छत्तीसगढ़ / गरियाबंद

खेल-खेल में कचरा प्रबंधन सीख रहे बच्चे, इको क्लब ने अपनाया अनूठा तरीका* स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत रंगीन डस्टबिन और रोचक गतिविधियों से सिखाया जा रहा कचरे का वर्गीकरण, ई-वेस्ट संग्रहण में भी जुटे विद्यार्थी

राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :- स्वच्छता का पाठ जब खेल और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाया जाए, तो सीखना आसान होने के साथ-साथ रुचिकर भी बन जाता है। इसी सोच के साथ शासकीय रामबिशाल पांडेय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (सेजेस राजिम) में विद्यार्थियों को कचरे के सही वर्गीकरण और प्रबंधन की जानकारी देने के लिए अनूठी पहल की जा रही है। यहां बच्चे केवल स्वच्छता के बारे में सुन नहीं रहे, बल्कि स्वयं कचरे की पहचान कर उसे सही डस्टबिन में डालने का अभ्यास भी कर रहे हैं। इस गतिविधि के माध्यम से उनमें स्वच्छता, जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अच्छी आदतें विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यालय की इको क्लब प्रभारी समीक्षा गायकवाड़ ने बताया कि स्वच्छता ही सेवा एवं स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यालय में कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में छोटे बच्चों को कचरे का उचित प्रबंधन सिखाना और उनमें शुरुआत से ही अच्छी आदतें विकसित करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। बच्चों को केवल समझाने के बजाय खेल-खेल में सिखाने से वे बातों को आसानी से समझते हैं और उन्हें अपने व्यवहार में भी अपनाते हैं। इसी उद्देश्य से यह गतिविधि कराई जा रही है, जिसमें बच्चे मनोरंजन के साथ कचरे का वर्गीकरण, सही डस्टबिन का चयन और कचरे के उचित निपटान के तरीके सीख रहे हैं। गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों को छोटी-छोटी टोलियों में बांटा जाता है। विद्यालय परिसर में अलग-अलग रंगों के डस्टबिन रखे जाते हैं और बच्चों को विभिन्न प्रकार के कचरे के उदाहरण देकर उनकी पहचान करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद वे संबंधित कचरे को निर्धारित डस्टबिन में डालते हैं। इस अभ्यास में बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं और एक-दूसरे से सीखते हुए कचरे को अलग-अलग रखने का महत्व समझते हैं।बच्चों को फूल-पत्तियां, फलों के छिलके और खराब खाद्य पदार्थ जैसे गीले कचरे की पहचान कराई जाती है। वहीं, बिस्किट-चॉकलेट के रैपर, प्लास्टिक की झिल्लियां और बोतलों जैसे सूखे कचरे को अलग रखने का अभ्यास कराया जाता है। पुराने चार्जर और इस्तेमाल किए जा चुके सेल के उदाहरणों से इलेक्ट्रॉनिक कचरे यानी ई-वेस्ट के बारे में बताया जाता है। सैनिटरी वेस्ट को अन्य कचरे से अलग रखने और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका सुरक्षित निपटान करने की जानकारी भी दी जाती है। इस पहल में विद्यालय के इको क्लब के विद्यार्थी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे छोटे बच्चों को कचरे की पहचान करने, उसका वर्गीकरण करने और सही डस्टबिन चुनने में मदद करते हैं। इससे छोटे बच्चों को साथियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलता है, वहीं इको क्लब के विद्यार्थियों में नेतृत्व, सहयोग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होती है। विद्यालय में ई-वेस्ट के पृथक संग्रहण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थी अपने घरों से अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामान लाकर इस अभियान में योगदान दे रहे हैं। इस कार्य में पालकों का सहयोग भी मिल रहा है। एकत्रित ई-वेस्ट को सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण के लिए अधिकृत संस्था को सौंपने की योजना है, ताकि इलेक्ट्रॉनिक कचरा सामान्य कचरे में मिलकर पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए। विद्यालय की यह पहल बच्चों को स्वच्छता का महत्व समझाने के साथ-साथ उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। खेल-खेल में सीखी जा रही ये छोटी-छोटी आदतें बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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