छत्तीसगढ़ / रायपुर
कोडार परियोजना वितरक नहर के कार्यों के लिए 21.11 करोड़ रूपए स्वीकृत
रायपुर, 25 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग के अंतर्गत महासमुंद जिले की कोडार परियोजना की बांयी तट मुख्य नहर के चिंगरौद वितरक नहर का सी.सी. लाईनिंग कार्य हेतु 21 करोड़ 11 लाख 92 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यांे के उपरांत रूपांकित सिंचाई क्षमता के विरूद्ध 767 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति के साथ ही 210 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सहित कुल 3619 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा होगी। योजना के अंतर्गत कार्यों को पूर्ण कराने के लिए मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को मिलेगी नई दिशा
स्क्रिप्ट समिति गठन हेतु महत्वपूर्ण बैठक, कला-संस्कृति और सिनेमा के समन्वय पर जोर
रायपुर, 25 मार्च 2026

संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन की अध्यक्षता में स्क्रिप्ट समिति के गठन हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक प्रदेश में फिल्म निर्माण की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को सिनेमा के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखी जा रही है।
संस्कृति विभाग के संचालक श्री विवेक आचार्य ने सिनेमा और संस्कृति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
बैठक में इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. राजन यादव, ललित कला अकादमी नई दिल्ली के फोटो अधिकारी श्री अभिमन्यु सिन्हा, प्रसार भारती आकाशवाणी रायपुर से पद्मश्री डॉ. राधेश्याम तारक तथा प्रसार भारती दूरदर्शन रायपुर के कार्यक्रम अधिकारी श्री पी.के. पाठक उपस्थित रहे। विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मुंबई से फिल्म अभिनेता श्री भगवान तिवारी ने भी अपनी भागीदारी निभाते हुए फिल्म निर्माण के व्यावहारिक पहलुओं और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। बैठक में सदस्य सचिव के रूप में उप संचालक श्री उमेश मिश्रा ने समन्वय की भूमिका निभाई।
बैठक के दौरान स्क्रिप्ट समिति के गठन की रूपरेखा, कार्यप्रणाली और चयन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। इस समिति का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोककथाओं, ऐतिहासिक प्रसंगों, जनजीवन और परंपराओं पर आधारित सशक्त और गुणवत्तापूर्ण पटकथाओं को प्रोत्साहित करना है, ताकि स्थानीय विषयवस्तु पर आधारित फिल्मों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अपार रचनात्मक संभावनाएं हैं, जिन्हें सिनेमा के माध्यम से सशक्त मंच प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्क्रिप्ट समिति का गठन स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करेगा और प्रदेश में फिल्म निर्माण के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। विशेषज्ञों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए सुझाव दिया कि स्थानीय कलाकारों, लेखकों और तकनीकी विशेषज्ञों को जोड़कर एक समग्र फिल्म पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाए। साथ ही, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और जनजीवन को फिल्म माध्यम में सशक्त रूप से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया।
इस बैठक से प्रदेश की कला, संस्कृति और सिनेमा को एक नई मिलेगी स्क्रिप्ट समिति के गठन से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और अधिक व्यापक रूप से स्थापित हो सकेगी।
क्रमांक-9761/दीपक
माता कौशल्या महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ : चंद्रखुरी धाम में श्रद्धा और संस्कृति की झलक
रायपुर, 25 मार्च 2026


ग्राम चंद्रखुरी (जिला रायपुर) स्थित पावन माता कौशल्या धाम में माता कौशल्या महोत्सव 2026 का भव्य और गरिमामय शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस महोत्सव के प्रथम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा। महोत्सव के पहले दिन दोपहर 3 बजे मानस मंडलियों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जहां तीन प्रमुख मंडलियों ने अपनी मधुर वाणी से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। सायं 6 बजे अतिथियों ने माता कौशल्या के दर्शन, पूजन एवं आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की तथा इसके पश्चात विभागीय प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए शासन की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण एवं राजगीत के साथ प्रारंभ हुआ, मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब तथा अध्यक्षता सुश्री मोना सेन ने की। संस्कृति विभाग के संचालक श्री विवेक आचार्य ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विभागीय गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, वहीं अतिथियों ने अपने संबोधन में माता कौशल्या की महिमा, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत तथा लोक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। रात्रि 8 बजे ‘रंग छत्तीसा’ कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीमती पूनम विराट तिवारी एवं छत्तीसगढ़ी लोक कला मंच द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और देर रात तक तालियों की गूंज बनी रही।
चंद्रखुरी स्थित माता कौशल्या धाम देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यह स्थान भगवान श्रीराम की माता कौशल्या का जन्मस्थान माना जाता है, जिसके कारण इसकी धार्मिक महत्ता अत्यंत बढ़ जाती है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक विशाल सरोवर के मध्य द्वीप के रूप में स्थित है, जहां तक सुंदर पुल के माध्यम से पहुंचा जाता है। जल से घिरा शांत वातावरण, भव्य मंदिर संरचना और आध्यात्मिक ऊर्जा इसे एक अनूठा तीर्थस्थल बनाते हैं, जो श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।
राज्य सरकार द्वारा माता कौशल्या धाम को राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर का समग्र विकास, भव्य सौंदर्यीकरण, आकर्षक लैंडस्केपिंग, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था तथा पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थल एवं पार्किंग की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही रायपुर से चंद्रखुरी तक सड़क मार्ग को सुगम एवं सुदृढ़ बनाया गया है, जिससे यहां पहुंचना आसान हो गया है। सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे इस प्रकार के भव्य कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर संभव हो पा रहा है। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे यह स्थल एक आदर्श धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है।
माता कौशल्या महोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और पहचान को सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण मंच भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से जहां एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूती मिलती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होता है। मुख्य अतिथि श्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
माता कौशल्या महोत्सव 2026 न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक बनकर उभरा है, बल्कि राज्य सरकार की सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यटन विकास के प्रति प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जिससे चंद्रखुरी धाम आज छत्तीसगढ़ की नई पहचान के रूप में स्थापित हो रहा है।
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने एक नई वेबसाइट वन क्लिक सिंगल विंडो सिंगल-पोर्टल किया लॉंच
यह प्रणाली 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को जोड़ती है
रायपुर, 24 मार्च 2026
वन क्लिक सिंगल विंडो (OneClick) एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल है, जो निवेशकों को छत्तीसगढ़ में व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक सभी अनुमतियां, मंजूरी, भूमि आवंटन और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा एक ही जगह प्रदान करता है। यह प्रणाली 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को जोड़ती है, जिससे समय की बचत होती है, पारदर्शिता बढ़ती है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलता है।
उद्योग विभाग से पाप्त जानकारी के अनुसार वन क्लिक सिंगल विंडोका मूल विचार सरल है विभाग के साथ काम करने वाले सभी लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना। चाहे आप एक स्थापित व्यवसाय हों, संभावित निवेशक हों, स्टार्टअप हों या निर्यातक हों, अब आपको सब कुछ एक ही स्थान पर मिलेगा। अनुमोदन के लिए वन क्लिक सिंगल विंडो से लेकर सब्सिडी कैलकुलेटर के साथ प्रोत्साहन का अनुमान लगाने तक, प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और कुशल है।
छत्तीसगढ़ के व्यापार को आसान बनाएं के व्यापक वादे के तहत, वनक्लिक राज्य का नया सिंगल-विंडो पोर्टल है जो व्यापारिक वातावरण में गति, सरलता और पारदर्शिता लाता है। अनुमोदन और मंजूरी से लेकर बिल भुगतान, भूमि आवंटन और अनुपालन तक - एक उद्यमी या निवेशक को जो कुछ भी चाहिए, वह अब सिर्फ एक क्लिक दूर है।
वनक्लिक नाम सहज, यादगार है और पोर्टल के मूल कार्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सुगमता और दक्षता प्रदान करना। टैगलाइन - सीजी इसे आसान बनाता है - शासन को एक सहज अनुभव में बदलने के लिए छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहां उद्यमी कागजी कार्रवाई में कम समय और महत्वपूर्ण कार्यों के निर्माण में अधिक समय व्यतीत करते हैं।
खल्लारी रोप-वे दुर्घटना: मुख्यमंत्री ने सहायता राशि की घोषणा की, दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई
रायपुर, 24 मार्च 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महासमुंद जिले के खल्लारी माता मंदिर में हाल ही में हुई रोप-वे दुर्घटना में प्रभावित परिवारों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है। उन्होंने दिवंगत श्रद्धालु के परिजन को 5 लाख रुपए एवं घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है, ताकि इस कठिन समय में उन्हें संबल मिल सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
बाल संरक्षण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित
हर बच्चा अपना है, यही सोच बदलेगी भविष्य की दिशा – मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े
रायपुर, 24 मार्च 2026

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और संवेदनशील मुद्दों पर राज्यस्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि बच्चों को ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सही दिशा और संवेदनशील वातावरण देना आवश्यक है। जब तक हम दूसरों के बच्चों को अपने बच्चों की तरह नहीं देखेंगे, तब तक समग्र विकास संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वय से बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चे राष्ट्र की नींव हैं और उनकी सुरक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवेदनशीलता का विषय है। उन्होंने कहा कि केवल चिंतन नहीं, बल्कि ठोस मंथन और कार्ययोजना की जरूरत है। अपने जिलों के दौरे का उल्लेख करते हुए उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और बाल गृहों में पारिवारिक वातावरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की प्रतिनिधि सुश्री शाइस्ता शाह ने स्कूल सुरक्षा और पॉक्सो ट्रैकिंग पोर्टल की जानकारी दी, वहीं रायपुर कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने लॉ एंड ऑर्डर विभाग की संवेदनशील भूमिका और बाल तस्करी रोकथाम पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। किशोर न्याय अधिनियम 2015, मादक द्रव्यों के उन्मूलन, नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना और आफ्टर केयर व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला में सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, SJPU, पुलिस एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करना रहा।
डिजिटल सेवा केंद्र से बदली रानी कुर्रे की जिंदगी, बनीं आत्मनिर्भर
रायपुर, 24 मार्च 2026
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरीं रानी कुर्रे ने अपने प्रयासों और डिजिटल तकनीक के उपयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। कोरिया जिले के शिखा महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य रानी, ग्राम रनई की निवासी हैं और ज्योति क्लस्टर, पटना से जुड़ी हुई हैं।
आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जीवनयापन कर रही रानी ने बिहान योजना के तहत अपने समूह से 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त कर वर्ष 2024-25 में कस्टमर सर्विस सेंटर।की शुरुआत की। इस केंद्र के माध्यम से वे आधार, पैन कार्ड, बिल भुगतान और विभिन्न सरकारी सेवाएं ग्रामीणों तक पहुंचा रही हैं।
शुरुआत में डिजिटल सेवाओं के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनका विश्वास जीतना आसान नहीं था, लेकिन रानी ने धैर्य और निरंतर प्रयासों से धीरे-धीरे अपनी पहचान बना ली। आज उनका केंद्र गांव के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र बन चुका है।
रानी की मेहनत का परिणाम है कि आज वे सालाना लगभग 1 लाख 50 हजार रुपए की आय अर्जित कर रही हैं, जबकि उनकी मासिक आय 14 हजार से 14 हजार 500 रुपए तक पहुंच गई है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
रानी कुर्रे न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि उन्होंने अपने गांव में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाकर अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया है। समाज में उन्हें सम्मान और पहचान भी मिली है।
डेयरी योजना बदल रही है धनमती की तकदीर
रायपुर, 24 मार्च 2026

गरियाबंद जिले देवभोग विकासखंड के ग्राम कुम्हड़ाईखुर्द में पशुधन विभाग द्वारा संचालित डेयरी विकास योजनाओं का लाभ अब ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से दिखाई देने लगा है। देवभोग विकासखंड के ग्राम कुम्हड़ाईखुर्द की लाभार्थी धनमती बिसी ने डेयरी योजना के माध्यम से आत्मनिर्भरता की पहल पर उल्लेखनीय कदम बढ़ाया है। उन्हें पशुपालन विभाग योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिस पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। यह सहायता उनके लिए आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार साबित हो रही है।
धनमती बिसी अपने पति महेश बिसी के साथ मिलकर डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने बताया कि योजना का लाभ मिलने से उन्होंने अपने डेयरी यूनिट का और विस्तार किया है। जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है और परिवार की आय में भी स्थायी बढ़ोत्तरी हुई है। पशुधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाना है। धनमती का कहना है कि अब वे न केवल परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी कर पा रही हैं, बल्कि आगे चलकर और अधिक पशु पालन कर अपने कारोबार को और बड़ा करने की योजना भी बना रही हैं। उनके इस प्रयास को देखकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत 25 मार्च को राशि वितरण कार्यक्रम
जिला मुख्यालय में मंत्री दयालदास बघेल होंगे मुख्य अतिथि
रायपुर, 24 मार्च 2026
दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को राशि वितरण के लिए बेमेतरा जिला प्रशासन द्वारा 25 मार्च को कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 25 मार्च को प्रातः 11 बजे से संबंधित जनपद पंचायतों के सभा कक्ष में आयोजित किया जाएगा।
जारी आदेश के अनुसार कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को अपने-अपने क्षेत्र में नोडल अधिकारी तथा तहसील स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधिकारियों को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयालदास बघेल होंगे, जबकि विशेष अतिथि के रूप में बेमेतरा विधायक श्री दीपेश साहू और साजा विधायक श्री ईश्वर साहू उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कल्पना योगेश तिवारी, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमा दिवाकर, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्री विजय सिन्हा तथा भाजपा जिलाध्यक्ष श्री अजय साहू सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में यह कार्यक्रम संपन्न होगा
जारी आदेश के अनुसार, कार्यक्रम के सफल संचालन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए जिले के सभी अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) को अपने-अपने क्षेत्र में नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं तहसील स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत एवं संबंधित नगरीय निकाय के अधिकारियों को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे आपसी समन्वय स्थापित करते हुए कार्यक्रम का सफल आयोजन सुनिश्चित करें। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उक्त निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। जिला प्रशासन के इस निर्णय से भूमिहीन कृषि मजदूरों को योजना का लाभ समय पर उपलब्ध कराया जाएगा और उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।
ड्रेगन फ्रूट की उन्नत खेती से श्रीमती उमा शुक्ला एवं श्री प्रकाश नारायण शुक्ला दंपत्ति को प्रति एकड़ 1.25 लाख रुपए की आमदनी
रायपुर, 24 मार्च 2026
महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखण्ड के ग्राम कुल्हरिया की कृषक श्रीमती उमा शुक्ला को राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत फल क्षेत्र विस्तार योजना से जुड़कर खेती के क्षेत्र में अच्छी सफलता मिली। श्रीमती शुक्ला बताती है कि पूर्व में वे अपनी 1.62 हेक्टेयर भूमि पर पारंपरिक रूप से धान की खेती करती थीं, जिसमें औसतन 15 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन होता था और आय सीमित रहती थी। सिंचित रकबा 1.00 हेक्टेयर तथा असिंचित 0.60 हेक्टेयर होने के बावजूद पारंपरिक खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था।
उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में शुक्ला दम्पति ने अपनी भूमि पर ड्रेगन फ्रूट की उन्नत खेती प्रारंभ की। उन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनाया, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। श्रीमती शुक्ला बताती है कि ड्रेगन फ्रूट की खेती शुरू करने के बाद पहले ही वर्ष में उन्हें लगभग 40 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसे महासमुंद एवं बागबाहरा मंडी में लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय किया। इससे उन्हें लगभग 1,25,000 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। वही पहले धान की खेती में प्रति एकड़ कुल आय सीमित थी और लागत निकालने के बाद लाभ बहुत कम रह जाता था। ड्रेगन फ्रूट की खेती में प्रारंभिक लागत अधिक होने के बावजूद बेहतर बाजार मूल्य और उत्पादन के कारण कुल लाभ में वृद्धि हुई है। श्रीमती उमा शुक्ला की इस सफलता ने आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया है। उनके प्रयासों को देखकर अन्य कृषक भी पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न
रायपुर, 24 मार्च 2026

मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की गतिविधियों, वित्तीय वर्ष 2025-26 की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, वित्तीय वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान, स्वच्छता के लिए नवाचार तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) हेतु अंतर्विभागीय अभिसरण पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों को अपशिष्ट प्रबंधन अधोसंरचना के तहत गांवों में कम्पोस्ट पिट, सोखता गडड्ा और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्रामों की स्वच्छता के कार्यों की सर्टिफिकेशन ग्राम सभा द्वारा कराया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने भारत स्वच्छ मिशन के अंतर्गत राज्य के सभी ग्रामों में स्वच्छता के कार्यों को नियमित रूप से मॉनिटरिंग कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए है। गांवों के हाट-बाजारों में सामूहिक शौचालय का उपयोग एवं स्वच्छता के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसी तरह से आवश्यकतानुसार सामूहिक शौचालय की उपयोगिता एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्थलों पर करीब 14 हजार 279 सामुदायिक शौचालयोें का निर्माण किया जा चुका है। इसी तरह से वर्ष 2026-27 में 2014 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक कार्ययोजना के निर्माण के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
मुख्य सचिव ने इस हेतु देश के अन्य राज्यों के सफल प्लास्टिक वेस्ट मैंनेजमेंट के मॉडल को अपनाने की बात कही। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक वेस्ट से सशक्त सड़कों के निर्माण करने की अभिनव एवं सतत् पहल की जा रही है। राज्य के बस्तर, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्लास्टिक मिक्स डामर रोड निर्माण किए जा रहे हैं। रोड निर्माण में करीब 3000 किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता, जल प्रबंधन एवं प्रशासनिक व्यवस्था की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन करने हेतु स्वच्छ पंचायत पोर्टल की शुरूआत की गई है। ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा ग्राम की स्वच्छता, जल आपूर्ति एवं प्रशासन की ऑनलाइन प्रविष्टि की जा रही है। सभी ग्रामों की ब्लॉक स्तर, जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर रैंकिंग की जाएगी। इसके लिए सभी ग्रामों की ऑनलाईन एंट्री का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मिशन संचालक राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) श्री अश्वनी देवांगन सहित स्कूल शिक्षा, वित्त, जनसम्पर्क, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, यूनिसेफ के अधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़ के लिए मील का पत्थर
राज्य के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा- उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 गेम-चेंजर, खेलों में करियर बनाने का बड़ा मंच ओलंपियन
करीब 3,800 प्रतिभागी लेंगे हिस्सा; छत्तीसगढ़ सहित चार राज्यों के 100 से अधिक खिलाड़ी
प्रतियोगिताएं रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित होंगी
कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर
रायपुर, 24 मार्च 2026

बुधवार 25 मार्च से शुरू हो रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह तैयार है और राज्य के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव का मानना है कि यह “राज्य के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बड़ा बढ़ावा देगा।” खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री साव ने मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स भारतीय खेल इतिहास में एक “मील का पत्थर” साबित होगा।
श्री साव ने बताया कि, “हमने पहले सरगुजा ओलंपिक और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन छोटे स्तर पर किए हैं। अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी कर हम एक बड़े मंच पर कदम रख रहे हैं, जो हमारी क्षमताओं की परीक्षा भी लेगा और उन्हें नई ऊंचाई देगा।”उन्होंने कहा, “यह छत्तीसगढ़ के लिए निस्संदेह एक ऐतिहासिक और यादगार आयोजन है। यह हमारे खेल प्रतिभा और बुनियादी ढांचे को बड़ी मजबूती देगा। साथ ही, यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के आयोजन का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्रदान करेगा।”
श्री साव ने बताया कि, “राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के साथ खेलने और उन्हें देखने का अनुभव छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए बेहद समृद्ध करने वाला होगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह आयोजन राज्य के खेल तंत्र और खिलाड़ियों दोनों के लिए बड़ी ताकत साबित होगा।”
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा लेंगे और कुल नौ खेलों का आयोजन होगा। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में पदक दिए जाएंगे, जबकि मल्लखंब और कबड्डी प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल होंगे।
करीब 3,800 प्रतिभागी इन खेलों में हिस्सा लेंगे, जो 3 अप्रैल तक चलेंगे। प्रतियोगिताएं रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित की जाएंगी। कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। एथलेटिक्स में सर्वाधिक 34 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे। तैराकी (24), कुश्ती (18), वेटलिफ्टिंग (16) और तीरंदाजी (10) में भी दो अंकों में स्वर्ण पदक होंगे। हॉकी और फुटबॉल टीम खेल हैं, जिनका आयोजन रायपुर में होगा। एथलेटिक्स जगदलपुर में और कुश्ती सरगुजा में आयोजित की जाएगी।
भारत के शीर्ष खिलाड़ी, हॉकी ओलंपियन दिलीप तिर्की, सलीमा टेटे और शीर्ष धावक अनिमेष कुजूर ने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स खेलों में करियर बनाने और आदिवासी समुदाय से निकले दिग्गज खिलाड़ियों से प्रेरणा लेने का एक शानदार मंच है।”
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व ओलंपियन दिलीप तिर्की ने साई मीडिया से कहा, “मेरे लिए और हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि देश में पहली बार इस तरह की चौंपियनशिप शुरू हो रही है। यह युवाओं और आदिवासी खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और खेलों में आगे बढ़ने, तथा देश के लिए खेलने का एक बेहतरीन अवसर है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विज़न है कि भारत एक खेल राष्ट्र बने। वे चाहते हैं कि हर युवा किसी न किसी खेल से जुड़ा रहे।”
मेजबान राज्य छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और असम से 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। पुरुष और महिला खिलाड़ियों का अनुपात लगभग 50-50 रहेगा, जो ओलंपिक चार्टर में लैंगिक समानता के सिद्धांत के अनुरूप है।
दिलीप तिर्की ने बताया कि, “केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी चाहते हैं कि खेलों के माध्यम से हमारे खिलाड़ी, खासकर आदिवासी खिलाड़ी, बेहतर करियर बना सकें, अपने जीवन को सुधार सकें और देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। मैं स्वयं एक आदिवासी परिवार से आता हूं और खेलों, विशेषकर हॉकी के माध्यम से आज यहां तक पहुंचा हूं। मुझे विश्वास है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी आदिवासी बच्चों का भविष्य उज्ज्वल है। पहले भी कई आदिवासी खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया है और वे हमारे समाज के प्रेरणास्रोत बने हैं।”
राष्ट्रीय 100 मीटर और 200 मीटर रिकॉर्ड धावक और भारत के उभरते एथलेटिक्स स्टार अनिमेष कुजूर ने साई मीडिया से कहा, “भारत में अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां खेल पूरी तरह नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन और भी खास बन जाता है। मैं सरकार के इस प्रयास की सराहना करता हूं, जिसने देशभर के आदिवासी युवाओं को एक मंच पर लाने का काम किया है।”
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस उद्घाटन संस्करण में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा आयोजित ट्रायल्स के माध्यम से किया गया है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भारतीय खेल प्राधिकरण (सांई) द्वारा नियुक्त कोच नजर रखेंगे। श्री तिर्की ने कहा, “हमारे सभी आदिवासी खिलाड़ी और बच्चे खेलों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाएं, देश के लिए खेलें और अपना करियर बनाएं। प्रधानमंत्री का 2036 ओलंपिक और विकसित भारत का विज़न है कि हमारा देश एक युवा और खेल राष्ट्र बने। मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन हमारा देश एक सशक्त खेल राष्ट्र के रूप में उभरेगा।”
कबीरधाम में ‘दीदियों’ ने संभाली स्टीयरिंग, उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा बने पैसेंजर
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने 10 समूहों को सौंपी मैजिक वाहन की चाबी, परिवहन व्यवसाय में महिलाओं की एंट्री
महिला समूहों के रोजगार की दिशा में कबीरधाम जिले में नवाचारी पहल
रायपुर, 24 मार्च 2026


कबीरधाम जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अभिनव और प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां अब तक पुरुष प्रधान माने जाने वाले परिवहन व्यवसाय में महिलाओं की भागीदारी का नया अध्याय शुरू हुआ है। इस अवसर पर स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने जब स्टीयरिंग संभाली तो उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी उनके पैसेंजर बन गए। पहले परिवहन व्यवसाय केवल पुरूष प्रधान कार्य माना जाता था, जिस मिथक को तोड़ अब समूह की महिलाएं स्टेयरिग थामकर आजीविका का सशक्त साधन तैयार करने के साथ ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी नई गति देने जा रही हैं।
सरस मेले के शुभारंभ के अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जिले की 10 महिला समूहों को 'आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस' योजना के तहत सीएलएफ मैजिक वाहन वितरित किए। इस दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि इन वाहनों का वितरण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रत्येक वाहन की लागत लगभग 7.50 लाख रुपये है, जिसमें से 5 लाख रुपये केंद्र सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिए गए हैं। शेष राशि का प्रबंधन संबंधित समूहों द्वारा किया गया है, जिससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
उन्होंने कहा कि अब स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने क्षेत्रों में यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराकर आय का स्रोत विकसित करेंगी। विशेष रूप से दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में यह पहल आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी, जहां अब तक परिवहन की कमी एक बड़ी समस्या रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यह पहल केवल शुरुआत है। यदि महिलाएं इस अवसर का पूरी लगन और समर्पण से उपयोग करें, तो वे “लखपति दीदी” बनने के लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकती हैं। यह योजना महिलाओं की आय में वृद्धि के साथ-साथ उन्हें आत्मसम्मान और समाज में नई पहचान दिलाने का माध्यम बनेगी।
वाहन संचालन के लिए महिलाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग दी गई है। यह वाहन 10 अलग अलग संकुल के महिला समूहों 10 विभिन्न ग्रामीण रूट पर संचालन हेतु प्रदान किया गया है। इस पहल के तहत महिला समूह की सदस्य अब टाटा मैजिक वाहन संचालित कर परिवहन व्यवसाय से जुड़ेंगी। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर उनकी भूमिका को भी सशक्त करेगा। योजना के तहत ये महिलाएं जिले के वनांचल एवं मैदानी क्षेत्रों में, जहां आवागमन के साधन सीमित हैं, वहां यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य करेंगी। इससे न केवल दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में परिवहन सुविधा सुलभ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने एक नई वेबसाइट वन क्लिक सिंगल विंडो सिंगल-पोर्टल किया लॉंच
यह प्रणाली 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को जोड़ती है
रायपुर, 24 मार्च 2026
वन क्लिक सिंगल विंडो (OneClick) एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल है, जो निवेशकों को छत्तीसगढ़ में व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक सभी अनुमतियां, मंजूरी, भूमि आवंटन और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा एक ही जगह प्रदान करता है। यह प्रणाली 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को जोड़ती है, जिससे समय की बचत होती है, पारदर्शिता बढ़ती है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलता है।
उद्योग विभाग से पाप्त जानकारी के अनुसार वन क्लिक सिंगल विंडोका मूल विचार सरल है विभाग के साथ काम करने वाले सभी लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना। चाहे आप एक स्थापित व्यवसाय हों, संभावित निवेशक हों, स्टार्टअप हों या निर्यातक हों, अब आपको सब कुछ एक ही स्थान पर मिलेगा। अनुमोदन के लिए वन क्लिक सिंगल विंडो से लेकर सब्सिडी कैलकुलेटर के साथ प्रोत्साहन का अनुमान लगाने तक, प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और कुशल है।
छत्तीसगढ़ के व्यापार को आसान बनाएं के व्यापक वादे के तहत, वनक्लिक राज्य का नया सिंगल-विंडो पोर्टल है जो व्यापारिक वातावरण में गति, सरलता और पारदर्शिता लाता है। अनुमोदन और मंजूरी से लेकर बिल भुगतान, भूमि आवंटन और अनुपालन तक - एक उद्यमी या निवेशक को जो कुछ भी चाहिए, वह अब सिर्फ एक क्लिक दूर है।
वनक्लिक नाम सहज, यादगार है और पोर्टल के मूल कार्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सुगमता और दक्षता प्रदान करना। टैगलाइन - सीजी इसे आसान बनाता है - शासन को एक सहज अनुभव में बदलने के लिए छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहां उद्यमी कागजी कार्रवाई में कम समय और महत्वपूर्ण कार्यों के निर्माण में अधिक समय व्यतीत करते हैं।
तालाब के ऊपर मुर्गी पालन कर खेती को और अधिक लाभकारी बनाया
अपनी मेहनत और नवाचार से खेती को नई पहचान दे रहा - युवा किसान अंकित
बहुफसली लेकर बने उन्नत किसान अंकित लकड़ा
रायपुर, 24 मार्च 2026


खेत को आय का बहुआयामी और मजबूत माध्यम बनाने के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों, संबद्ध व्यवसायों और विविधीकरण को अपनाना अनिवार्य है। मुर्गी पालन और मछली पालन को एक साथ अपनाना, जिसे एकीकृत मछली-सह-मुर्गी पालन कहा जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी और आत्मनिर्भरता का एक बेहतरीन जरिया है। यह प्रणाली कम लागत में दोहरा मुनाफा प्रदान करती है। छत्तीसगढ के जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा अपनी मेहनत और नवाचार से खेती को नई पहचान दे रहे हैं। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उन्होंने अपने खेत को बहुआयामी आय का मजबूत माध्यम बना दिया है। आइए जानते हैं उनकी प्रेरणादायक कहानी।

ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित ने बताया कि पहले वे बरसात में सिर्फ धान की खेती करते थे। इसे पश्चात् उन्होंने मत्स्य विभाग से जानकारी प्राप्त कर अपने खेत में तालाब बनाए। अब वे गर्मी में भी खेती करने लगे और आम के पेड़ लागाए उसी तालाब के पानी से गर्मी में पेड़ों को पानी देते हैं। तालाब के पानी का उपयोग करके बागवानी भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2 तालाब के उपर शेड बनाकर मुर्गी पालन और मछली पालन करते हैं। मुर्गियों का अपशष्टि मछलियों के लिए आहार का कार्य करता है। शेड का कैपेसिटी 1000 से 1200 है। तालाब के मेड में आम का पेड़ लगाए हैं। आम का पेड़ या अन्य पेड़ मिट्टी को एकजुट रखता है मिट्टी को काटने नहीं देता। इसके साथ ही आम का पेड़, लीची का पेड़ अतिरिक्त आय का माध्यम बन जाता है। युवा किसान ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य योजना अंतर्गत पॉन्ड लाइनर प्राप्त हुआ है। मछली विभाग से 8 लाख रूपए की राशि अनुदान में मिला इसके साथ पॉलीथिन, बोर, मोटर और फीड प्राप्त हुआ है।
इस मॉडल को अपनाने वाले किसानों का कहना है कि यह न सिर्फ आमदनी बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। मछली पालन करने वाले नंदकिशोर पटेल बताते हैं कि पहले वे केवल तालाब में मछली पालन करते थे, लेकिन अब उन्होंने इस मॉडल से मुर्गी पालन भी शुरू किया है। उनका कहना है कि “शुरुआत में थोड़ा इनवेस्टमेंट जरूर लगता है, लेकिन जब सिस्टम चलने लगता है, तो मेहनत का फल बहुत अच्छा मिलता है। एक बार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाए, फिर हर महीने स्थिर इनकम होने लगती है।
अंकित लकड़ा की यह पहला बताती है की नई सोच और योजनाओं के सही उपयोग से खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है ऐसे ही नवाचार और सफल किसानों से मिलने के लिए कृषि क्रांति एक्सप्रेस 2.0 में जरूर आए।
आयुर्वेद बना संजीवनी, मधुमेह, बीपी, सर्वाइकल, माइग्रेन से लेकर मोटापा तक में मिला राहत का नया रास्ता
रायगढ़ के आयुष अस्पताल में निःशुल्क उपचार से मरीजों ने पाई नई जिंदगी, छह सफल उदाहरण बने प्रेरणा
रायपुर, 24 मार्च 2026

बदलते दौर में लोग मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (बीपी), सर्वाइकल पेन, स्पोंडिलाइटिस, माइग्रेन, एलर्जी, मोटापा, एनीमिया, बाल झड़ना, तनाव और पाचन संबंधी समस्याओं जैसी अनेक बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद एक बार फिर भरोसे का मजबूत आधार बनकर उभर रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के आयुष विभाग द्वारा रायगढ़ जिले के आयुष अस्पतालों में जटिल से जटिल रोगों का निःशुल्क और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे कई मरीजों का जीवन फिर से सामान्य और खुशहाल हो रहा है।
इस सफलता के पीछे आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी लोईग में पदस्थ डॉ. माकेश्वरी संभाकर जोशी प्रभारी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, आयुष केंद्र लोईग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन और सतत देखरेख में इन मरीजों का उपचार किया गया, जहां औषधियों के साथ-साथ आहार-विहार और दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया गया। जानकारी के अभाव में जहां कई लोग महंगे इलाज में समय और पैसा गंवा देते हैं, वहीं जागरूक मरीज आयुर्वेद के इस निःशुल्क उपचार का लाभ लेकर बेहतर स्वास्थ्य की ओर लौट रहे हैं। ऐसे ही छह मरीजों की कहानियां आज उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई हैं।
इस संबंध में प्रभारी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी लोईग के डॉ. माकेश्वरी संभाकर जोशी ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि जीवनशैली को संतुलित करने की एक संपूर्ण पद्धति है। यदि मरीज नियमित रूप से आहार-विहार और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करें, तो जटिल से जटिल रोगों में भी सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध है, जिसका अधिक से अधिक लोगों को लाभ लेना चाहिए।
जानिए कैसे किन–किन रोगों का हुआ आयुर्वेद से सफल उपचार, जो आज अपने खुशहाल जीवन में लौट आए है
ग्राम लोईग की 78 वर्षीय लुवा सारथी पिछले दो वर्षों से मधुमेह और उच्च रक्तचाप से परेशान थीं। हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें चलने-फिरने में भी कठिनाई होने लगी थी। आयुर्वेदिक उपचार और नियमित दिनचर्या के पालन से जहां उनका शुगर स्तर 390 से घटकर 170-180 तक पहुंच गया, वहीं बीपी भी 170-180 से घटकर 130/70 तक नियंत्रित हो गया। विशेष बात यह रही कि उन्होंने दो महीने पहले से एलोपैथी दवाओं का उपयोग भी बंद कर दिया है।
इसी तरह गौवर्धनपुर के 38 वर्षीय गनपत उरांव सर्वाइकल पेन, स्पोंडिलाइटिस और मधुमेह से पीड़ित थे। लंबे समय तक एलोपैथी उपचार के बावजूद राहत नहीं मिली और सर्जरी की सलाह दी गई थी। लेकिन आयुर्वेदिक उपचार, पंचकर्म और संतुलित दिनचर्या अपनाने से उन्हें 70 प्रतिशत तक सुधार हुआ। अब वे बिना सर्जरी के सामान्य जीवन जी पा रहे हैं।
ग्राम रेगड़ा के 30 वर्षीय यासिम हुसैन का वजन काफी कम था, जिससे वे शारीरिक कमजोरी से जूझ रहे थे। आयुर्वेदिक औषधियों और सही आहार-विहार के पालन से मात्र दो माह में उनका वजन 49 किलो से बढ़कर 60 किलो हो गया।
रायगढ़ के बंटी मेहर, जो सिरदर्द और कमजोरी से परेशान थे, ने भी आयुर्वेदिक उपचार से दो महीने में 8 किलो वजन बढ़ाया और स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार पाया।
ममता जोशी (43 वर्ष) के मामले में आयुर्वेद ने और भी व्यापक प्रभाव दिखाया। बाल झड़ना, एसिडिटी, एनीमिया और मोटापे जैसी समस्याओं से जूझ रही ममता का वजन 90 किलो से घटकर 76 किलो हो गया। साथ ही बाल झड़ना बंद हुआ, हीमोग्लोबिन स्तर 13 ग्राम तक पहुंचा और लंबे समय से अनियमित मासिक धर्म भी फिर से नियमित हो गया।
वहीं 37 वर्षीय बी. डड़सेना, जो पिछले 8-9 वर्षों से एलर्जी, क्रॉनिक सर्दी, माइग्रेन और तनाव से पीड़ित थे, उन्हें भी आयुर्वेदिक उपचार से लगभग 70 प्रतिशत तक राहत मिली।
इन सभी उदाहरणों से हम यह कह सकते है कि आयुर्वेद न केवल रोगों का उपचार करता है, बल्कि जीवनशैली में सुधार लाकर व्यक्ति को संपूर्ण रूप से स्वस्थ बनाने का कार्य करता है। रायगढ़ के आयुष अस्पताल में उपलब्ध यह निःशुल्क उपचार उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो बिना अधिक खर्च के बेहतर स्वास्थ्य की तलाश में हैं।
तेंदुए की खाल की तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 9 आरोपी गिरफ्तार
रायपुर, 24 मार्च 2026
वन्यजीव संरक्षण को लेकर राज्य में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में 19 मार्च 2026 को केशकाल वनमंडल और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तेंदुए की खाल की तस्करी में शामिल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
वन्य जीव संरक्षण का अर्थ जंगली जानवरों, पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा करना है, ताकि जैव विविधता बनी रहे और पारिस्थितिक संतुलन न बिगड़े। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अवैध शिकार, व्यापार और आवास विनाश को रोकना और वन्य प्रजातियों की रक्षा करना अनिवार्य है। यह पारिस्थितिक तंत्र के लचीलेपन और भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण है।
यह कार्रवाई मुखबिर की सूचना के आधार पर की गई। वन विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया, जिसमें एक कर्मचारी ने खरीदार बनकर तस्करों से संपर्क किया। जैसे ही आरोपी मोटरसाइकिल और एक वाहन में तेंदुए की खाल लेकर रसगांव-बड़ेडोंगर मार्ग स्थित ग्राम बैलगांव पहुंचे, टीम ने उन्हें घेरकर पकड़ लिया। मौके से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि तेंदुए का शिकार लगभग 7 महीने पहले अवैध हथियार (भरमार बंदूक) से किया गया था। आरोपियों की निशानदेही पर मुख्य आरोपी को अगले दिन नारायणपुर जिले के ग्राम बोरावण्ड से गिरफ्तार किया गया तथा शिकार में प्रयुक्त बंदूक भी जब्त की गई। बरामद तेंदुए की खाल की लंबाई 195 सेंटीमीटर और चौड़ाई 45 सेंटीमीटर पाई गई।
वनमंडलाधिकारी दिव्या गौतम के निर्देशन में आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिलों के निवासी हैं। इस अभियान में राज्य स्तरीय टीम के अधिकारियों एवं वन विभाग के कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार और अवैध व्यापार को रोकने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य शासन की वन एवं वन्यजीव संरक्षण संबंधी योजनाओं के तहत जैव विविधता संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।