छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

पंडरिया विधायक भावना बोहरा के गृह ग्राम रणवीरपुर में सीसी रोड फटा, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

उत्कृष्ट विधायक का संकल्प, सिस्टम की दरार!

कवर्धा / स.लोहारा छत्तीसगढ़ विधानसभा में उत्कृष्ट विधायक के सम्मान से नवाजी गईं पंडरिया विधायक भावना बोहरा विकास को लेकर अपने संकल्प, संवेदनशीलता और जनहितकारी योजनाओं के लिए जानी जाती हैं। निःशुल्क एंबुलेंस सेवा हो, बेटियों की शिक्षा के लिए निःशुल्क बस सुविधा, कोचिंग व्यवस्था या ग्रामीण अंचल के लिए मूलभूत सेवाएं—भावना बोहरा ने विकास को राजनीति नहीं, कर्तव्य के रूप में स्थापित किया है।

लेकिन इसी विकास यात्रा के बीच, एक कड़वी सच्चाई सामने आई है—और वह भी उनके गृह ग्राम रणवीरपुर से।

पंचायत भवन प्रांगण में करोड़ों की विभिन्न योजनाओं के तहत बनाए गए सीसी रोड में भारी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। यह दरारें केवल कंक्रीट में नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी की जिम्मेदारी में भी गहरी दरार का संकेत देती हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि—

 किसी भी निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना पटल मौजूद नहीं है

 लागत, स्वीकृति वर्ष, एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारी अदृश्य हैं

 गुणवत्ता नियंत्रण का कोई प्रमाण स्थल पर नहीं

यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब मामला उत्कृष्ट विधायक के गृह ग्राम से जुड़ा हो, जहां विकास कार्यों की निगरानी आदर्श उदाहरण बननी चाहिए थी।

स्थानीय ग्रामीणों में चर्चा है कि जब विधायक खुद विकास को लेकर इतनी प्रतिबद्ध हैं, तो फिर सवाल यह उठता है कि—

 क्या विभागीय अफसरों और ठेकेदारों ने उनकी छवि को ढाल बनाकर लापरवाही बरती।

 क्या तकनीकी स्वीकृति केवल कागजों तक सीमित रह गई।

 क्या जिम्मेदार इंजीनियरों ने मौके पर गुणवत्ता जांच की भी या नहीं।

यह तस्वीर साफ बताती है कि जनप्रतिनिधि का विजन ईमानदार हो सकता है, लेकिन यदि क्रियान्वयन तंत्र कमजोर और जवाबदेही विहीन हो, तो विकास भी सवालों के घेरे में आ जाता है।

अब यह मामला केवल एक सड़क या पंचायत भवन का नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर  सवाल खड़ा करता है—

 जब उत्कृष्ट विधायक के गृह ग्राम में गुणवत्ता से समझौता हो सकता है,

 तो बाकी ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी।

जनता की अपेक्षा है कि विधायक भावना बोहरा अपने उसी सख्त, संवेदनशील और जवाबदेह नेतृत्व के अनुरूप

 इस निर्माण की उच्च स्तरीय जांच,

 दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई,

और भविष्य में पारदर्शी निर्माण व्यवस्था सुनिश्चित करेंगी।

क्योंकि विकास का असली सम्मान पुरस्कार से नहीं, गुणवत्ता से होता है।

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