छत्तीसगढ़ / बालोद

बेलमांड गांव के संस्कृतिक मंच की बदहाली, पिछले कई वर्षों से जीर्णोद्धार की गुहार

 बेलमांड गांव के संस्कृतिक मंच की बदहाली, पिछले कई वर्षों से जीर्णोद्धार की गुहार


बालोद। बालोद जिला मुख्यालय से महज 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत बेलमांड में ग्रामीण पिछले पंद्रह सालों से गांव के सांस्कृतिक कला मंच के जीर्णोद्धार के लिए संघर्षरत हैं। लगभग 1670 की जनसंख्या वाले इस गांव के लिए, यह मंच सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है, लेकिन 1964 - 65 में बने इस भवन की जर्जर हालात ने ग्रामवासियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। विभिन्न सरकारी और जनप्रतिनिधि मंचों पर बार-बार मांग उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है, जिससे गांव में आक्रोश और निराशा गहराती जा रही है।

ग्राम बेलमांड का यह सांस्कृतिक मंच केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का स्थल ही नहीं, बल्कि ग्रामीण एकता और त्योहारों का भी गवाह रहा है। यहां हर साल हरियाली महोत्सव, गणेशोत्सव, नवरात्रि, दशहरा, मंडई मेला तथा अन्य कई बड़े कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। सामान्य दिनों में गांव की महत्वपूर्ण बैठकें और सार्वजनिक कार्यक्रम भी यहीं सम्पन्न होते हैं। मगर हालात यह हैं कि मंच पूरी तरह जर्जर हो चुका है। ध्वस्त दीवारें, पुराना छज्जा जहां से लोहे की छड़ें बाहर निकल आई हैं, दीवारों से उखड़ता हुआ प्लास्टर, जगह-जगह घास और खरपतवार का जमावड़ा और छत से टपकता पानी, इन सबने इसे एक उपेक्षित भवन बना डाला है।

मनरेगा सहित पंचायत, जनपद, जिला पंचायत और मुख्यमंत्री जनदर्शन तक बार-बार इस मुद्दे को उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों की लगातार मांग के बाद भी प्रशासन ने अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। कई बार आवेदन देने और जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाने के बाद भी फाइलें धूल ही फांक रही हैं। कार्यक्रमों के समय ग्रामीणों को पास ही कच्चे-अस्थायी मंच बनाकर काम चलाना पड़ता है, जिससे व्यस्तताओं के बीच अव्यवस्था और असुविधा बढ़ जाती है। बच्चों और बुजुर्गों को खासी समस्याएं होती हैं, क्योंकि बरसात में छत से पानी टपकने लगता है और भवन की जर्जर स्थिति के कारण हादसे का डर हर वक्त बना रहता है।

ग्रामीणों की नाराजगी अब सार्वजनिक हो रही है। उपसरपंच महेंद्र सार्वा, पूर्व सरपंच बाल्मीकि साबरसाटी, धनवाराम साहू, हरिशंकर साहू, मिलन साहू, संतलाल साहू, गंगाधर गांवरे आदि के साथ बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गांव की जनसंख्या और सांस्कृतिक परंपराओं को देखते हुए जल्द से जल्द मंच का पुनर्निर्माण या मरम्मत कराई जाए, ताकि गांव के सामूहिक आयोजनों का गौरव लौट सके।

जिस सांस्कृतिक मंच ने बेलमांड ग्राम को वर्षों तक एकता और रचनात्मकता का केन्द्र बनाए रखा, उसकी दयनीय स्थिति पर अब सभी की नजर है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि शीघ्रता से भवन का पुनर्निर्माण कराकर ग्रामवासियों को मूलभूत सुविधा मुहैया कराई जाए अन्यथा आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है

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