विश्व मृदा दिवस पर कृषक प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
बेमेतरा, 06 दिसंबर 2025
कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग बेमेतरा के संयुक्त तत्वाधान में विश्व मृदा दिवस के अवसर पर ग्राम मड़ई विकासखंड बेमेतरा में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। खाद्य सुरक्षा एवं जलवायु परिवर्तन में मृदा के महत्व पर व्यापक चर्चा एवं जनजागरूकता हेतु प्रत्येक वर्ष 5 दिसंबर को पुरे विश्व में विश्व मृदा दिवस के रूप में विविध कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। इस वर्ष स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मृदा की थीम पर विश्व मृदा दिवस का आयोजन किया गया। केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख तोषण कुमार ठाकुर ने बताया कि अंधाधुंध व असंतुलित रसायन युक्त खेती तथा इंडस्ट्रियल वेस्ट, शहरी कचरा, अपशिष्ट पदार्थ, प्लास्टिक के उपयोग एवं खनन कार्य में लगातार वृद्धि होने के कारण कृषि एवं अन्य क्षेत्र के मृदा स्वास्थ्य व उसकी गुणवत्ता में तेजी से गिरावट हुई है। इससे कृषि उत्पाद में हानीकारक रसायन के अवशेष मानक स्तर से और अधिक बढ़ता जा रहा है इसके कारण हमारे आहार में विषाक्तता बढ़ती जा रही है, जो कई गंभीर बीमारियों का कारक बन रही है। इससे बचने के लिए जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती को अपनाना अतिआवश्यक है। इसकी शुरुआत किसानों को अपने घरेलू उपयोग के लिए जैविक फसल उत्पादन के साथ करना चाहिए तभी क्रमबद्ध तरीके से मृदा के स्वास्थ्य में सुधार होगा। तत्पश्चात ही ग्राम व शहरी जीवन के स्वास्थ्य में सुधार संभव होगा।
अनुभागीय कृषि अधिकारी श्रीमती निलिमा कोरी ने बताया कि जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर से जैविक खेती मिशन एवं प्राकृतिक खेती मिशन चलाया जा रहा है इसके अंतर्गत कृषकों के प्रक्षेत्र में प्रदर्शन कार्यक्रम भी लिया जा रहा है तथा प्राकृतिक खेती में उपयोग किये जाने वाले बायों इंपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर बायाँ इंपुट रिसोर्स सेंटर (बी.आर.सी.) के लिए कुछ कृषकों को चयन भी किया गया है। इस अवसर पर बी.आर.सी. के रूप में चयनित कृषक श्री तरुण वर्मा ने उनके द्वारा तैयार की जाने वाली बायो इंपुट के बारे में भी जानकारी दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक श्रीमती रजनी धर्मेन्द्र अगाशे एवं श्री डोमन सिंह टेकाम ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य की देखभाल के लिए मिट्टी परीक्षण के महत्व, समन्वित कीट, रोग एवं पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी दिया। श्री देशराज यादव, सहायक संचालक कृषि तथा श्री वी. के. टंडन वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती की विधि के बारे में बताते हुए मृदा में लाभदायक सुक्ष्म जीव के लिए जैविक कार्बन के महत्व के बारे में जानकारी दिया। परिचर्चा के दौरान उपस्थित किसानों को रबी दलहनी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई, साथ ही विभागीय अधिकारियों के द्वारा किसानों को फसल बीमा योजना के बारे में बताया गया। इस कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों, ग्राम मड़ई के सरपंच के साथ 50 से अधिक कृषकगण उपस्थित रहे।
साल 2023 में किए गए जैव विविधता सर्वेक्षण के अनुसार यहां 104 मछलियों, 19 उभयचरों और 243 पक्षियों की प्रजातियां दर्ज की गईं। अक्टूबर से मार्च के बीच भारत, रूस, मंगोलिया, बर्मा, बांग्लादेश सहित कई देशों से हजारों प्रवासी पक्षी यहां आते हैं। इसी कारण गिधवा- परसदा परिसर छत्तीसगढ़ का एक लोकप्रिय बर्ड-वॉक और प्रकृति अध्ययन केंद्र बन गया है।

गिधवा-परसदा परिसर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है यहां नियमित रूप से आयोजित बर्ड वॉक, फॉरेस्ट ट्रेल और नेचर ट्रेल जैसी गतिविधियाँ। इन ट्रेल्स में विद्यार्थियों और आगंतुकों को पक्षियों, पौधों और अन्य प्रजातियों की पहचान सिखाई जाती है। वन विभाग के प्रशिक्षित मार्गदर्शकों द्वारा पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन के बारे में सरल और वैज्ञानिक जानकारी दी जाती है।


