प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं मनरेगा के सहयोग से बदली रूखमणी बाई गोड़ की जिंदगी
धमतरी - जिले के धमतरी विकासखण्ड के ग्राम पंचायत कण्डेल निवासी श्रीमती रूखमणी बाई गोड़, उम्र लगभग 65 वर्ष, संघर्ष, धैर्य और आत्मसम्मान की जीवंत मिसाल हैं। जीवन की कठिनतम परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा किंतु शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं विशेषकर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), महतारी वंदन योजना तथा खाद्य सुरक्षा योजना ने उनके जीवन को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुखमय बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
श्रीमती रूखमणी बाई गोड़ का विवाह ग्राम कुकरेल (विकासखण्ड नगरी) में हुआ था। विवाह के कुछ वर्षों बाद उनके जीवन में खुशियां आई और उन्हें दो बेटियों का सुख प्राप्त हुआ। परंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था। विवाह के मात्र छह वर्ष बाद उनके पति का अकस्मात निधन हो गया। पति की असमय मृत् यु ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। कम उम्र में विधवा होने के साथ-साथ दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. पति की मृत्यु के बाद रूखमणी बाई अपने दोनों बच्चों के साथ अपने मायके ग्राम कण्डेल लौट आई। मायके में भी स्थायी आवास की व्यवस्था नहीं थी इसलिए उन्हें किराये के मकान में रहकर जीवन यापन करना पड़ा। रोजी-रोटी के लिए उन्होंने खेतों में मजदूरी, निर्माण कार्यों में श्रम और अन्य दिहाड़ी कार्य किए। सीमित आय, बढ़ती महंगाई और बच्चों की परवरिश इन सभी चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई-लिखाई और पालन-पोषण में कोई कमी नहीं आने दी।
वर्ष 2003 में आबादी भूमि में उन्हें थोड़ी सी जगह मिली जहां उन्होंने कच्चा मकान बनाकर रहना शुरू किया। यह मकान मिट्टी की दीवारों और खपरैल-टिन की छत वाला था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता, दीवारें कमजोर हो जाती और सांप-बिच्छुओं का भय बना रहता। तेज आंधी-तूफान और बारिश के समय उन्हें हमेशा अनहोनी का डर सताता था। इसके बावजूद यही कच्चा मकान उनके लिए वर्षों तक आश्रय बना रहा।
कठिन परिस्थितियों के बावजूद रूखमणी बाई ने दोनों बेटियों की शादी सम्मानपूर्वक की। बेटियों के ससुराल जाने के बाद वह उसी कच्चे मकान में अकेली रहने लगी। बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक श्रम करना कठिन होता जा रहा था परंतु जीवन की आवश्यकताओं के लिए उन्हें मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता था। वर्ष 2024-25 में रूखमणी बाई गोड़ का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की सूची में शामिल हुआ और उन्हें पक्का आवास स्वीकृत हुआ। यह उनके जीवन का एक ऐतिहासिक मोड़ था। वर्षों से जिस पक्के मकान का सपना उन्होंने देखा था वह अब साकार होने जा रहा था। आवास स्वीकृति के बाद किश्तें प्राप्त हुईं जिससे उन्होंने विधिवत रूप से आवास निर्माण प्रारंभ कराया।
आवास निर्माण के दौरान मनरेगा के तहत उन्हें मजदूरी का भी सहयोग मिला। इससे न केवल उनके आवास निर्माण में गति आई उन्हें कुछ अतिरिक्त आय भी प्राप्त हुई जिससे निर्माण संबंधी अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति संभव हो सकी। मनरेगा ने उन्हें आत्मनिर्भरता का अहसास कराया और सम्मानजनक आजीविका प्रदान की। अब उनके पास मजबूत दीवारों, पक्की छत और सुरक्षित दरवाजों वाला घर है। बरसात के दिनों में पानी टपकने की समस्या से मुक्ति मिल गई है। अब उन्हें सांप-बिच्छुओं और प्राकृतिक आपदाओं का भय नहीं सताता। यह घर उनके लिए केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का प्रतीक है। प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ-साथ रूखमणी बाई को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह राशि - 1000 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो रही है जिससे उनकी दैनिक आवश्यकताओं में सहूलियत मिलती है। इसके अतिरिक्त खाद्य विभाग के माध्यम से उन्हें प्रतिमाह चावल भी प्राप्त होता है जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
अपने नए पक्के मकान में बैठकर रूखमणी बाई भावुक होकर कहती हैं मैंने जीवनभर मजदूरी की लेकिन कभी नहीं सोचा था कि अपना पक्का घर बन पाएगा। सरकार ने जो दिया है वह मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब बरसात का डर नहीं रात में चौन की नींद आती है।
वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की योजनाओं ने गरीबों और बेसहारा लोगों को सम्मान के साथ जीने का अवसर दिया है।