छत्तीसगढ़ / दंतेवाड़ा

डिजिटल युग में घटता संवाद मानवीय संबंधों एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय डॉ. लहरी

 दंतेवाड़ा । डिजिटल क्रांति और स्मार्टफोन के बढ़ते प्रयोग के बीच लोगों के बीच प्रत्यक्ष संवाद में कमी मानवीय संबंधों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। सहायक प्राध्यापक डॉ. दिनेश कुमार लहरी ने बताया कि अध्ययनों के अनुसार वर्ष 2005 में लोग प्रतिदिन औसतन 16 हजार शब्द बोलते थे, जो वर्ष 2019 तक घटकर करीब 12 हजार शब्द रह गए। संवाद में यह कमी मुख्यतः पड़ोसियों, सहकर्मियों और अपरिचित लोगों से होने वाली सहज बातचीत में देखी गई है।

डॉ. लहरी ने कहा कि मानव समाज की नींव परस्पर संवाद और भावनाओं के आदान-प्रदान पर टिकी है। आसपास के लोगों से बातचीत करने से तनाव कम होने के साथ सुरक्षा, अपनत्व और सामाजिक जुड़ाव की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर समय बिताने के बजाय लोगों को मोबाइल स्क्रीन से बाहर निकलकर परिवार, पड़ोस और कार्यस्थल पर अधिक से अधिक संवाद स्थापित करना चाहिए।

 

 

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