छत्तीसगढ़ / बालोद

दल्ली राजहरा की मीर सालेहा अली ने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन परीक्षा में सफलता हांसिल कर बनी डॉक्टर

बालोद। जिले के दल्ली राजहरा से जुड़ी बड़ी खुशखबरी आई है जहां दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी मीर रफीक अली की बड़ी पुत्री मीर सालेहा अली ने मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर भारत में डॉक्टर बनने के लिए जरूरी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) परीक्षा उत्तीर्ण की है। मीर सालेहा ने ताजिकिस्तान की प्रतिष्ठित एविसेन्ना ताजिक स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी (एटीएसएमयू) से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है। जो ताजिकिस्तान का सबसे प्राचीन और उच्च रैंकिंग वाला सार्वजनिक चिकित्सा संस्थान है।

भारत के मेडिकल क्षेत्र में विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए एफएमजीई परीक्षा अनिवार्य होती है ताकि वे भारत में वैध रूप से डॉक्टर के तौर पर काम कर सकें। मीर सालेहा अली ने यह चुनौती 26 जुलाई 2025 को दी और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त 2025 को इसका परिणाम घोषित किया। इस बार परीक्षा में देशभर से लगभग 37,207 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था जिनमें से लगभग 7,880 उम्मीदवार सफल हुए हैं। परीक्षा में उत्तीर्ण प्रतिभागियों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) या संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल से पंजीकरण देकर डॉक्टर के रूप में कार्य करने का अधिकार मिलता है।

मीर सालेहा अली की इस उपलब्धि से दल्ली राजहरा के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। चिखलकसा स्थित सरकारी अस्पताल में कार्यरत मीर खालिदा अली ने अपनी बड़ी बेटी मीर सालेहा अली के डॉक्टर बनने पर खुशी और गर्व है। साथ ही न्यू अज्जू किराया भंडार के मीर जुनैद अली ने अपनी बड़ी बहन को डॉक्टर बनने पर हार्दिक बधाई दी और उनकी सफलता पर गर्व जताया। साथ ही, शहर के गणमान्य नागरिक और अन्य लोगों ने भी उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को सराहा है और उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

यह सफलता न केवल मीर सालेहा अली के परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे दल्ली राजहरा क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बन गई है। विदेशी विश्वविद्यालय से उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा हासिल करने के बाद भी भारत में चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखने के लिए आवश्यक परीक्षा को पार करना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। मीर सालेहा की मेहनत और लगन यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

इस सफलता ने जिले सहित आसपास के युवाओं में भी विदेश से मेडिकल शिक्षा लेकर भारत में सेवा करने की प्रेरणा पैदा की है। दल्ली राजहरा की यह बेटी अब क्षेत्र की उन चुनिन्दा डॉक्टरों में शुमार हो गई है जिन्होंने विदेश से डॉक्टर बनने की पढ़ाई पूरी की और भारत में अपनी काबिलियत साबित की।

मीर सालेहा अली की मेहनत व सफलता पूरे समुदाय के लिए गर्व और खुशी का विषय है, जो आगे भी और अधिक युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करेगी। उनके परिवार और शहरवालों की तरफ से उन्हें भविष्य में और अधिक सफलताओं की शुभकामनाएं दी जा रही हैं।

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