सेवा संकल्प अभियानः सेवा की कहानीः परंपरागत गौपालन को आधुनिक तकनीक का साथ, राजनाथ ने खड़ा किया सफल डेयरी व्यवसाय
कृत्रिम गर्भाधान से घर पर ही तैयार कर रहे उन्नत नस्ल की बछिया, अब बाहर से गाय खरीदने की जरूरत हुई कम
40 से 50 गायों से प्रतिदिन 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन, डेयरी बनी परिवार की मजबूत आजीविका
अम्बिकापुर 23 सितम्बर 2026
पीढ़ियों से चले आ रहे गौपालन को आधुनिक पशुपालन तकनीक और पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन से जोड़कर लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत दोरना के रहने वाले राजनाथ यादव ने इसे सफल डेयरी व्यवसाय का रूप दिया है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत उनकी ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि उन्नत नस्ल, कृत्रिम गर्भाधान और बेहतर पशु प्रबंधन के माध्यम से परंपरागत पशुपालन को आय के मजबूत साधन में बदला जा सकता है।
राजनाथ यादव बताते हैं कि उनके परिवार में पिता के समय से ही गौ पालन किया जाता रहा है। पहले परिवार स्थानीय नस्ल की गाय और भैंस का पालन करता था। समय के साथ उन्होंने पशुपालन में नई तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और एचएफ नस्ल की गायें खरीदीं। इसके बाद पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से उन्नत नस्ल के सीमन के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान कराना शुरू किया। इसका परिणाम यह हुआ कि अब वे अपने डेयरी फार्म में ही बेहतर नस्ल की बछिया तैयार कर रहे हैं।
नस्ल सुधार ने बदली डेयरी की तस्वीर
राजनाथ के बताते हैं कृत्रिम गर्भाधान से अच्छी नस्ल की बछिया तैयार होने के कारण अब उन्हें बार-बार बाहर से गाय खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ डेयरी संचालन में होने वाले खर्च को नियंत्रित करने में भी मदद मिली है। वर्तमान में उनके पास लगभग 40 से 50 गायें हैं।
उन्होंने बताया कि डेयरी में प्रतिदिन लगभग 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। बेहतर दुग्ध उत्पादन से परिवार को नियमित आमदनी मिल रही है। राजनाथ के अनुसार डेयरी व्यवसाय से उन्हें सालाना लगभग 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।
पशु चिकित्सा विभाग का मार्गदर्शन बना सहारा
राजनाथ बताते हैं कि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समय-समय पर उनके पशुओं की देखरेख के लिए पहुंचते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं मार्गदर्शन भी दिया जाता है। विभागीय सहयोग से बेहतर नस्ल की बछिया तैयार होने से उनके डेयरी व्यवसाय को निरंतर आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
उन्नत किसान के रूप में मिला सम्मान, बढ़ा उत्साह
राजनाथ ने कहा कि पशुधन विकास और डेयरी गतिविधियों को मिल रहे प्रोत्साहन से पशुपालकों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही पशु चिकित्सा विभाग द्वारा समय-समय पर दी जा रही जानकारी, मार्गदर्शन और सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया।
परंपरा से व्यवसाय तक, आत्मनिर्भरता की राह
सेवा संकल्प अभियान के तहत राजनाथ यादव की यह ‘सेवा की कहानी’ परंपरागत गौ पालन में आधुनिक तकनीक के उपयोग से आए बदलाव की तस्वीर पेश करती है। उन्नत नस्ल, कृत्रिम गर्भाधान, बेहतर पशु प्रबंधन और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे गौपालन आज उनके परिवार के लिए एक व्यवस्थित और लाभकारी डेयरी व्यवसाय बन गया है।