीं किया।
बता दें कि शहजाद पूनावाला पहले कांग्रेस में थे। 2017 में पार्टी के अध्यक्ष चुनाव को लेकर विवाद के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी।
भाजपा में रहते हुए शहजाद टीवी डिबेट और सोशल मीडिया पर अपनी तीखी बातों के लिए जाने जाते थे। वे पीएम मोदी और भाजपा की नीतियों के सबसे मुखर समर्थकों में से एक माने जाते थे। उन्होंने कई बार कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी हमले किए थे।
इस्तीफे की वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन बायो में बदलाव और पार्टी का नाम हटाने से कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने पीएम मोदी के प्रति अपना समर्थन बरकरार रखा है। बायो में 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आजीवन अनुयायी' लिखकर उन्होंने साफ किया कि विचारधारा से उनका जुड़ाव अब भी है।
शहजाद पूनावाला के इस कदम के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। भाजपा की तरफ से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शहजाद पूनावाला भाजपा की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समय-समय पर राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधते रहे हैं।
वंदे भारत की रफ्तार अब मालगाड़ियों में भी, 145 Km/H की स्पीड से दौड़ी फ्रेट ईएमयू
नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने माल परिवहन के क्षेत्र में एक नई तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए देश के पहले वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू (सुपरफास्ट पार्सल रेक) का सफल ट्रायल शुरू कर दिया है। पहले ही दिन इस अत्याधुनिक रेक ने 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर भारतीय रेलवे के हाई-स्पीड फ्रेट नेटवर्क की दिशा में नई शुरुआत कर दी।
अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की निगरानी में यह ट्रायल 29 जुलाई 2026 से शुरू हुआ है और लगभग एक महीने तक विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। परीक्षण कोटा-नागदा-सवाई माधोपुर रेलखंड पर किए जा रहे हैं।
पहले दिन सफल रहा हाई-स्पीड ट्रायल
परीक्षण के पहले दिन विशेष फ्रेट ईएमयू सुबह 6 बजे कोटा से महिदपुर रोड के लिए रवाना हुआ। शुरुआत में 120 किमी प्रति घंटे की गैर-अभिलेखित गति से परीक्षण किया गया, जबकि बाद में 120 और 135 किमी प्रति घंटे की अभिलेखित गति पर सफल ट्रायल हुए। वापसी के दौरान रेक ने 145 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की। पूरे परीक्षण के दौरान रेलवे ने निर्बाध ग्रीन सिग्नल उपलब्ध कराए।
एक महीने तक होंगे कई अहम परीक्षण
ट्रायल अवधि में इस फ्रेट ईएमयू पर विभिन्न परिस्थितियों में उच्च स्तरीय तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इनमें ऑसिलेशन ट्रायल, इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD), कपलर फोर्स, कर्व परफॉर्मेंस, ट्रैक्शन एवं ब्रेकिंग सिस्टम, पुनर्योजी ऊर्जा (Regenerative Energy), सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणाली, स्वचालित दरवाजों की कार्यक्षमता, सीसीटीवी, एलईडी लाइटिंग और सुरक्षा प्रणालियों का परीक्षण शामिल है।
वंदे भारत तकनीक से तैयार आधुनिक फ्रेट रेक
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई द्वारा विकसित यह 16 कोचों वाला फ्रेट ईएमयू भारतीय रेलवे का पहला वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित मालवाहक रेक है। इसमें 2 रेफ्रिजरेटेड वैन, 2 एनडीटीसी और 12 पार्सल कोच लगाए गए हैं।
इस रेक की कुल 397.02 टन पेलोड क्षमता है और इसे ई-कॉमर्स, एक्सप्रेस पार्सल, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स तथा समयबद्ध माल परिवहन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
सुरक्षा और तकनीक का आधुनिक संयोजन
फ्रेट ईएमयू में वंदे भारत ट्रेन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें स्वचालित चौड़े स्लाइडिंग दरवाजे, फोर्स्ड वेंटिलेशन, न्यूमैटिक रिट्रैक्टेबल रोलर फ्लोरिंग, सीसीटीवी, एलईडी लाइटिंग, अग्नि सुरक्षा प्रणाली और कंटेनर लॉकिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था के तहत 5 किमी प्रति घंटे से अधिक गति होने पर सभी दरवाजे स्वतः लॉक हो जाते हैं और सभी दरवाजों के पूरी तरह बंद होने के बाद ही रेक का संचालन संभव होता है।
माल परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार
भारतीय रेलवे का मानना है कि सफल परीक्षणों के बाद यह हाई-स्पीड फ्रेट ईएमयू देश में पार्सल और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में बड़ा बदलाव लाएगा। व्यावसायिक संचालन शुरू होने पर यह पारंपरिक मालगाड़ियों की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित, समयबद्ध और विश्वसनीय परिवहन विकल्प साबित होगा। इसके जरिए ई-कॉमर्स, कोल्ड-चेन और एक्सप्रेस पार्सल सेवाओं को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति मामले में फैसला सुरक्षित रखा
नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया संबंधी कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को पांच न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजने के प्रश्न पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है। इन याचिकाओं में नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति से भारत के प्रधान न्यायाधीश को बाहर रखे जाने को चुनौती दी गई है।
उच्चतम न्यायालय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को विनियमित करने संबंधी कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को पांच न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजे जाने की आवश्यकता है या नहीं, इस पर बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा, ‘‘संदर्भ (बड़ी पीठ के पास भेजने) के प्रश्न पर हम अपना फैसला सुरक्षित रख रहे हैं।
आप अपनी लिखित दलीलें दाखिल कर सकते हैं।’’ न्यायालय मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इस कानून के तहत निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति से भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को बाहर रखा गया है। वर्ष 2023 के इस कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता शामिल होते हैं।जनहित याचिकाओं में कहा गया है कि चयन समिति से सीजेआई को बाहर रखने से निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। कांग्रेस नेता जया ठाकुर और ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ समेत कई याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को चुनौती दी है।
छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास को मिलेगी रफ्तार, CM साय की रेल मंत्री वैष्णव के साथ अहम बैठक
नई दिल्ली/रायपुर । छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क के विस्तार और नई रेल परियोजनाओं को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू से मुलाकात कर राज्य की प्रमुख रेलवे परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में बस्तर सहित प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रेल संपर्क से जोड़ने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। रेल मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल यातायात सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
बैठक में रावघाट–कोंडागांव–जगदलपुर रेल संपर्क परियोजना पर विशेष चर्चा हुई। रेल मंत्रालय ने बताया कि इस परियोजना की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और बस्तर क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी।
इसके अलावा गढ़चिरौली–दंतेवाड़ा रेल लिंक परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इस रेल मार्ग के बनने से छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच संपर्क मजबूत होगा और आदिवासी अंचलों के विकास को नई दिशा मिलेगी।
बैठक में डोंगरगढ़–कटघोरा रेल लाइन परियोजना पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस परियोजना को संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) मॉडल के तहत आगे बढ़ाया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार अपनी इक्विटी हिस्सेदारी देगी, जबकि राज्य सरकार भी आवश्यक वित्तीय योगदान सुनिश्चित करेगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार छत्तीसगढ़ के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने 'स्वर्णिम छत्तीसगढ़' के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि रेलवे अवसंरचना का विस्तार राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक को छत्तीसगढ़ में रेलवे परियोजनाओं को नई गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से बस्तर और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है : राष्ट्रपति मुर्मु
राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने मांझी-चालकी, राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को परोसा भोजन
रायपुर । बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व की गौरवशाली विरासत ने आज राष्ट्रपति भवन में इतिहास रच दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और आत्मीय दृश्य तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। राष्ट्रपति की इस सहज आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया।
प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के प्रतिनिधि, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, पद्मश्री सम्मानित विभूतियाँ, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, मांझी-चालकी प्रणाली तथा बस्तर पंडुम के आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है और उसका संरक्षण पूरे देश का दायित्व है।
राष्ट्रपति ने जताई बस्तर आने की इच्छा
मुख्यमंत्री साय के आग्रह पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा एवं बस्तर पंडुम में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। राष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा तथा बस्तर दशहरा की अद्वितीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बस्तर दशहरा से विशेष आत्मीय संबंध रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि मांझी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण की सशक्त आधारशिला है।
बस्तर पंडुम ने संस्कृति को दिलाई नई पहचान
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने बस्तर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करते हैं।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
बस्तर विकास और शांति की नई पहचान बन रहा है
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी के परिणामस्वरूप बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में आया यह सकारात्मक परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।
उन्होंने मांझी एवं चालकी की भूमिका की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हुए सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा बस्तर का ऐसा वैभव - अमित शाह
इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक अवसरों पर राष्ट्रपति भवन आए हैं, किंतु पहली बार उन्होंने राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक है।
मुख्यमंत्री बोले – यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय भेंट पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मानित हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है तथा स्थानीय कलाकारों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज और उसकी संस्कृति से गहरा आत्मीय जुड़ाव है। उनके अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि उनके आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी तथा जनजातीय समाज का उत्साह और बढ़ेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया तथा भारत की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत हुआ।
राष्ट्रपति को भेंट की गई बस्तर की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट की। यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, समर्पण, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।
लोकमान्यता के अनुसार कठिन अकाल के समय झिटकू और मिटकी ने अपने प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी अमिट मिसाल प्रस्तुत की कि उन्हें देवतुल्य सम्मान प्राप्त हुआ। आज भी बस्तर अंचल में झिटकू को 'खोड़िया राजा' तथा मिटकी को 'गप्पा देई' के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, विशेष सचिव रजत बंसल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक संजय कन्नौजे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
ट्रंप ने फेडरल रिजर्व से ब्याज दरें घटाने की अपील की
वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों में कटौती करने की अपील करते हुए कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के विस्तार को देखते हुए देश में दुनिया की सबसे कम उधारी दरें होनी चाहिए। सोमवार को मिशिगन जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने यह टिप्पणी की। इस सप्ताह फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक होने वाली है। ट्रंप ने कहा, ब्याज दरें कम की जानी चाहिए। यह देश 8, 9, 10 फीसदी, यहां तक कि 12 फीसदी जीडीपी वृद्धि हासिल कर सकता है। ऐसा ही होना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरें उन कुछ देशों से भी अधिक हैं, जो आर्थिक और सुरक्षा के लिहाज से काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा, दुनिया में सबसे कम ब्याज दर अमेरिका की होनी चाहिए। ऐसे कई देश हैं जहां ब्याज दरें हमसे कम हैं, जबकि अगर अमेरिका उनका साथ न दे तो उनका अस्तित्व भी मुश्किल हो जाए।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका है, तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के नेतृत्व को अपने बोर्ड का समर्थन हासिल करना होगा।
ट्रंप ने कहा, मेरे पास भी एक बोर्ड है। केविन शानदार हैं, लेकिन उनके पास भी एक बोर्ड है और मेरा मानना है कि बोर्ड के सदस्य काफी हद तक राजनीतिक सोच से प्रभावित हैं। वह सही काम करना चाहते हैं। मुझे पता है कि वह क्या करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ ऐसे लोगों की सहमति चाहिए, जिनकी मंशा शायद ठीक नहीं है।
उन्होंने हालिया महंगाई के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि कीमतों में तेजी से गिरावट आ रही है। साथ ही, ट्रंप ने एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को उनके कार्यकाल में बढ़ी महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराया।
ट्रंप ने कहा, लागत तेजी से कम हो रही है। यह मत भूलिए कि मुझे पद संभाले ज्यादा समय नहीं हुआ है। मुझे बाइडेन से इतिहास की सबसे खराब महंगाई विरासत में मिली थी, लेकिन अब लागत तेजी से घट रही है।
राष्ट्रपति ने महंगाई के भविष्य को ईरान से जुड़े जारी युद्ध से भी जोड़ते हुए कहा कि संघर्ष समाप्त होने के बाद कीमतों में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा, जैसे ही यह युद्ध खत्म होगा, आप कीमतों में बड़ी गिरावट देखेंगे।
ट्रंप ने स्विट्जरलैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ बड़ा व्यापार असंतुलन होने के बावजूद वहां उधारी की ब्याज दरें काफी कम हैं। उन्होंने कहा, अगर आप स्विट्जरलैंड को देखें, जहां हमारा घाटा 30 अरब डॉलर है, तो मैं उस घाटे को रातों-रात खत्म कर सकता हूं।
ट्रंप ने बार-बार कहा है कि कम ब्याज दरें निवेश को बढ़ावा देंगी, उधार लेने की लागत कम करेंगी और आर्थिक विकास को मजबूत करेंगी। राष्ट्रपति पारंपरिक रूप से फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों को निर्देशित करने से बचते हैं, हालांकि वे आर्थिक स्थितियों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी क
प्रधानमंत्री मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में ट्रांसजेंडर मेकअप आर्टिस्ट जानमोनी दास पर केस दर्ज
तिरुअऩंतपुरम । केरल के कोझिकोड में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में ट्रांसजेंडर मेकअप आर्टिस्ट जानमोनी दास के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। भाजपा महिला मोर्चा की शिकायत पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है। यह मामला जानमोनी दास द्वारा सोशल मीडिया पर माफी मांगने के एक दिन बाद दर्ज हुआ है।
कोझिकोड (केरल), 28 जुलाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में चर्चित ट्रांसजेंडर मेकअप आर्टिस्ट और रियलिटी शो में भाग ले चुकी जानमोनी दास के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। कोझिकोड साइबर पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष नव्या हरिदास द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया है।
प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी ने अशांति फैलाने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के इरादे से विभिन्न सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से प्रधानमंत्री के खिलाफ मानहानिकारक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं। पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) और धारा 356(2) (आपराधिक मानहानि), तथा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(ओ) (बार-बार या अवांछित संचार के माध्यम से उपद्रव फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह मामला प्रधानमंत्री मोदी और उनके माता-पिता को लेकर की गई हालिया टिप्पणियों के लिए जानमोनी की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के एक दिन बाद दर्ज किया गया है।
जानमोनी ने कहा था कि उनका इरादा किसी को जानबूझकर ठेस पहुंचाने का नहीं था। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में दास ने कहा कि यदि उनकी टिप्पणी से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगती हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ऐसा बयान देने से पहले उन्हें तथ्यों की पुष्टि कर लेनी चाहिए थी।
नयी दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर मीडिया के एक वर्ग से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दास की आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था, जिसके बाद उनकी तीखी आलोचना हुई। दास ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए नए वीडियो में कहा, ‘‘मेरे वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुझे अंदाजा नहीं था कि यह इतना बड़ा मुद्दा बन जाएगा।
मैंने दिल्ली के प्रदर्शन से संबंधित एक वीडियो देखने के बाद प्रतिक्रिया दी थी और मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दिया था। हो सकता है कि मैं मलयालम में अपनी बात ठीक तरह से नहीं रख पाई।’’ अपनी पुरानी टिप्पणियों पर सफाई देते हुए दास ने कहा कि उनका प्रधानमंत्री की मां के बारे में कोई टिप्पणी करने का इरादा नहीं था और उनकी बात केवल उस वीडियो में दिखाई गई सामग्री से संबंधित थी, जिसे उन्होंने देखा था।
राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव बनेंगे जगदीश आफले, जल्द होगी औपचारिक घोषणा
अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के परियोजना प्रबंधक रहे जगदीश आफले का नाम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रथम सचिव के तौर पर नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। ट्रस्ट ने 22 जुलाई को हुई अपनी बैठक में सचिव और प्रवक्ता का पद सृजित करने का फैसला किया था।
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने पुष्टि की है कि न्यास के सचिव पद के लिये जगदीश आफले का नाम प्रस्तावित किया गया है और उनकी नियुक्ति की औपचारिक घोषणा आगामी दो सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में की जा सकती है। मंदिर सूत्रों के अनुसार, प्रवक्ता के पद के लिए चयन प्रक्रिया जारी है और कई नामों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि पुणे (महाराष्ट्र) के रहने वाले जगदीश आफले के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्रगाढ़ संबंध हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियंिरग में बीटेक और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई से एमटेक की पढ़ाई करने वाले आफले ने भारत, यूरोप के कुछ देशों और अमेरिका की एक कंपनी में भी काम किया, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भारत लौट आए।
सूत्रों के अनुसार, जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई तो आफले संघ की ओर से परियोजना प्रबंधक के तौर पर मानद सेवा देने के लिए अयोध्या आये थे और तभी से वह अपनी पत्नी के साथ तीर्थ क्षेत्र भवन में रह रहे हैं।
1 करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार
धनबाद । झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन-209 ने संयुक्त अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 1 करोड़ रुपये के इनामी और केंद्रीय कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ दो अन्य नक्सलियों को भी हिरासत में लिया गया है। मिसिर बेसरा झारखंड, बिहार समेत कई राज्यों में मोस्ट वांटेड नक्सलियों की सूची में शामिल था।
जंगल में घेराबंदी कर दबोचा
खुफिया एजेंसियों से मिली सटीक सूचना के आधार पर झारखंड पुलिस और कोबरा-209 ने मंगलवार देर रात धनबाद-गिरिडीह सीमा स्थित मनियाडीह के जंगल में संयुक्त ऑपरेशन चलाया। घेराबंदी के दौरान मिसिर बेसरा और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया गया।
कई राज्यों में दर्ज हैं गंभीर मामले
मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था। उस पर झारखंड सहित कई राज्यों में नक्सली हिंसा, सुरक्षा बलों पर हमलों की साजिश और अन्य गंभीर मामलों के आरोप हैं। सुरक्षा एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी को माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कामयाबी मान रही हैं।
एक दिन पहले 16 माओवादियों ने किया था सरेंडर
इस कार्रवाई से एक दिन पहले झारखंड पुलिस के सामने 16 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें छह नक्सलियों पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वालों में संतोष महतो उर्फ बासुदेव दा उर्फ दिलीप भी शामिल है, जो 128 मामलों में वांछित था और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले समूह में पांच महिला माओवादी, एक क्षेत्रीय समिति सदस्य, एक जोनल समिति सदस्य, दो उप-जोनल समिति सदस्य और दो एरिया समिति पदाधिकारी भी शामिल हैं।
पुलिस ने बताया बड़ी उपलब्धि
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी और एक दिन पहले 16 माओवादियों का आत्मसमर्पण झारखंड में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन कार्रवाइयों से राज्य में नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
अंतरिक्ष में इतिहास रचेंगे भारतीय मूल के अनिल मेनन
नई दिल्ली । भारतीय मूल के नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अगले हफ्ते अपने करियर की पहली स्पेसवॉक (अंतरिक्ष में चहलकदमी) करेंगे। वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से बाहर निकलकर सोलर एरे को अपग्रेड करेंगे और कम्युनिकेशन एंटीना बदलेंगे। नासा ने यह जानकारी दी।
केरल के पलक्कड़ से ताल्लुक रखने वाले अनिल मेनन अपने साथी अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर के साथ 6 अगस्त से स्पेसवॉक की शुरुआत करेंगे। वे भविष्य में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन रोल-आउट सोलर एरे (आईरोसा) की स्थापना के लिए ऑर्बिटल लैब को तैयार करेंगे। आईरोसा स्टेशन के सुरक्षित और नियंत्रित डिऑर्बिट समेत महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अतिरिक्त बिजली प्रदान करेगा। स्पेसवॉक 6 अगस्त, 13 अगस्त और 25 अगस्त को तय किए गए हैं।
13 अगस्त को होने वाले दूसरे स्पेसवॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्री स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना बदलेंगे। यह महत्वपूर्ण संचार प्रणाली है, जिसका उपयोग नासा के ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और स्पेस स्टेशन के बीच डेटा तथा हाई-स्पीड संचार भेजने के लिए किया जाता है।
25 अगस्त को होने वाले स्पेसवॉक में क्रू मेंबर पावर चैनल केबल और डेटा रिले सिस्टम जोड़ेंगे। इसके अलावा हार्मनी मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट पर अंतरिक्ष यान की डॉकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले नेविगेशन एड को भी बदला जाएगा।
अनिल मेनन ने पिछले सप्ताह अंतरिक्ष से स्पेसएक्स के साउथ टेक्सास स्थित लॉन्च साइट स्टारबेस की तस्वीर साझा की थी। मेनन ने सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के जरिए 14 जुलाई को स्पेस स्टेशन की यात्रा पूरी की थी। वह कक्षा में लगभग आठ महीने बिताएंगे और इस दौरान वैज्ञानिक प्रयोगों तथा तकनीकी प्रदर्शनों में हिस्सा लेंगे।