बालोद जिले के जंगलों में वन्यजीव शिकार का खुलासा, दर्जनों पक्षियों और हथियार के साथ दो युवक पकड़े गए
बालोद |
2025-08-03 11:02:50
बालोद जिले के जंगलों में वन्यजीव शिकार का खुलासा, दर्जनों पक्षियों और हथियार के साथ दो युवक पकड़े गए
जंगलों से पकड़े गए शिकारी
फिरोज अहमद खान
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। जंगलों की जैव विविधता और पशु-पक्षियों की सुरक्षा के तमाम सरकारी दावों के बावजूद शिकारियों की हिम्मत कम नहीं हो रही है। ग्रामीणों की सतर्कता और सूचना से वन विभाग ने दो युवकों को मौके से गिरफ्तार कर वन्यजीव संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता दिलाई है।
शनिवार, 02 अगस्त को ग्राम ढोर्रीठेमा के जंगलों में कुछ संदिग्ध युवकों को बाइक और बंदूक के साथ घूमते देख ग्रामीणों को शक हुआ। सुरक्षावश उन्होंने तुरंत वन विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही डौंडी वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जंगल की घेराबंदी कर संदिग्ध युवकों को धर दबोचा। उनकी तलाशी के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने सबको सकते में डाल दिया।
गिरफ्तार किए गए दोनों युवक मथेना गांव के धनवा पारा के निवासी बताए गए हैं। तलाशी लेने पर उनके झोले से एक बाज, एक लावा, दो गिलहरी और एक दर्जन से ज्यादा मृत पक्षी बरामद हुए। साथ ही उनके पास से दो नई बंदूकें भी मिलीं, जिनका आमतौर पर इस्तेमाल बंदर भगाने के लिए होता है। किंतु, जांच में सामने आया कि इन हथियारों का इस्तेमाल जंगली पक्षियों और गिलहरियों के शिकार में किया गया था।
गांव के सरपंच जीवन नुरेटी और कोटवार नारायण सिंह देवदास ने बताया कि युवकों के झोले में पक्षियों की “पड़की” प्रजाति के बड़ी संख्या में शव बरामद हुए। विभाग ने सभी शवों को जब्त कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शिकार में कुल कितने लोग शामिल थे, या अन्य युवक भी इस अवैध गतिविधि का हिस्सा थे या नहीं। वन विभाग ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और इस बात की तफ्तीश चल रही है कि कहीं इस पूरे नेटवर्क में और लोग तो शामिल नहीं थे।
ग्रामीणों की सतर्कता ने इस पूरे मामले का भंडाफोड़ कर दिया। उन्होंने जब देखा कि युवक बार-बार बोरियों में कुछ रख रहे हैं और बंदूक को छुपाते जा रहे हैं, तो शक गहरा गया और आनन-फानन में वन विभाग को सूचना दी गई। आपको बता दें कि वन विभाग के जिम्मेदार जंगल में झांकते ही नहीं है इसलिए शिकारियों के हौंसले बुलंद हो गए हैं। जिससे वे हथियारों और बंदूकों से वन्य जीव का दिन दहाड़े खुलेआम शिकार कर रहे है। भला हो ग्रामीणों का जिन्होंने समय रहते डौंडी वन विभाग के जिम्मेदारों को गहरी नींद से जगाया।
डौंडी परिक्षेत्र के रेंजर ने इस संबंध में इतना ही कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जांच के बाद ही सभी तथ्य उजागर किए जा सकेंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा कि आने वाले दिनों में वन विभाग आरोपियों पर क्या कानूनी कदम उठाता है और इस क्षेत्र में ऐसे अवैध शिकार की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए क्या ठोस रणनीति बनाता है। जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में प्रशासन वन विभाग के साथ मिलकर जांच तेज करने और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश देता है।