छत्तीसगढ़ / मुंगेली
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घरेलू रंजिश के चलते पुत्र ने किया अपनी मां की हत्या, पिता पर भी किया कुल्हाड़ी जानलेवा हमला, आरोपी पुत्र गिरफ्तार
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मुक्तिधाम में मनाया गया हरेली त्यौहार
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प्रदेश सरकार के ताना शाही पूर्ण रविये से नाराज कांग्रेसी उतरे सड़को पर बिलासपुर जबलपुर नेशनल हाइवे 130 A में किया चक्काजाम
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फंदे पर लटकी मिली थी नाबालिग: परिजनों ने लगाया था मारपीट और हत्या का आरोप
लोरमी। छत्तीसगढ़ के लोरमी में नाबालिग युवती की लाश फांसी पर लटकती हुई मिली थी। मामले को लेकर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी इस संबंध में परिजनों ने नाबालिग की हत्या करने का आरोप लगाया था।
यह पूरा मामला चिल्फी थाना अंतर्गत डिंडौरी चौकी के ग्राम पंचायत नवरंगपुर का है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
इस पूरे मामले में मृतका के दादा ने बताया कि, सोनिया लुनिया और एक उनकी पुत्री ने उनकी मृतका पोती को धमकी दी थी। इस दौरान उन्होंने मृतिका युवती को अपने दामाद से दूर रहने की हिदायत भी दी थी।
साथ ही घटना वाले दिन फिर से उसके घर जाकर मृतका से मारपीट कर उसका फोन छीन लिया था। जिसके बाद वे सभी घर से बाहर निकल गए।
बहन ने बताई पूरी कहानी
मृतका की छोटी बहन उषा ने बताया कि, जब मैं घर आई तब घर में मेरी बड़ी बहन फांसी पर लटकी हुई मिली। उसी दौरान मैंने सोनिया लुनिया और उनकी बेटी को घर से बाहर निकलते देखा भी था।
आरोपी महिला को किया गया गिरफ्तार
फिलहाल डिंडौरी पुलिस चौकी प्रभारी लखीराम ध्रुव ने बताया कि इस मामले में आरोपी महिला सोनिया लुनिया और उसकी बेटी को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही हैं और अभी जाँच जारी है।
फर्जी प्रमाण पत्र से सरकारी नौकरी: कलेक्टर ने शुरू की बर्खास्तगी प्रक्रिया
सबसे ज्यादा फर्जी भर्ती शिक्षा और कृषि विभाग में
मुंगेली। मुंगेली जिले में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के सहारे शासकीय नौकरी करने वाले 27 कर्मचारियों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इनमें से सबसे अधिक भर्ती शिक्षा और कृषि विभाग में हुई है। अधिकांश ने श्रवण बाधित (बहरापन) का झूठा मेडिकल सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी पाई। इस फर्जीवाड़े की पुष्टि सिम्स बिलासपुर और भीमराव अंबेडकर स्मृति अस्पताल रायपुर की मेडिकल जांच रिपोर्ट से हुई है।
जांच के बाद कलेक्टर मुंगेली ने विभागीय प्रमुखों को पत्र जारी कर बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। जिन 27 लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी सूची के साथ विभागवार विवरण भी जारी किया गया है।
शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा फर्जी नियुक्तियां
11 शिक्षक और व्याख्याता फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त पाए गए हैं, जिनमें मनीषा कश्यप, टेक सिंह राठौर, रवीन्द्र गुप्ता, पवन सिंह राजपूत, विकास सोनी, अक्षय सिंह राजपूत, गोपाल सिंह राजपूत, योगेन्द्र सिंह राजपूत, मनीष राजपूत, नरहरी सिंह राठौर, राकेश सिंह राजपूत शामिल हैं।
कृषि विभाग में 12 अधिकारी फर्जी प्रमाण पर नियुक्त
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी समेत कई अन्य अधिकारी जैसे प्रभा भास्कर, अमित राज राठौर, धर्मराज पोर्ते, भीष्मराव भोसले, नितेश गुप्ता, टेकचंद रात्रे, सुरेन्द्र कश्यप, गुलाब सिंह राजपूत, बृजेश सिंह राजपूत और अन्य।
अन्य विभागों में भी फर्जीवाड़ा
श्रम विभाग: नरेंद्र सिंह राजपूत (सहायक ग्रेड-2)
जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग: सत्यप्रकाश राठौर
उद्यान विभाग: पूजा पहारे
पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग: सतीश नवरंग
विकास विस्तार अधिकारी: राजीव कुमार तिवारी
कलेक्टर ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए मिली नियुक्तियां न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि अन्य योग्य दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन भी है। उन्होंने विभाग प्रमुखों को शासन के निर्देशों के अनुसार त्वरित बर्खास्तगी की प्रक्रिया अपनाने के लिए कहा है।
कुछ ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका
जानकारी के अनुसार, कुछ फर्जी प्रमाणपत्रधारकों ने अब हाईकोर्ट की शरण ली है, जबकि कई ने मेडिकल जांच में भाग भी नहीं लिया।
पूरे मामले ने राज्यभर में मचाई हलचल
यह मामला उजागर होने के बाद राज्यभर में हड़कंप मच गया है और अन्य जिलों में भी अब ऐसी ही नियुक्तियों की जांच की मांग उठने लगी है।
जिले में सक्रिय किसी बड़े गिरोह के संदेह को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है, जो ऐसे नकली दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियों में घुसपैठ करा रहा है।
फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी: 27 कर्मचारी बर्खास्तगी की जद में
मुंगेली । छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का बड़ा मामला सामने आया है। 27 शासकीय कर्मचारी फर्जी श्रवण बाधित (बहरापन) सर्टिफिकेट के आधार पर शिक्षा, कृषि, उद्यानिकी, श्रम और योजना विभाग में पदस्थ पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद कलेक्टर ने संबंधित विभाग प्रमुखों को पत्र जारी कर बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं।
मेडिकल जांच में खुला फर्जीवाड़ा
कलेक्टर द्वारा संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक, सिम्स बिलासपुर और डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर को भेजी गई जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि ये प्रमाण पत्र फर्जी हैं। जांच में पता चला कि ये सभी कर्मचारी श्रवण बाधित (बहरापन) का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर वर्षों से शासन को धोखा दे रहे थे।
फर्जीवाड़े के तार गहरे, हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे आरोपीफर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद कुछ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। कलेक्टर ने अपने पत्र में इस बात का उल्लेख भी किया है कि कई कर्मचारी मेडिकल जांच में अनुपस्थित रहे, जिससे उनकी संलिप्तता पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।
शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा फर्जी नियुक्ति
इन 27 कर्मचारियों में से 11 कर्मचारी शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं। इनमें 10 व्याख्याता (लेक्चरर) और 1 सहायक शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा 10 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, उद्यानिकी, योजना एवं श्रम विभाग के कर्मचारी भी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे थे।
जातीय संयोग भी चौंकाने वाला
जांच में एक और हैरान कर देने वाली बात सामने आई है — 27 में से 9 कर्मचारी राजपूत वर्ग से हैं। एक ही जिले में, एक ही जाति के इतने लोगों का एक समान दिव्यांगता (श्रवण बाधित) दिखाना अपने आप में संदेहास्पद है और संगठित गिरोह की आशंका को मजबूत करता है।
विभाग प्रमुखों को भेजा गया पत्र
कलेक्टर ने जिन विभाग प्रमुखों को पत्र भेजा है उनमें मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत), जिला शिक्षा अधिकारी, उप संचालक (कृषि), सहायक संचालक, उद्यानिकी, श्रम पदाधिकारी और जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी शामिल हैं।
भविष्य में कठोर कार्रवाई तय
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन इस पूरे मामले को आपराधिक धोखाधड़ी की दृष्टि से भी जांच रहा है। यदि प्रमाणित हुआ कि फर्जीवाड़े में कोई दलाल या गिरोह शामिल है, तो एफआईआर और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।
यह मामला छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस पूरे प्रकरण में कितनी तेजी और कठोरता से कार्रवाई करती है।
नशे में चूर हेडमास्टर पहुंचा स्कूल, क्लासरूम में ताला लगाया और सो गया, तत्काल निलंबित
मुंगेली: जिले के शासकीय प्राथमिक शाला सिंघनपुरी में प्रधानपाठक नशा कर स्कूल में सो गया। मामले में बीईओ से शिकायत की गई। जांच में शराब पीने की पुष्टि होने से उसे निलंबित कर दिया गया है। सिंघनपुरी स्कूल में प्रधानपाठक सतनाम दास पात्रे नशा करने के बाद नौ जुलाई बुधवार को खुद को कक्षा में बंद कर लिया। जब दूसरे दिन सुबह शेष शिक्षक स्कूल पहुंचे तो उन्हें स्कूल का दरवाजा अंदर से बंद मिला।
नशा करके गहरी नींद में सोया हेडमास्टर
प्रधानपाठक नशे में दरवाजा बंद करके गहरी नींद मे सो गया। इसकी शिकायत मुंगेली की विकासखंड शिक्षा अधिकारी डॉक्टर प्रतिमा मंडलोई को दी गई। वे मौके पर पहुची और दरवाजा खुलवाईं। इसके बाद प्रधानपाठक की डॉक्टरी जांच के बाद शराब पीने की पुष्टि हुई। इस पर प्रधानपाठक तत्काल निलंबित कर दिया गया।
कलेक्टर-एसपी ने एटीआर के सुदूर वनांचल गांवों में पहुंचकर बाढ़ पूर्व तैयारियों का लिया जायजा
कलेक्टर-एसपी ने एटीआर के सुदूर वनांचल गांवों में पहुंचकर बाढ़ पूर्व तैयारियों का लिया जायजा
उप मुख्यमंत्री अरुण साव की पहल पर अधोसंरचना विकास कार्यों के लिए 1.23 करोड़ रुपए मंजूर
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