छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

निजी डबरी निर्माण से ग्रामीणों को मिला दोहरा लाभ

 मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन से बढ़ी आमदनी, आत्मनिर्भर बना किसान परिवार 


कवर्धा , 
कबीरधाम जिले के ग्राम पंचायत मड़मड़ा अंतर्गत एक किसान ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अपने खेत में निजी डबरी का निर्माण कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। डबरी ने किसान के जीवन में न केवल जल-संरक्षण का साधन बनाया बल्कि मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन के माध्यम से उसकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया है।

डबरी निर्माण से मिली बहुउपयोगी सुविधा
मनरेगा योजना वर्ष 2017-18 में निर्मित यह निजी डबरी ग्राम मड़मड़ा के किसान के खेत में बनाई गई। पहले जहां खेत में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं था, वहीं अब डबरी में वर्षा जल संग्रहण से सालभर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है। इससे आसपास की दलहन, तिलहन और सब्जी फसलें भी लहलहा रही हैं।

 मत्स्य पालन बना अतिरिक्त आय का साधन

डबरी में विभिन्न प्रजातियों की मछलियां जैसे कतला, रोहू, मृगाल आदि का पालन कर किसान ने अतिरिक्त आमदनी का नया स्रोत विकसित किया है। मछली पालन से प्राप्त लाभ से किसान अपने परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में इस पहल ने अन्य किसानों को भी मत्स्य पालन की ओर प्रेरित किया है।

 डबरी के किनारे सब्जी उत्पादन से बढ़ा पोषण और लाभ

डबरी के आसपास की नमी का उपयोग कर किसान ने लौकी, भिंडी, बैंगन जैसी मौसमी सब्जियों की खेती शुरू की है। इससे घर की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ बाजार में बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित की जा रही है।

 ग्रामीण विकास का सशक्त माध्यम बना डबरी निर्माण

कबीरधाम जिले में इस प्रकार की निजी डबरी निर्माण योजना ने जल संरक्षण, मत्स्य पालन, और सब्जी उत्पादन को एक साथ जोड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। इससे किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और जिले में ‘एक डबरी – अनेक लाभ’ का सफल मॉडल स्थापित हुआ है।

कबीरधाम जिले में डबरी निर्माण जैसे छोटे मगर प्रभावी प्रयासों ने ग्रामीणों के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है। यह पहल न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का उत्कृष्ट उदाहरण भी बन चुकी है।

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