छत्तीसगढ़ / धमतरी

एपीसी की समीक्षा बैठक : दस साल पुरानी किस्मों के स्थान पर नई किस्मों को करें प्रमोट

 धमतरी   । 23 अप्रैल 2025/ कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने आज धमतरी कलेक्टोरेट सभाकक्ष में संभाग स्तरीय बैठक में विगत रबी मौसम की उपलब्धियों और आगामी खरीफ मौसम की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बैठक में आगामी खरीफ मौसम में पिछले दस वर्षों से लगाई जा रही फसलों की किस्मों के स्थान पर नई किस्मों को प्रमोट करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। समीक्षा के शुरुवात में संभागायुक्त रायपुर संभाग रायपुर द्वारा संभाग में रबी 2024-25 में खाद ,बीज की स्थिति और खरीफ 2025 के लिए लक्ष्य की जानकारी दी गई ।कृषि उत्पादन आयुक्त ने समय पर बीज, खाद, दवा आदि कृषि आदानों के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने अमानक नमूनों की स्थिति में केवल लायसेंस निरस्तीकरण या निलंबन और अमानक सामग्री को बेचने से रोक लगाने के अलावा ऐसे दुकानदारों और निर्माता कम्पनियों के विरूद्ध वस्तु अधिनियम और अन्य नियमों के आधार पर दण्डात्मक कार्रवाई करने के भी निर्देश कृषि विभाग के अधिकारियों को दिए। श्रीमती निगार ने कहा कि अभी सभी समितियों और भण्डारग्रहों में बीज, खाद, दवाई खरीफ में उपयोग के लिए रखी जा रही है। उन्होंने समय पर इनके नमूने लेकर जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए, ताकि जांच के परिणाम सामग्रियों का किसानों को वितरण होने से पहले प्राप्त हो जाएं। इस बैठक में रायपुर संभाग के संभाग आयुक्त श्री महादेव कावरे, सभी पांच जिलों-रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, महासमुंद और गरियाबंद के कलेक्टर, जिला पंचायत के सीईओ, कृषि विभाग के अधिकारियों सहित कृषि, पशु पालन, मछलीपालन, उद्यानिकी और कृषि विश्वविद्यालय के रिसर्च संचालक भी मौजूद रहे। बैठक में राज्य बीज निगम, सहकारी विपणन संघ, जलग्रहण प्रबंधन एजेंसी, कृषि विपणन बोर्ड और उद्यानिकी महाविद्यालय के प्रबंध संचालक भी शामिल हुए।

    समीक्षा बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने जिलेवार आगामी खरीफ कार्यक्रम और कृषि तथा उसके सहयोगी विभागों की योजनाओं की जानकारी कलेक्टरों के माध्यम से ली। उन्होंने आगामी खरीफ में बीज उत्पादन कार्यक्रम के लिए नई फसल किस्मों का चयन करने के निर्देश दिए। एपीसी ने कहा कि एक ही तरह की फसलों को लगातार बोने से कीट व्याधि की समस्या बढ़ जाती है। साथ ही उत्पादन भी कम होता है। इसके साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम होती जाती है। एपीसी ने इन समस्याओं से निपटने के लिए ज्यादा से ज्यादा नई किस्मों की खेती कराने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने को कहा। श्रीमती निगार ने कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित की गई छत्तीसगढ़ के लिए उपयुक्त नई किस्मों का प्रचार-प्रसार करने, उनसे संबंधित पोस्टर-पॉम्पलेट आदि वितरित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। उन्होंने आगामी खरीफ मौसम के लिए बीज की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता और समय पर उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। श्रीमती निगार ने रायपुर संभाग में रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग के लिए किसानों को जागरूक करने को भी कहा। 
 
       बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने मछलीपालन विभाग की योजनाओं की प्रगति पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने जिला अधिकारियों को मत्स्य उत्पादन के लिए केज प्रकरण स्वीकृत करते समय योजनाओं के मापदण्ड और नियमों का पूरा पालन करने के निर्देश दिए। श्रीमती निगार ने केज संबंधी प्रकरण जरूरतमंद मछुआ परिवारों और समितियों को प्राथमिकता से स्वीकृत करने को कहा। उन्होंने सभी जिलों में नई मछुआ समितियां बनाने के भी निर्देश दिए। कृषि उत्पादन आयुक्त ने संभाग के जिलों में दुग्ध उत्पादन की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने जिलों में दूध उत्पादन वाले क्षेत्रों की पहचान कर मिल्क रूट बनाने, दुग्ध समितियां गठित करने और समितियों को इस व्यवसाय में प्रशिक्षित कराने के लिए निर्देशित किया। श्रीमती निगार ने यह भी कहा कि दुग्ध व्यवसाय के लिए शासकीय सहायता आदि ’’पहले 

 

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