पीएम-आशा योजना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
उप संचालक कृषि ने किया उपार्जन केंद्रों व मॉडल खेतों का व्यापक निरीक्षण
बेमेतरा । कलेक्टर रणबीर शर्मा के मार्गदर्शन मे शासन की अति महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आशा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से आज उप संचालक कृषि द्वारा जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों का व्यापक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रत्येक केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, किसानों की आवक, मक्का एवं अन्य उपज की स्थिति तथा प्रचार-प्रसार गतिविधियों की समीक्षा की।
9 उपार्जन केंद्रों का दौरा—किसानों को योजना से जोड़ने निर्देश
थानखमरिया, थेलकाडीह, देवरबीजा, साजा सहित जिले में चिन्हित 9 उपार्जन केंद्रों में पहुँचकर उप संचालक कृषि ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पीएम-आशा योजना के लाभों का अधिकतम प्रचार-प्रसार किया जाए, किसानों को समर्थन मूल्य, भावांतर भुगतान प्रक्रिया एवं पंजीयन की विधि के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए, अधिक से अधिक किसानों को उपार्जन केंद्रों तक लाकर उपज विक्रय हेतु प्रेरित किया जाए।इसी क्रम में संबंधित केंद्रों के प्रांगण में पीएम आशा योजना का सूचना फ्लेक्स समिति सदस्यों एवं किसानों की उपस्थिति में चस्पा किया गया, ताकि किसान सरलता से योजना की जानकारी प्राप्त कर सकें।
नेचुरल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत जैविक खाद उत्पादन का निरीक्षण
उप संचालक कृषि ने ग्राम चिखली एवं कुटरु में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु स्थापित जैविक खाद इकाइयों का बारीकी से निरीक्षण किया। यहाँ उन्होंने कृषि सखियों एवं किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (वेर्मिकम्पोस्ट /जीवमृत इत्यादि) तैयार करने, इसके उपयोग की सही विधि, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में इसके प्रभाव, तथा लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल लागत को कम करती है, बल्कि भूमि की सेहत, पर्यावरण और उत्पाद की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार लाती है।
पराली न जलाने का अनुरोध—वैकल्पिक प्रबंधन पर विशेष जोर
भ्रमण के दौरान खेतों में कार्य कर रहे किसानों से बातचीत करते हुए उप संचालक कृषि ने पराली जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान, मिट्टी के जीवांश नष्ट होने के खतरे के बारे में समझाया। उन्होंने किसानों को पराली को भूमि में दबाने, कम्पोस्ट बनाने, मल्चिंग, तथा गौ-चारण उपयोग जैसे विकल्प अपनाने हेतु प्रेरित किया। पूरे निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी, सहायक संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, तथा संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उपस्थित रहे एवं प्रत्येक गतिविधि का स्थल पर समन्वय किया।
जिले में कृषि विभाग का सतत प्रयास
कृषि विभाग द्वारा किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के उपयोग, प्राकृतिक खेती के विस्तार और पराली प्रबंधन को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उप संचालक कृषि ने कहा कि विभाग का उद्देश्य है हर किसान को योजनाओं का पूरा लाभ मिले, फसल का उचित मूल्य प्राप्त हो और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा दिया जाए। यह निरीक्षण अभियान आगामी दिनों में भी जिले के अन्य ग्रामों और केंद्रों में जारी रहेगा।