शीतलहर एवं ठंड से बचाव के लिए सुरक्षा के उपाय
राजनांदगांव - जिले का तापमान दिन के समय 26 सेेल्सियस से कम और रात में 9 सेल्सियस से नीचे दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में ठंडी हवाओं का स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। शीतलहर का सबसे अधिक प्रभाव बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, दीर्घकालिक बीमारियों से पीडि़त व्यक्तियों एवं उच्च रक्तचाप वाले मरीजों पर पड़ता है। ठंड के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुडऩे से हृदय पर दबाव बन जाता है, जिससे हृदयघात, ब्रेन स्ट्रोक और अनियमित धड़कन जैसी समस्याएं हो सकती है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने किसी व्यक्ति में अत्यधिक ठिठुरन, शरीर अकडऩा, उंगलियों का पीला या सफेद होना, सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दे तो तत्काल नजदीकी चिकित्सक से संपर्क करने तथा नागरिकों को ठंड से बचाव के लिए स्वेटर, मोजे, दस्ताने और गर्म कपड़ों का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, मौसम के अनुरूप वस्त्र पहने, अनावश्यक रूप से ठंड में बाहर नहीं निकलने तथा किसी भी स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र या टोल-फ्र ी नंबर 104 पर संपर्क करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि शरीर को गर्म रखने के लिए गर्म तरल पदार्थों का सेवन करते रहे। उन्होंने आग तापते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बंद कमरे में कोयला एवं लकड़ी नहीं जलाने कहा है, क्योंकि इससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस जहरीली जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने बताया की सभी स्वास्थ्य संस्थानों में ठंड से पीडि़त मरीजों के उपचार के लिए पृथक बेड आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए है।