छत्तीसगढ़ / रायपुर
राज्यपाल श्री डेका ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन
रायपुर, 05 नवम्बर 2026
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज लोकभवन में असम राज्य सहित देश-विदेश में सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना, विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे एवं लोकभवन के अधिकारियों. कर्मचारियों ने श्री हजारिका के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
डीएमएफ की कार्ययोजना में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना को दें प्राथमिकता - राज्यपाल श्री डेका
’खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के दिए निर्देश, बस्तर में विकास कार्यों पर विशेष जोर’
रायपुर, 05 नवंबर 2026

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और वहां के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के साथ पर्यावरणविदों का भी सहयोग लिया जाए।
राज्यपाल श्री डेका आज लोक भवन में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डीएमएफ की राशि के प्रभावी और सुनियोजित उपयोग के लिए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमएफ से आवश्यक कार्य किए जाएं। साथ ही उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अभियान के रूप में संचालित करने पर उन्होंने जोर दिया।
’वैज्ञानिक तरीके से हो रेत का उत्खनन’
राज्यपाल ने नदियों से रेत उत्खनन के संबंध में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेत रहेगी तो पानी रहेगा और पानी रहेगा तो रेत रहेगी। रेत खदानों में वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन को लेकर विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।
’जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करें डीएमएफ की कार्ययोजना’
राज्यपाल ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे आम जनता से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं को समझें। इसके अनुरूप डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार की जाए। विकास कार्यों के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लेना आवश्यक है। प्रशासन को जनता के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन से कार्य किए जा सकते हैं तथा किन कार्यों को करना संभव नहीं है। उन्होंने डीएमएफ की नियमित बैठकें आयोजित करने को कहा, ताकि कार्यों की प्रगति की समीक्षा और आवश्यक निर्णय समय पर लिए जा सकें।
’खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं’
राज्यपाल ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण और विकास से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विशेष उद्देश्यों के लिए डीएमएफ के अंतर्गत कार्य निर्धारित किए जाते हैं, उन कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से विकास कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौट आए हैं, उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उनके पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि वे विकास की प्रक्रिया से जुड़ सकें।
’विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर दें ध्यान’
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन जनजातीय समुदायों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा स्वास्थ्य एवं जीवनशैली में सुधार के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
राज्यपाल ने कहा कि मनरेगा की तर्ज पर डीएमएफ के कार्यों में भी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के भौतिक सत्यापन पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन हुआ है और उनसे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल रहा है।
’विस्थापित परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश’
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए लोगों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से विस्थापित परिवारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि प्रभावित और विस्थापित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए उनके लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने राज्यपाल को डीएमएफ की गतिविधियों और कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएमएफ पोर्टल 2.0 के माध्यम से प्रत्येक परियोजना और कार्य की जानकारी उपलब्ध है। पोर्टल के जरिए कार्यों की स्थिति और प्रगति की निगरानी भी की जा रही है।
बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, खनिज विभाग के अधिकारी तथा खनन प्रभावित विभिन्न जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।
सरस्वती शिशु मंदिर बागबाहरा में स्मृति भवन एवं शिशु वाटिका का भूमि पूजन
वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने स्मृति भवन निर्माण के लिए 5 लाख रुपये देने की घोषणा की
पूर्व छात्रों ने अब तक दिया 32 लाख रुपये का सहयोग; अतिरिक्त कक्ष के लिए सांसद निधि से मिले 10 लाख रुपये
विद्यार्थियों से जीवन की चुनौतियों और उनके समाधान पर साझा किए विचार
रायपुर, नवंबर 2026


महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्मृति भवन एवं शिशु वाटिका का भूमि पूजन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने स्मृति भवन निर्माण के लिए अपनी ओर से 5 लाख रुपये देने की घोषणा की।

विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने सांसद निधि से 10 लाख रुपये का सहयोग दिया है। इस कक्ष का भूमि पूजन भी श्री चौधरी ने किया। स्मृति भवन निर्माण के लिए पूर्व छात्र अब तक 32 लाख रुपये का सहयोग दे चुके हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री चौधरी ने विद्यार्थियों और युवाओं से जीवन में स्पष्ट लक्ष्य तय कर उसके लिए दृढ़ संकल्प एवं निरंतर परिश्रम करने का आह्वान किया। उन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक के सफर के अनुभव साझा किए। श्री चौधरी ने बताया कि उन्होंने 11 वर्ष की आयु में आईएएस अधिकारी बनने का लक्ष्य निर्धारित किया था और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मेहनत एवं संकल्प से उसे हासिल किया।
विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि बदलते समय में शैक्षणिक विषयों के साथ जीवन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की समझ भी आवश्यक है। उन्होंने भविष्य में आने वाली परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करने तथा समस्याओं के समाधान खोजने के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को धैर्य, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्राचार्यों की बैठक मेंं बोर्ड परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने पर दिया गया जोर
रायपुर । गरियाबंद जिले में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार एवं विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष पहल की जा रही है। इसी क्रम में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के त्रैमासिक परीक्षा परिणामों के विश्लेषण एवं आगामी शैक्षणिक कार्ययोजना तैयार करने हेतु 29 अक्टूबर 2026 को जिला पंचायत सभाकक्ष, गरियाबंद में जिले के समस्त हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा की अध्यक्षता में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की दिशा में कलेक्टर श्री शर्मा द्वारा गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल गरियाबंद एवं स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल का निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों, शिक्षण व्यवस्था एवं विद्यार्थियों के अध्ययन स्तर का जायजा लिया तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण निर्मित करने और परीक्षा परिणामों में सुधार लाने पर विशेष जोर दिया।
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों का विकासखंडवार एवं विषयवार विश्लेषण कर कमजोरियों की पहचान करें तथा आगामी मासिक, अर्धवार्षिक एवं प्री-बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें। आगामी बोर्ड परीक्षा में जिले के टॉप 30 विद्यार्थियों को टॉप 10 में स्थान दिलाने, डी ग्रेड के विद्यार्थियों के लिए विशेष उपचारात्मक शिक्षण, पाठ्यक्रम समय-सीमा में पूर्ण करने, प्रोजेक्ट एवं प्रायोगिक कार्यों को समय पर पूरा कराने तथा विद्यार्थियों में नियमित अध्ययन एवं स्पष्ट लेखन की आदत विकसित करने पर जोर दिया गया।
कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विज्ञान एवं गणित संकाय के विद्यार्थियों को जेईई एवं नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करने, मेधावी विद्यार्थियों के लिए पीटीएम आयोजित करने तथा कक्षा 5वीं के विद्यार्थियों को जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा एवं कक्षा 8वीं के विद्यार्थियों को एनएमएमएस परीक्षा की तैयारी कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर नियमित टेस्ट, उपचारात्मक शिक्षण एवं रेमेडियल शिक्षण के माध्यम से उनके शैक्षणिक स्तर में सुधार लाने तथा संकुल एवं विकासखंड स्तर पर विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग कर जवाबदेही सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी ने समस्त प्राचार्यों को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा, ताकि जिले के परीक्षा परिणामों में गुणात्मक सुधार लाया जा सके। जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक विद्यालय में शिक्षण की गुणवत्ता बेहतर हो तथा जिले के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर गरियाबंद जिले का नाम रोशन करें। कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा ने कहा कि प्रत्येक कक्षा में पढ़ाई का स्पष्ट लर्निंग आउटकम दिखाई देना चाहिए। बच्चों ने कक्षा में जो कुछ सीखा है, उसका प्रतिफल उनके ज्ञान और समझ में नजर आना चाहिए। उन्होंने सभी प्राचार्यों को शिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और नियमित रूप से विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का आकलन करने के निर्देश दिए। इस दौरान एसडीएम सुश्री हितेश्वरी बाघे, जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेश चंद्राकर, डीएमसी श्री शिवेश शुक्ला, श्री श्याम चंद्राकर सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
गरियाबंद : दीपावली पर पटाखा दुकानों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य
रायपुर । गरियाबंद जिले मेंम दीपावली पर्व के मद्देनजर जिले में पटाखा दुकानों के संचालन एवं आतिशबाजी के सुरक्षित भंडारण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में पटाखा दुकानों एवं भंडारण स्थलों में आगजनी की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर दुकान स्थल की सुरक्षा के संबंध में जिला अग्निशमन अधिकारी से अभिमत भी लिया जा सकता है। साथ ही अवैध रूप से संचालित पटाखा दुकानों एवं भंडारण स्थलों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन द्वारा पटाखा दुकानों के लिए चयनित एवं आबंटित स्थलों पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। पटाखा दुकानें कपड़े, बांस, रस्सी, टेंट या अन्य ज्वलनशील सामग्री से नहीं बनाई जाएंगी। दुकानें अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड में संचालित होनी चाहिए। प्रत्येक दुकान के बीच कम से कम 3 मीटर की दूरी रखी जाए तथा दुकानें एक-दूसरे के सामने न बनाई जाएं। दुकानों में प्रकाश व्यवस्था के लिए तेल के लैंप, गैस लैंप और खुली बिजली बत्ती का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। पटाखा दुकानों से 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन भी प्रतिबंधित रहेगा।
विद्युत सुरक्षा के लिए तारों के जोड़ खुले नहीं होने चाहिए। प्रत्येक मास्टर स्विच में फ्यूज या सर्किट ब्रेकर लगाना अनिवार्य होगा, ताकि शॉर्ट सर्किट होने पर बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो सके। दुकानें ट्रांसफार्मर के पास नहीं होनी चाहिए और उनके ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइन नहीं गुजरनी चाहिए। प्रत्येक दुकान में 5 किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा दुकानों के सामने उचित अंतराल पर 500 लीटर क्षमता के पानी से भरे ड्रम और बाल्टियों की व्यवस्था भी रखनी होगी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पटाखा दुकानों के सामने बाइक एवं कार की पार्किंग प्रतिबंधित रहेगी। दुकान परिसर में प्रमुख स्थानों पर अग्निशमन विभाग और एम्बुलेंस के संपर्क नंबर प्रदर्शित करना होगा। साथ ही अग्निशमन वाहनों के आवागमन के लिए पर्याप्त रास्ता खुला रखना अनिवार्य होगा। इन सभी निर्देशों का उद्देश्य दीपावली के दौरान आगजनी की घटनाओं को रोकना तथा किसी आपात स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम करना है।
जनदर्शन में मिले 53 आवेदन, समय-सीमा में निराकरण के निर्देश
रायपुर । जांजगीर-चांपा कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में डिप्टी कलेक्टर श्री देवेन्द्र चौधरी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याओं एवं मांगों को सुना। जनदर्शन के दौरान कुल 53 आवेदन प्राप्त हुए। जनदर्शन में तहसील जांजगीर के ग्राम पंचायत खोखरा निवासी श्रीमती निशा सूर्यवंशी ने आयुष्मान कार्ड बनवाने, ग्राम पंचायत बनारी निवासी श्री रामेश्वर प्रसाद साहू ने जमीन की मुआवजा राशि दिलाने, तहसील पामगढ़ के ग्राम जेवरा निवासी श्री मनोज कुमार केंवट ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया।
कार्यालय से फील्ड तक दिखे सक्रियता – श्री अरुण साव
उप मुख्यमंत्री ने ‘निर्माण मंथन’ में प्रदेशभर के अभियंताओं को किया संबोधित
पीडब्लूडी की राज्य स्तरीय कार्यशाला में गुणवत्ता, तकनीक और नवाचार पर मंथन
एनआईटी के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अभियंताओं ने दिया प्रशिक्षण
सड़क, पुल एवं भवन निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, सर्वेक्षण, प्राक्कलन, निविदा प्रक्रिया और सड़कों के रखरखाव की दी गई ट्रेनिंग
मुख्य अभियंता से लेकर उप अभियंता तक प्रशिक्षण में हुए शामिल
रायपुर,नवम्बर 2026



उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव आज विभागीय अभियंताओं के लिए आयोजित ‘निर्माण मंथन’ में शामिल हुए। लोक निर्माण विभाग की इस एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं, कार्यपालन अभियंताओं, सहायक अभियंताओं और उप अभियंताओं को सड़क, पुल एवं भवन निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, सर्वेक्षण, प्राक्कलन, निविदा प्रक्रिया और सड़कों के रखरखाव से जुड़े तकनीकी विषयों का प्रशिक्षण दिया गया। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अभियंताओं के साथ लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने गुणवत्ता, तकनीक और नवाचार पर विचार-विमर्श किया।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में प्रदेशभर के अभियंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के शिल्पकार हैं। इस भूमिका और दायित्व का गंभीरता एवं सक्रियता से निर्वहन कर अधोसंरचना को मजबूत करना है। लोक निर्माण विभाग राज्य के विकास का ‘ग्रोथ-इंजन’ (Growth Engine) है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के बाद से पिछले 26 वर्षों में छत्तीसगढ़ में जो बड़ा परिवर्तन आया है, उसमें विभाग की बड़ी भूमिका है। लोक निर्माण विभाग ने राज्य के विकास का नेतृत्व किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद अब विकास कार्यों के लिए कोई प्रतिकूलता नहीं है। पूरे प्रदेश में इसके लिए अच्छा माहौल है।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अभियंताओं से कहा कि आप लोग अपनी क्षमता, दक्षता और काबिलियत से राज्य के विकास में महती भूमिका निभाएं। बदलते समय के अनुसार नई तकनीकों और मशीनरी के साथ नई कार्य प्रद्धति अपनाएं। खुद को अपडेट और अपग्रेड करें। उन्होंने कहा कि विभाग के कार्यों से हम सबकी प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। खराब या त्रुटिपूर्ण काम से पूरे विभाग पर प्रश्नचिन्ह उठता है। बने-बनाए पैटर्न पर चलने के बजाय आप लोग अपने विवेक और मौलिकता के साथ श्रेष्ठ काम करें। श्री साव ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित मानकों एवं मापदंडों का गंभीरता से पालन करें। कार्यालय से लेकर फील्ड तक सक्रिय रहकर अपना उत्कृष्ट योगदान दें।
‘फील्ड और फाइल दोनों के कार्य रखें दुरूस्त’
लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने कार्यशाला में कहा कि निर्माण कार्यों को सकारात्मक सोच और टीम-वर्क के साथ आगे बढ़ाएं। अनुशासित रहकर स्वप्रेरणा से काम करें। आज कार्यशाला में सीखी गई बातों को फील्ड में और अपने काम में आत्मसात करें। उन्होंने सड़कों, पुलों और भवनों के आइकॉनिक (Iconic) एवं उत्कृष्ट कार्यों का अध्ययन व एक्सपोजर-विजिट कर नई तकनीकों को सीखने को कहा। नवाचारों और बेस्ट-प्रेक्टिसेस को अपनाकर धरातल पर उतारने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों से किए गए अनुबंधों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा।
श्री बंसल ने कहा कि अधोसरंचना विकसित करने में लोक निर्माण विभाग की अहम भूमिका है। नए कार्यों के प्रस्ताव तैयार करते समय भविष्य की जरूरतों का ध्यान रखें। उन्होंने सड़कों पर सुरक्षित आवागमन और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए ब्लैक-स्पॉट्स को दूर करने गंभीरता से काम करने को कहा। उन्होंने फील्ड और फाइल दोनों के कार्यों को दुरूस्त रखने को कहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज की कार्यशाला के बाद विभाग के कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी और कार्यों में तेजी आएगी।
’निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता का कड़ाई से करें परीक्षण’
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी ने सभी अभियंताओं को गुणवत्ता एवं निर्माण प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग लगातार बेहतरी, गुणवत्ता उन्नयन और सुधार की ओर बढ़ रहा है। विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सड़कों की परफॉर्मेंस गारंटी की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर अधिकारियों का नियंत्रण जरूरी है। निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता की कड़ाई से जांच व परीक्षण कर ही ठेकेदारों को भुगतान करें। उन्होंने अभियंताओं से कहा कि कन्सल्टेंट और एजेंसियों के भरोसे न रहते हुए खुद से जांच कर इंजीनियरिंग तकनीकों और मापदंडों का पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने सड़कों की मजबूती के लिए फ्लाई-एश के सही उपयोग के बारे में भी बताया।
इन विषयों पर हुआ प्रशिक्षण
लोक निर्माण विभाग की राज्य स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण कार्यशाला में निर्माण कार्यों की प्रारंभिक तैयारी से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव तक के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। अभियंताओं को रोलर कॉम्पैक्टेड कंक्रीट और व्हाइट टॉप कंक्रीट जैसी सड़क निर्माण तकनीकों के साथ ही फ्लेक्सिबल पेवमेंट, पुल निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण, भवन निर्माण तथा भवनों के रखरखाव से संबंधित तकनीकी विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। सर्वेक्षण एवं प्राक्कलन, निविदा दस्तावेजों की प्रक्रिया तथा वर्क्स एंड अकाउंट्स मॉनिटरिंग इंटिग्रेटेड सिस्टम (WAMIS), गवर्नमेंट ई-प्रीक्योरमेंट सिस्टम ऑफ नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर (GePNIC) और पंजीयन संबंधी जानकारी भी कार्यशाला में दी गई।
कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग के सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री एस.के. कोरी ने पुल निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण तथा कार्यपालन अभियंता श्री पी.के. गुप्ता ने सर्वेक्षण एवं प्राक्कलन का प्रशिक्षण दिया। अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव ने निविदा दस्तावेजों के बारे में जानकारी दी। वहीं छत्तीसगढ़ सड़क एवं अधोसंरचना विकास निगम (CGRIDCL) के अतिरिक्त प्रबंध संचालक श्री शशांक पाण्डेय ने वर्क्स एंड अकाउंट्स मॉनिटरिंग इंटिग्रेटेड सिस्टम (WAMIS), गवर्नमेंट ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम ऑफ नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर (GePNIC) और पंजीयन प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण दिया।
गरियाबंद जिले में अब ऑनलाइन मिलेंगी स्कूली विद्यार्थियों की टीसी
रायपुर । शासन के निर्देशानुसार गरियाबंद जिले में भी शासकीय सेवाओं को सरल, सहज और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। अब स्कूली छात्र-छात्राओं को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) प्राप्त करने के लिए विद्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की सुविधा के लिए टीसी जारी करने की प्रक्रिया को सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था से आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने तक की प्रक्रिया अधिक आसान और सुविधाजनक होगी। इस संबंध में जिले के स्कूलों के प्राचार्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा की उपस्थिति में आयोजित प्रशिक्षण में ई-जिला प्रबंधक श्री मिथिलेश कुमार देवांगन ने जिले के प्राचार्यों को सेवा सेतु पोर्टल के उपयोग, ऑनलाइन आवेदन के परीक्षण और स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों के निराकरण तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में भी विस्तार से समझाया।
ई-डिस्ट्रक्ट मैनेजर श्री मिथलेश देवांगन ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थी अथवा उनके अभिभावक अपने नजदीकी किसी भी सेवा सेतु केंद्र में जाकर स्थानांतरण प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद संबंधित विद्यालय द्वारा आवेदन का परीक्षण किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर ऑनलाइन माध्यम से टीसी जारी की जाएगी। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रमाण पत्र के लिए बार-बार विद्यालय जाने तथा अनावश्यक भागदौड़ करने से मुक्ति मिलेगी।
नौकरी, व्यवसाय अथवा अन्य कारणों से दूसरे स्थान पर जाने वाले परिवारों के बच्चों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी होगी। कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा ने प्राचार्यों को नई व्यवस्था की पूरी जानकारी रखने और इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सेवाओं का लाभ विद्यार्थियों और अभिभावकों तक आसानी से पहुंचना चाहिए। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से टीसी जारी होने से समय की बचत के साथ प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी।
जनदर्शन में मिले 53 आवेदन, समय-सीमा में निराकरण के निर्देश
रायपुर । जांजगीर-चांपा कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में डिप्टी कलेक्टर श्री देवेन्द्र चौधरी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याओं एवं मांगों को सुना। जनदर्शन के दौरान कुल 53 आवेदन प्राप्त हुए। जनदर्शन में तहसील जांजगीर के ग्राम पंचायत खोखरा निवासी श्रीमती निशा सूर्यवंशी ने आयुष्मान कार्ड बनवाने, ग्राम पंचायत बनारी निवासी श्री रामेश्वर प्रसाद साहू ने जमीन की मुआवजा राशि दिलाने, तहसील पामगढ़ के ग्राम जेवरा निवासी श्री मनोज कुमार केंवट ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया।
एकता नगर में छत्तीसगढ़ का परचम लहराने वाले जांबाज पुलिस अधिकारियों से मिले उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, साहस और अनुशासन की सराहना की
राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में छत्तीसगढ़ के वीर जवानों ने पूरे देश के सामने प्रस्तुत की बस्तर के शौर्य, संघर्ष और विजय की गौरवगाथा
बस्तर की महिला कमांडो के आत्मविश्वास और शानदार मार्च पास्ट ने पूरे देश को कराया बस्तर की नारी शक्ति का एहसास – उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा
जवानों ने साझा किए एकता नगर के अविस्मरणीय अनुभव
रायपुर, नवंबर 2026


गुजरात के एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में अपने अदम्य साहस, अनुशासन और शानदार प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाले पुलिस अधिकारियों से आज उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने परेड में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों को बधाई देते हुए उनके अनुभवों को जाना और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के सुरक्षा बलों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और सभी के साथ भोजन किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित भव्य परेड में छत्तीसगढ़ के जवानों की सहभागिता पूरे प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण था। उन्होंने कहा कि मैंने स्वयं इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा। जब हमारे जवान पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और गर्व के साथ कदम से कदम मिलाकर मार्च कर रहे थे, तब वह दृश्य अत्यंत भावुक और गर्व से भर देने वाला था। हमारे जवान केवल एक परेड में हिस्सा नहीं ले रहे थे, बल्कि वे पूरे देश के सामने छत्तीसगढ़ के साहस, संघर्ष और बदलते बस्तर की नई पहचान प्रस्तुत कर रहे थे।
*बस्तर की महिला कमांडो का आत्मविश्वास अद्भुत*
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने विशेष रूप से बस्तर फाइटर्स की महिला कमांडो के शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस आत्मविश्वास, जोश और दृढ़ता के साथ बस्तर की महिला कमांडो ने परेड में मार्च किया, वह अद्भुत था। उस क्षण वे केवल अपनी टुकड़ी का नेतृत्व नहीं कर रही थीं, बल्कि पूरे बस्तर की महिलाओं की शक्ति, साहस और आत्मसम्मान का प्रतिनिधित्व कर रही थीं।
श्री शर्मा ने कहा कि जिन क्षेत्रों को कभी नक्सल हिंसा और भय के कारण जाना जाता था, आज उन्हीं क्षेत्रों की बेटियां पूरे देश के सामने अपने साहस और सामर्थ्य का प्रदर्शन कर रही हैं। यह बदलते बस्तर की सबसे सुंदर और प्रेरणादायक तस्वीर है। बस्तर की इन बेटियों ने दिखा दिया है कि अवसर मिलने पर वे किसी भी चुनौती का सामना करने और देश का गौरव बढ़ाने में सक्षम हैं।
*एकता नगर की भव्यता और देशभर से मिले स्नेह ने मन मोह लिया*
मुलाकात के दौरान परेड में शामिल अधिकारियों ने उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय एकता दिवस परेड के लिए उन्होंने लगातार कठिन अभ्यास और मेहनत की थी। देश के विभिन्न सुरक्षा बलों के साथ एक ही मंच पर प्रदर्शन करना उनके लिए जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा। अधिकारियों ने बताया कि एकता नगर की सुंदरता, भव्यता और वहां की व्यवस्थाएं उनकी कल्पना से भी कहीं अधिक शानदार थीं। उन्होंने कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ से उन्हें लगातार बधाइयां और शुभकामनाएं प्राप्त हुईं, जिससे उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया।
जवानों ने भावुक होकर बताया कि उनके लिए सबसे गर्व का क्षण वह था, जब पूरे देश के सामने छत्तीसगढ़ पुलिस और बस्तर के सुरक्षा बलों के योगदान को प्रस्तुत करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि हमने पूरे गर्व के साथ देश को बताया कि किस प्रकार सभी ने मिलकर नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष किया और उसे समाप्त करने में अपनी भूमिका निभाई। यह केवल परेड में शामिल होने का अवसर नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, साथियों के बलिदान और बस्तर में स्थापित हो रही शांति की विजयगाथा को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर था।
*नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष से शांति और विकास तक की यात्रा का प्रतीक बनी परेड*
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुरक्षा बलों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में अपने साहस, समर्पण और बलिदान से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी है। आज उसी संघर्ष और सफलता की कहानी राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत होना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर आज भय और हिंसा के अतीत से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस परिवर्तन में हमारे वीर जवानों की भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड में छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और एसटीएफ की सहभागिता ने पूरे देश को छत्तीसगढ़ के पराक्रम और मजबूत संकल्प का संदेश दिया है।
*राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में इन अधिकारियों ने निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां*
गुजरात के एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में डीएसपी श्री बृज किशोर यादव ने संपूर्ण परेड के द्वितीय कमान अधिकारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। वे वर्तमान में बीजापुर जिले के कुटरू में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (एसडीओपी) के पद पर पदस्थ हैं। डीएसपी श्री जितेंद्र कुम्भकार परेड के आरक्षित टू-आईसी रहे। वे वर्तमान में सुकमा जिले के कोंटा में एसडीओपी के पद पर पदस्थ हैं।
डीएसपी श्री कुलदीप बंजारे ने डीआरजी की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व किया। श्री शरद जायसवाल डीआरजी पुरुष टुकड़ी के आरक्षित कमांडर रहे। डीएसपी सुश्री अमृता पैकरा ने डीआरजी एवं बस्तर फाइटर्स की महिला टुकड़ी का नेतृत्व किया। सुश्री कविता ध्रुवे महिला टुकड़ी की आरक्षित कमांडर रहीं। इसी प्रकार डीएसपी श्री प्रवीण भारती एसटीएफ टुकड़ी के आरक्षित अधिकारी रहे।
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सभी अधिकारियों के समर्पण, कठिन परिश्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। आप सभी का साहस और अनुशासन प्रदेश के अन्य पुलिसकर्मियों तथा युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सभी अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
जांजगीर-चांपा:एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन की अंतिम तिथि अब 15 नवंबर तक
रायपुर । जांजगीर-चांपा में आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का शुभारंभ 15 नवंबर 2026 से होना है। शासन द्वारा किसानों के हित में एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से नवीन पंजीयन तथा पंजीकृत फसल या रकबे में संशोधन की कार्यवाही 31 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर 15 नवंबर 2026 तक कर दी गई है, ताकि एक भी किसान भाई अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने से वंचित न रहे। उप संचालक कृषि श्री राकेश शर्मा ने बताया की शासन की योजना अनुसार एकीकृत किसान पोर्टल पर इस वर्ष धान के बदले अन्य कोई भी फसल का पंजीयन कराने पर किसानों को 15000 रूपये प्रति एकड़ एवं सामान्य फसल जैसे - दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास फसल का पंजीयन कराने पर उन्हें 10000 रूपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि शासन द्वारा प्रदाय की जाएगी। किसानों से अपील किया गया है कि अपने नजदीकी संबंधित सेवा सहकारी समिति में दलहन, तिलहन एवं अन्य फसलों का भी समय-सीमा में पंजीयन कराना सुनिश्चित करें।
राज्योत्सव 2026 : वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को प्रथम पुरस्कार
‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी में वन संरक्षण, पर्यटन और आजीविका की पहल को मिला सम्मान
बस्तर में बदलाव की तस्वीर से लेकर वन्यजीव संरक्षण और डिजिटल नवाचारों की दिखी झलक
रायपुर, नवंबर 2026

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को विभागीय प्रदर्शनियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। राज्योत्सव के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने यह सम्मान प्रदान किया। विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पांडेय ने पुरस्कार प्राप्त किया। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों- कर्मचारियों और वन धन केंद्रों से जुड़े सदस्यों को बधाई दी।
गौरतलब है कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर तैयार प्रदर्शनी में बस्तर में शांति के साथ बढ़ते पर्यटन और आजीविका के अवसरों से लेकर प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की पहलों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
बस्तर में बदलाव की तस्वीर बनी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण
प्रदर्शनी को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया था। प्रवेश द्वार पर जगदलपुर के जनजातीय गौरव वाटिका, बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चेंदरू गेट और दंतेवाड़ा के वन मंदिर के प्रतिरूप बनाए गए थे। इनके माध्यम से बस्तर की जनजातीय
संस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा को प्रदर्शित किया गया।
‘बदलता बस्तर’ खंड में सुकमा के तुंगल डैम स्थित ‘तुंगल कैफे’ की पहल विशेष आकर्षण रही। यहां मुख्यधारा में लौट चुकी पूर्व महिला नक्सली कैफे का संचालन कर रही हैं, जबकि स्थानीय युवा पर्यटकों को नौकायन और कयाकिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर आजीविका अर्जित कर रहे हैं। प्रदर्शनी में इस पहल के माध्यम से बस्तर में बदलते सामाजिक परिवेश और रोजगार के नए अवसरों को सामने रखा गया।
इसके साथ ही कांगेर घाटी के समीप धुड़मारास गांव के होमस्टे, कोंडागांव की पुष्पाल घाटी के इको-कॉटेज, तीरथगढ़ जलप्रपात और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका क्षेत्र के मॉडल प्रदर्शित किए गए। धुड़मारास गांव का चयन संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ में हुआ है।
प्रदर्शनी में बस्तर की 572 देवगुडि़यों के जीर्णाेद्धार, मनरेगा के अंतर्गत 21.67 लाख मानव दिवस रोजगार सृजन तथा कांगेर वैली में 35 सफारी जिप्सियों के संचालन से 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी भी दी गई।
वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन की पहल प्रदर्शित
‘संवरता छत्तीसगढ़’ भाग में प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को त्रिआयामी मॉडल एवं जीवंत प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें बिलासपुर के कोपरा जलाशय को दिसंबर 2025 में प्रदेश के पहले रामसर स्थल के रूप में मिली मान्यता, बारनवापारा अभयारण्य में दशकों बाद काले हिरणों की रिलोकेशन और औरापानी में गिद्ध संरक्षण के प्रयास प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए। बारनवापारा में काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन की सराहना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी की थी।
मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन के लिए ‘गजरथ यात्रा’ जागरूकता अभियान और ‘गज संकेत’ ऐप का प्रदर्शन किया गया। यह ऐप हाथियों की आवाजाही की जानकारी ग्रामीणों तक वॉयस कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से पहुंचाता है।
वृक्षारोपण की उपलब्धियों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधों के रोपण की जानकारी दी गई। इसी तरह किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत 36 हजार 896 किसानों द्वारा 62 हजार 441 एकड़ क्षेत्र में 3.67 करोड़ पौधे लगाने की जानकारी प्रस्तुत की गई।
डिजिटल तकनीक और वन उत्पादों ने भी किया आकर्षित
प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित वन्यजीव प्रश्नोत्तरी, इंटरैक्टिव गेम, 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी, लाइट एंड साउंड प्रभाव तथा सेल्फी प्वाइंट दर्शकों, विशेषकर युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहे। क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शकों ने विभाग की विशेष वेबसाइट के माध्यम से वानिकी योजनाओं और प्रदेश के इको-टूरिज्म स्थलों की जानकारी प्राप्त की।
संयुक्त वन प्रबंधन के स्टॉल पर ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित बांस के घर, नाव, लालटेन और सजावटी वस्तुओं की बिक्री हुई। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के स्टॉल पर वन मधु, सफेद मूसली, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू और महाभृंगराज तेल जैसे वन धन केंद्रों में तैयार उत्पादों ने भी लोगों को आकर्षित किया। राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने घरेलू बाडि़यों में सिंगी और शतावरी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती से ग्रामीण महिलाओं के लिए सालाना 20 से 30 हजार रुपए की अतिरिक्त आय की संभावनाओं को प्रदर्शित किया।
शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति आदिवासी लोक कला महोत्सव का आयोजन 5 नवंबर को
रायपुर । जिला मुख्यालय कांकेर के बीएड कॉलेज परिसर में 5 नवंबर को शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति, आदिवासी लोक कला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर जिला स्तर पर जनजातीय लोक नर्तक दलों के बीच प्रतियोगिता आयोजित होगी, इसमें जिले के आदिवासी लोक कला एवं नृत्य दल भाग ले सकेंगे। आदिवासी लोक कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है।
आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त सुश्री जया मनु ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले आदिवासी लोक कला (नर्तक) दल को 13 नवंबर को जिला मुख्यालय रायगढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय लोक नृत्य महोत्सव में कांकेर जिले का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने जिले के जनजातीय लोक नर्तक दलों से बीएड कॉलेज परिसर कांकेर में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।
दंतेवाड़ा के सुदूर ‘लावा’ गाँव में पहली बार गूंजी टीवी की आवाज
रायपुर । छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के धुर नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में विकास का पहिया अब तेजी से घूमने लगा है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले एक अत्यंत सुदूर और दुर्गम पहाड़ी गाँव 'लावा' में जिला प्रशासन के सहयोग से क्रेडा (CREDA) विभाग द्वारा 'कम्युनिटी सोलर टीवी' (सामुदायिक सौर टीवी) की स्थापना की गई है। महज़ 21 परिवारों की आबादी वाले इस छोटे से आदिवासी गाँव के लिए यह किसी ऐतिहासिक क्रांति से कम नहीं है, क्योंकि यहाँ के ग्रामीणों ने अपने जीवन में पहली बार गाँव के भीतर ही टेलीविज़न स्क्रीन देखी है।
बस्तर के दूरदराज गाँवों तक विकास और खुशहाली पहुँचाना हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इस अभूतपूर्व पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के हमारे दूरदराज और अंतिम छोर पर बसे गाँवों तक विकास, शिक्षा, और आधुनिक तकनीक की रोशनी पहुँचाना हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। दंतेवाड़ा के सुदूर लावा गाँव में सामुदायिक सोलर टीवी की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि विकास अब नक्सलवाद के अंधेरे को पीछे छोड़कर हर आदिवासी भाई-बहन के जीवन तक पहुँच रहा है। जब इन सुदूर इलाकों के बच्चे और ग्रामीण पहली बार टीवी स्क्रीन पर देश-दुनिया की खबरें और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देखेंगे, तो उनके सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी। हमारी सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ और चुनौतियाँ
बैलाडीला की ऊँची पहाड़ियों के पीछे और घने जंगलों के बीच बसा लावा गाँव भौगोलिक रूप से बेहद अलग-थलग है। किरंदुल के मुख्य लौह-अयस्क खनन क्षेत्र (NMDC) से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित इस गाँव तक पहुँचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। यहाँ के ग्रामीणों को अपनी बुनियादी ज़रूरतों, जैसे राशन दुकान (PDS) से चावल लाने के लिए आज भी पहाड़ी और पथरीले रास्तों से होकर मीलों पैदल सफर तय करना पड़ता है।
दशकों तक रहा नक्सलवाद का साया
लावा और इसके आसपास का पुरेंगल क्षेत्र दशकों तक घोर नक्सल प्रभावित इलाका रहा है। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों का फायदा उठाकर नक्सलियों ने इस क्षेत्र को अपना गढ़ बना रखा था, जिसके कारण कई सालों तक यहाँ न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी पहुँच पाता था और न ही कोई जनप्रतिनिधि। सुरक्षा कारणों से यह गाँव पूरी तरह से आधुनिक दुनिया से कटा हुआ था और यहाँ बुनियादी सुविधाओं का पहुँचना एक सपना बना हुआ था।
सुरक्षा बलों का प्रयास और बदला परिदृश्य
सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन्स और मुस्तैदी के बाद अब इस क्षेत्र में नक्सलवाद का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है। जहाँ कभी दहशत का माहौल था, वहाँ अब बदलाव की बयार बह रही है। हाल के दिनों में जिला कलेक्टर और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने खुद इस गाँव का दौरा कर ग्रामीणों की चौपाल ली। सुरक्षा और विश्वास के इसी माहौल का नतीजा है कि आज प्रशासन सीधे ग्रामीणों के दरवाज़े तक विकास योजनाएँ पहुँचा रहा है।
कम्युनिटी सोलर टीवी से बदलेगी तस्वीर
चूँकि यह गाँव पारंपरिक बिजली ग्रिड से काफी दूर है, इसलिए जिला प्रशासन और क्रेडा (छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) ने यहाँ सौर ऊर्जा का सहारा लिया। गाँव में लगाए गए इस कम्युनिटी सोलर टीवी के जरिए अब निम्नलिखित बदलाव देखने को मिलेंगे:
आधुनिक दुनिया और सूचनाओं से जुड़ाव
दुर्गम पहाड़ी गाँव 'लावा' में टीवी के माध्यम से अब गांव के लोग छत्तीसगढ़, भारत और पूरी दुनिया में हो रही गतिविधियों और खबरों से सीधे जुड़ सकेंगे। इससे ग्रामीणों को सरकार की नई योजनाओं, कृषि तकनीकों और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों के बारे में आसानी से पता चल सकेगा।
बच्चों के लिए शिक्षाप्रद ज्ञान
गांव के बच्चों को अब टीवी के माध्यम से मनोरंजन के साथ पढ़ाई, ज्ञानवर्धक और शिक्षाप्रद कार्यक्रम देखने को मिलेंगे, जिससे उनकी समझ और सामान्य ज्ञान बढ़ेगा। सुदूर क्षेत्र में रहने वाले इन बच्चों के लिए स्क्रीन पर देखकर सीखना एक नया और प्रभावी अनुभव होगा।
मनोरंजन और सामाजिक मेलजोल
कम्युनिटी टीवी होने के कारण गांव के सभी 21 परिवार एक जगह इकट्ठा होकर कार्यक्रम देख सकेंगे। इससे ग्रामीणों के बीच आपसी जुड़ाव और बढ़ेगा। दिनभर खेती और वनोपज इकट्ठा करने की कड़ी मेहनत के बाद, शाम को मनोरंजन के साधन मिलने से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
सौर ऊर्जा का बेहतरीन उपयोग
चूंकि यह इलाका बेहद सुदूर और बिजली की पारंपरिक लाइनों से दूर है, इसलिए सोलर पैनल आधारित टीवी पूरी तरह से आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल है, जिससे बिना बिजली कटौती की चिंता अपना कामकाज कर सकते हैं।
दशकों के अंधेरे और नक्सली खौफ को पीछे छोड़कर लावा गाँव अब सौर ऊर्जा की रोशनी और सूचना तंत्र के जरिए एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। जिला प्रशासन का यह प्रयास साबित करता है कि सरकार की नज़रें बस्तर के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति पर भी हैं।
बस्तर और सरगुजा सहित जनजातीय एवं दूरस्थ अंचलों के युवाओं तक पहुंचे विश्वस्तरीय वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ : मुख्यमंत्री श्री साय
विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में करेंगे स्थापित : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक
छत्तीसगढ़ को वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, तकनीकी नवाचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श
प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर तथा विज्ञान एवं गणित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और आधुनिक अनुसंधान के क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर
आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और किफायती स्वास्थ्य तकनीकों के विकास में भी आईआईएससी की विशेषज्ञता का लाभ लेने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रस्तावित परियोजनाओं की व्यवहार्यता का परीक्षण कर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश
रायपु नवंबर 2026


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की शक्ति से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल औद्योगिक और आर्थिक विकास में ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं और प्रतिभाशाली मानव संसाधन को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर विकास का एक नया अध्याय लिखा जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन एवं संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और चिकित्सा अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर संभावित सहयोग, आवश्यक वैज्ञानिक अधोसंरचना, संस्थागत व्यवस्थाओं और क्रियान्वयन की प्रारंभिक रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों का छत्तीसगढ़ आगमन पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान देश ही नहीं, विश्व के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों में शामिल है। इसकी विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमताओं और शैक्षणिक अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से युवाओं को मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी उत्कृष्टता और उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन की निर्णायक भूमिका होगी। छत्तीसगढ़ भी इसी राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक और शैक्षणिक अधोसंरचनाएं विकसित करना चाहती है, जिनका लाभ केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाली अनेक पीढ़ियों को प्राप्त हो। विज्ञान और अनुसंधान में निवेश प्रदेश के दीर्घकालिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ सहयोग की सभी संभावनाओं का गंभीरता से परीक्षण किया जाए। प्रस्तावित परियोजनाओं की तकनीकी, वित्तीय एवं संस्थागत व्यवहार्यता का अध्ययन कर ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि इन पहलों को व्यावहारिक स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से संबंधित इन महत्वपूर्ण प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से तैयार होगा वैज्ञानिक और तकनीकी विकास का नया आधार
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन प्रमुख परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इनमें प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना, विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड संस्थान का विकास तथा आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ तक पहुंचाना शामिल है।
इन प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, अनुसंधान आधारित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।
विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर से उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों को मिलेगी नई शक्ति
बैठक में छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना के प्रस्ताव पर विशेष रूप से चर्चा हुई। यह प्रस्तावित केंद्र प्रदेश के खनिज, इस्पात, धातु, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित उद्योगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक राज्यों में शामिल है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोग बढ़ाने, नई औद्योगिक तकनीकों के विकास और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान सुविधाओं की आवश्यकता है। प्रस्तावित केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस केंद्र में अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण, उच्च तापमान पर पदार्थों का परीक्षण, नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक एवं चुंबकीय पदार्थों का अध्ययन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
इन सुविधाओं के माध्यम से धातु एवं मिश्रधातुओं के गुणों का अध्ययन, उन्नत पदार्थों का परीक्षण, नई विनिर्माण तकनीकों का विकास और औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सकेगा। इससे रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और अन्य अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में भी अनुसंधान एवं नवाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रस्तावित केंद्र में लगभग 600 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता विकसित करने की परिकल्पना है। इसके माध्यम से तीन वर्षों में लगभग 1,800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
इस केंद्र के विकसित होने से छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्टार्टअप और औद्योगिक इकाइयों को उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए विदेशी संस्थानों पर निर्भरता कम करने, अनुसंधान की लागत और समय में कमी लाने तथा उद्योगों की तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमताओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ना प्रदेश के आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला कदम होगा। इससे राज्य में अनुसंधान आधारित उद्योगों, तकनीकी नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकेंगे।
विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव
बैठक में प्रदेश में विज्ञान और गणित शिक्षा की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार के उद्देश्य से भारतीय विज्ञान संस्थान के अकादमिक मार्गदर्शन में चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विशेष संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रस्तावित इस संस्थान का उद्देश्य विज्ञान एवं गणित विषयों में उच्च प्रशिक्षित, दक्ष और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करना है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित जैसे प्रमुख विषयों के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान, संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
संस्थान में 14 आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाएं, 600 विद्यार्थियों की आवासीय क्षमता, समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक व्याख्यान कक्ष, खेल सुविधाएं तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए आवासीय अधोसंरचना विकसित करने की परिकल्पना है। यहां 25 पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा पाठ्यक्रम निर्माण, प्रयोगशाला विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित करने में अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा ही वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता की मजबूत आधारशिला है। विज्ञान और गणित के विषयों में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने तथा उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए उत्कृष्ट शिक्षकों का होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रदेश में विज्ञान एवं गणित के उच्च प्रशिक्षित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करने में सहायता मिलेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव शासकीय विद्यालयों सहित प्रदेश की संपूर्ण स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रयास होगा।
चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों में भी सहयोग की संभावनाएं
बैठक में तीसरी महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की शैक्षणिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमताओं का लाभ छत्तीसगढ़ में उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
इस प्रस्ताव में किफायती चिकित्सा जांच तकनीकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, क्लिनिकल रिसर्च और चिकित्सा क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन के विकास को प्राथमिकता दी गई है।
प्रारंभिक चरण में पूर्ण मेडिकल स्कूल की स्थापना के स्थान पर हब एंड नेटवर्क मॉडल अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस मॉडल के माध्यम से भारतीय विज्ञान संस्थान को छत्तीसगढ़ के अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, शासकीय संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों से जोड़कर संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी विकास की दिशा में कार्य किया जा सकेगा।
इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशालाओं की स्थापना, चिकित्सा तकनीकों के परीक्षण एवं सत्यापन केंद्रों का विकास, फेलोशिप, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।
बैठक में बताया गया कि बेंगलुरु स्थित टाटा आईआईएससी मेडिकल स्कूल विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा के समन्वय पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है। इसमें कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण और रोबोटिक सर्जरी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सा क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
इस संस्थान के वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुभवों का लाभ छत्तीसगढ़ में चिकित्सा अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आधुनिक उपचार तकनीकों के विकास में लिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में चिकित्सा जांच, रोगों की शीघ्र पहचान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए तकनीकी नवाचार उपयोगी सिद्ध होंगे।
बस्तर और सरगुजा के युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ने, आधुनिक प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की है।
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान की विशेषज्ञता से प्रदेश के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अनुसंधान इंटर्नशिप, आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का प्रशिक्षण और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के व्याख्यान उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी, बुनियादी विज्ञान और अन्य उभरती तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने पर भी विचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अवसरों से शासकीय शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के युवाओं को प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा के प्रतिभाशाली युवा भी देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में अनुसंधान करें, नई तकनीकों का विकास करें और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएं, यह राज्य सरकार की आकांक्षा है।
बस्तर और सुकमा में जल संरक्षण तथा स्थानीय तकनीकी नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया गया।
भारतीय विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बस्तर और सुकमा सहित विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के बिना जल प्रवाह की ऊर्जा से संचालित पंपिंग तकनीकों के उपयोग संबंधी कार्यों की जानकारी दी।
हाइड्रोलिक रैम एवं टरबाइन पंपों पर आधारित ये तकनीकें विशेष रूप से दूरस्थ वनांचलों में उपयोगी हो सकती हैं, जहां पारंपरिक विद्युत आधारित जलापूर्ति व्यवस्थाओं के संचालन में कठिनाइयां आती हैं। स्थानीय जलस्रोतों और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप इन तकनीकों का उपयोग जल उपलब्धता बढ़ाने तथा ग्रामीण समुदायों की आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक हो सकता है।
इसके अतिरिक्त शोधित जल के पुनर्चक्रण, जलाशयों के पुनर्भरण और भूजल संवर्धन के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के अनुभवों पर भी चर्चा हुई।
इस दौरान कर्नाटक के कोलार जिले में प्रतिदिन 440 मिलियन लीटर शोधित जल को 137 जलाशयों तक पहुंचाने वाली परियोजना का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचारों की उपयोगिता का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विज्ञान और तकनीक का उपयोग ग्रामीण जीवन को सुगम बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी किया जाना चाहिए।
विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय आवश्यक
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, उद्योग, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग से प्रदेश में आधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, उच्चस्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देने, उद्योगों की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार चाहती है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उत्कृष्ट मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित हो।
उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प को साकार करने में विज्ञान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ प्रस्तावित सहयोग प्रदेश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल साबित हो सकता है।
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन, प्रशासन एवं वित्त संकाय के डीन प्रोफेसर पी.एस. अनिल कुमार, मैकेनिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सत्यम सुवास तथा बायोलॉजिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सतीश राघवन शामिल हुए।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन की नई दिल्ली में पदस्थ निवेश आयुक्त सुश्री ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बिहान से जुड़कर लखपति दीदी बनीं संगीता पैकरा, ईंट निर्माण से बदली परिवार की आर्थिक तस्वीर
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित आजीविकामूलक गतिविधियां ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' से जुड़कर महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कटकोना की संगीता पैकरा ने ईंट निर्माण का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।
एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया व्यवसाय, बनाई एक लाख ईंटें
संगीता पैकरा प्रतिज्ञा महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष होने के साथ ही शंकरपाट आजीविका ग्राम संगठन की भी अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। ग्राम संगठन से एक लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने ईंट निर्माण का कार्य शुरू किया। इसके तहत उन्होंने लगभग एक लाख ईंटों का निर्माण कराया, जिससे उन्हें डेढ़ से दो लाख रुपये की कमाई हुई। इस आय का उपयोग वे ऋण चुकाने, घरेलू जरूरतों को पूरा करने और बच्चों की पढ़ाई में कर रही हैं।
बेटियों की उच्च शिक्षा को दे रहीं प्राथमिकता
संगीता बताती हैं कि उनके पति खदान में निजी मजदूरी करते हैं। पहले परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और सीमित आय में घर चलाना चुनौतीपूर्ण था। लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी परिस्थितियां बदलने लगीं। स्वरोजगार से प्राप्त आय के जरिए वे बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं। उनकी बड़ी बेटी बैकुंठपुर में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि छोटी बेटी अम्बिकापुर में आईटीआई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। वहीं बेटा दसवीं कक्षा में अध्ययनरत है। संगीता का कहना है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
स्वरोजगार से बदली जिंदगी, परिवार को मिला आर्थिक संबल
संगीता पैकरा ने बताया कि पहले उनके पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं था। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद न केवल उन्हें रोजगार का अवसर मिला, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। अब उनका अपना घर बन गया है और आवागमन के लिए वाहन भी खरीद लिया है। वे घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की शिक्षा और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए आर्थिक योगदान दे रही हैं।
संगीता कहती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे अपने व्यवसाय और परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से संभाल पा रही हैं। उन्होंने महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने की पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रहा बिहान
बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार एवं आयमूलक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। संगीता पैकरा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि आर्थिक संसाधनों तक पहुंच और स्वरोजगार के अवसर मिलने से महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी रख रही हैं।
विशेष लेख : दीवाली से पहले बजी महिलाओं के मोबाइल में खुशी की घंटी
महतारी वंदन योजना की 33 वीं किस्त जारी, महिलाओं में उत्साह का माहौल
- श्री धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर, नवंबर 2026

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करने की दिशा में चलाई जा रही महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की माताओं-बहनों को दीवाली के पहले एक बड़ी सौगात मिली है। राज्योत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त जारी की। इसके अंतर्गत प्रदेश की 67 लाख 40 हजार 410 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से कुल 632 करोड़ 63 लाख 67 हजार 750 रुपये की राशि अंतरित की गई।
67 लाख 33 हजार 502 महिला हितग्राहियों को लाभ
दीवाली से पहले महतारी वंदन योजना की 33 वीं किस्त जारी होने से महिलाओं और उनके परिवार में उत्साह का माहौल है। छत्तीसगढ़ शासन की इस निरंतर वित्तीय सहायता से प्रदेश की महिलाएं अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय योगदान दे रही हैं। ई-केवाईसी पूर्ण करा चुकीं 67 लाख 33 हजार 502 महिला हितग्राहियों को लाभ मिला। इसके साथ ही नियद नेल्ला नार कैंप क्षेत्रों की 6,908 महिलाओं को भी योजना की 33वीं किस्त प्रदान की गई। महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करना, परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति में उनकी सहभागिता बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाना है।
महतारी वंदन योजना की 33 वीं किस्त पात्र महिलाओं के बैंक खाते में अंतरित
ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की विवाहित महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए 10 मार्च 2024 को महतारी वंदन योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के अंतर्गत 67 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खाते में प्रतिमाह 1000 रुपए अंतरित किए जाते हैं। अब तक योजना की 33वीं किस्त के माध्यम से पात्र महिलाओं के बैंक खाते में 21 हजार 350.50 करोड़ रुपए अंतरित किए जा चुके हैं। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से महिलाएं न केवल परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हुई हैं, बल्कि खास अवसरों और त्योहारों को भी धूमधाम से मनाने में भी सक्षम हुई हैं।
महिलाओं के आर्थिक रूप से सक्षम होने पर व्यापारियों को भी लाभ हुआ है। महतारी वंदन योजना के शुरू होने से बाजारों में रौनक बढ़ी है। करवाचौथ से शुरू हुआ महिलाओं के द्वारा खरीदारी का दौर निरंतर जारी है। महिलाओं के आर्थिक रूप से सक्षम होने से परिवार के मुखिया पर आर्थिक बोझ कम हुआ है। इस कारण महिलाएं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का प्रति आभार व्यक्त कर रही हैं।
जब शासन की सहायता सही व्यक्ति तक पहुंचती है, तो वह केवल आर्थिक सहयोग नहीं रहती, बल्कि वह किसी महिला के लिए आत्मविश्वास बनती है, किसी परिवार के लिए उम्मीद, किसी बेटी के लिए सुरक्षित भविष्य और किसी बच्चे के लिए स्वस्थ जीवन की शुरुआत होती है।