छत्तीसगढ़ / दुर्ग

मध्यस्थता राष्ट्र के लिए प्रधान जिला-सत्र न्यायाधीश ने लीं तीन महत्वपूर्ण बैठकें

दुर्ग -  राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली (नालसा) एवं एमसीपीसी के दिशा-निर्देशन में संचालित "मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0" अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन एवं सफलता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग द्वारा जिला न्यायालय के सभागार में तीन पृथक-पृथक महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया।

प्रथम बैठक में जिला अधिवक्ता संघ की कार्यकारिणी के सम्मानित पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में अधिवक्ताओं की भूमिका, प्रकरणों को मध्यस्थता हेतु चिन्हित किए जाने, पक्षकारों को मध्यस्थता के लाभों से अवगत कराने तथा अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।

द्वितीय बैठक उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष के साथ आयोजित की गई, जिसमें उपभोक्ता विवादों के शीघ्र, सौहार्दपूर्ण एवं सहमति-आधारित निराकरण हेतु मध्यस्थता की उपयोगिता पर चर्चा की गई तथा उपयुक्त प्रकरणों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित किए जाने की कार्ययोजना पर सहमति बनी।

तृतीय बैठक में मध्यस्थ अधिवक्ताओं के साथ संवाद स्थापित किया गया, जिसमें मध्यस्थता की गुणवत्ता, निष्पक्षता, समयबद्धता तथा व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार किया गया। साथ ही मध्यस्थ अधिवक्ताओं को अधिक से अधिक प्रकरणों में प्रभावी भूमिका निभाने हेतु प्रेरित किया गया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा अपने संबोधन में कहा गया कि मध्यस्थता न्याय प्राप्ति का एक प्रभावी, त्वरित एवं मानवीय माध्यम है, जिससे न केवल न्यायालयों पर लंबित मामलों का भार कम होता है, बल्कि पक्षकारों के मध्य सौहार्दपूर्ण संबंध भी बने रहते हैं। अभियान की सफलता हेतु सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

बैठकों के अंत में सभी प्रतिभागियों द्वारा “मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0" अभियान को सफल बनाने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया गया। इस अवसर पर स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत की अध्यक्ष एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उपस्थित रहे।

 

 

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