छत्तीसगढ़ / बिलासपुर

टीईटी अनिवार्यता खत्म करने की मुहिम: सर्व शिक्षक संघ सांसदों को सौंपेगा ज्ञापन

 बिलासपुर । सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षकों के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद देशभर में शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। इस आदेश के अनुसार, अब पदोन्नति केवल उन्हीं शिक्षकों को मिलेगी जिन्होंने टीईटी पास किया है। साथ ही, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से अधिक बची है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा — अन्यथा उनकी नौकरी पर भी संकट आ सकता है। हालांकि, जिनकी सेवा अवधि पांच साल से कम है, उन्हें कोर्ट ने छूट दी है, लेकिन ऐसे शिक्षक प्रमोशन के पात्र नहीं होंगे।

सांसदों तक पहुंचाएंगे मुद्दा
इस निर्णय से शिक्षकों में असंतोष फैल गया है। कई राज्यों में शिक्षक संगठन इस अनिवार्यता को हटाने की मांग कर रहे हैं। इसी कड़ी में सर्व शिक्षक संघ ने इस मुद्दे को संसद तक पहुंचाने का फैसला लिया है। संघ छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंपकर उनसे आग्रह करेगा कि वे संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएं और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act) की धारा 23 में संशोधन के लिए पहल करें।

सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय ने बताया कि तमिलनाडु समेत कई राज्य सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। कोर्ट ने इस मामले को अब बड़ी बेंच के पास भेजा है, जहां विस्तृत चर्चा होगी। पाण्डेय ने कहा कि शिक्षक का अनुभव ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। जो शिक्षक वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता का आकलन सिर्फ एक परीक्षा से करना उचित नहीं है।

संघ का मानना है कि यदि केंद्र सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम में आवश्यक संशोधन करती है, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उपजी स्थिति स्वतः सुलझ सकती है। इसके लिए संघ ने कानूनी विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया है।

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