उदका पंचायत में 15वें वित्त की राशि के आहरण पर उठे सवाल**--निष्पक्ष जांच को लेकर शिकायतकर्ताओं में संशय--
कबीरधाम |
2026-08-07 18:22:13
--सरपंच-सचिव पर शासकीय राशि के दुरुपयोग का आरोप--जांच दल पर दबाव होने की भी चर्चा-
पंडरिया/ जिला कबीरधाम।जनपंद पंचायत पंडरिया के ग्राम पंचायत उदका में 15वें वित्त आयोग की राशि के आहरण और उसके उपयोग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंचायत के उपसरपंच महेन्द्र कुमार साहू सहित पंचों द्वारा की गई शिकायत में निर्वाचित सरपंच श्रीमती ललिता मरकाम एवं पंचायत सचिव सीमा मार्को पर पंचायत की शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग और पंचायत के सदस्यों को विश्वास में लिए बिना राशि आहरित किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। �
उदका ग्राम पंचायत में
विकास कार्यों के नाम पर राशि आहरण का आरोप
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पंचायत में सड़क दुरुस्तीकरण, ग्राम पंचायत भवन की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, हैंडपंप, बोर खनन, सीसी रोड निर्माण, नाली सफाई तथा ग्राम में स्वच्छता सहित विभिन्न कार्यों के लिए 15वें वित्त आयोग की राशि का आहरण किया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इनमें से कई कार्य पंचायत के माध्यम से कराए जाने का दावा किया गया, जबकि मौके पर कार्य होने अथवा कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पंचायत के पंचों द्वारा आय-व्यय से संबंधित जानकारी मांगे जाने पर कथित रूप से स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पंचायत की राशि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई।
करीब 10 लाख रुपये की राशि जांच के घेरे में
शिकायत में पंचायत के सरपंच एवं सचिव द्वारा 15वें वित्त आयोग की करीब 10 लाख रुपये की राशि आहरित किए जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि उक्त राशि से पंचायत में दर्शाए गए सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि दस्तावेजों में दर्शाए गए कार्य मौके पर नहीं पाए जाते हैं या कार्यों में अनियमितता मिलती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच दल पर दबाव होने की चर्चा, निष्पक्ष जांच पर नजर
इधर, स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि मामले की जांच कर रहे जनपद पंचायत स्तरीय जांच दल पर स्थानीय सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं के दबाव की बात सामने आ रही है। हालांकि इस संबंध में किसी अधिकारी या जांच दल की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में शिकायतकर्ताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या जांच वास्तव में निष्पक्ष और दबावमुक्त तरीके से हो पाएगी।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच दल द्वारा मौके पर पहुंचकर प्रत्येक कार्य का भौतिक सत्यापन, संबंधित दस्तावेजों की जांच, भुगतान एवं माप पुस्तिका सहित आवश्यक अभिलेखों का परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
**तत्कालीन पंचायत सचिव की भूमिका भी सवालों के घेरे में**
पूरे मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर भी शिकायतकर्ताओं द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि जिस अवधि में संबंधित राशि का आहरण और कार्यों से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए, उस समय पदस्थ सचिव की भूमिका की भी जांच आवश्यक है। **शिकायतकर्ताओं ने मांग की है **कि केवल वर्तमान पदाधिकारियों तक जांच सीमित न रखकर संबंधित अवधि में पंचायत के वित्तीय लेन-देन और कार्यों से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए।
फर्जी बिल और भुगतान की भी जांच की मांग
शिकायत में पंचायत द्वारा कराए गए बताए जा रहे कार्यों के संबंध में बिल, वाउचर, भुगतान अभिलेख एवं कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यदि दस्तावेजों में दर्शाए गए कार्य वास्तविक रूप से नहीं हुए हैं, तो शासकीय राशि के दुरुपयोग की स्थिति सामने आ सकती है।
कलेक्टर और जनपद सीईओ को भी भेजी गई शिकायत
शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर कबीरधाम, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत पंडरिया को भी सूचनाार्थ दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित राशि के आगे के आहरण अथवा उपयोग पर रोक लगाई जाए और नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
अब शिकायतकर्ताओं की नजर जनपद पंचायत के जांच दल की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई और शासकीय राशि की वसूली का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो वास्तविक स्थिति भी जांच रिपोर्ट के माध्यम से स्पष्ट होगी।