छत्तीसगढ़ / धमतरी

दीदी के गोठ श्रवण कार्यक्रम दीदियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी

धमतरी - जिले के विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम दोनर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत सद्भावना महिला संकुल स्तरीय संगठन द्वारा “दीदी के गोठ श्रवण कार्यक्रम” का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम की थीम “दीदियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी” रही, जिसमें स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अपने संघर्ष, सफल  ता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानियाँ साझा कीं।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समूह से जुड़ी दीदियों के अनुभवों को मंच देना, अन्य महिलाओं को प्रेरित करना तथा आजीविका, वित्तीय सशक्तिकरण और सामाजिक नेतृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इस अवसर पर विभिन्न ग्राम पंचायतों से आई महिला समूहों की सदस्यों ने अपनी जीवन यात्रा, समूह से जुड़ने के बाद आए सकारात्मक बदलाव, आयवृद्धि के प्रयास और परिवार व समाज में मिले सम्मान को आत्मीयता से प्रस्तुत किया।

दीदियों ने बताया कि पहले वे घरेलू सीमाओं तक सिमटी हुई थीं, परंतु बिहान योजना से जुड़ने के बाद बचत, ऋण प्रबंधन, स्वरोजगार, बैंक लिंकेज और प्रशिक्षण के माध्यम से वे आत्मनिर्भर बनीं। किसी ने सब्जी उत्पादन, किसी ने पशुपालन, तो किसी ने लघु व्यवसाय के जरिए नियमित आय अर्जित करने की कहानी साझा की। कई दीदियों ने यह भी बताया कि समूह से जुड़ने के बाद वे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर बेहतर निर्णय ले पा रही हैं।

दीदी के गोठ में संवाद का वातावरण अत्यंत सहज और प्रेरक रहा। अनुभव साझा करने के दौरान दीदियों ने आपसी सहयोग, अनुशासन और सामूहिक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया कि जब महिलाएं संगठित होती हैं तो वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की वाहक भी बनती हैं।

कार्यक्रम के दौरान संकुल स्तरीय संगठन की पदाधिकारियों ने संगठन की गतिविधियों, भविष्य की कार्ययोजना और आजीविका विस्तार से संबंधित जानकारियाँ दीं। उन्होंने दीदियों को नियमित बचत, समय पर ऋण चुकाने, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बाजार से जुड़ाव पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

अंत में उपस्थित सभी दीदियों ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इस प्रकार के श्रवण एवं संवाद कार्यक्रम आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ सीखने का सशक्त माध्यम हैं। दीदी के गोठ श्रवण कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब कहानियाँ खुद दीदियाँ सुनाती हैं, तो वे हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद और हौसले की नई राह बन जाती हैं।

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