मनोरंजन

एण्डटीवी के कलाकारों ने बताए अपने शहरों के पसंदीदा विंटर डिलाइट्स!

   


मुंबई, दिसंबर 2025: सर्दियां शुरू होते ही गरमागरम, होम-स्टाइल खाना दिल और पेट- दोनों को खास सुकून देता है। एण्डटीवी के कलाकार, जो अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों में जगह बनाए हुए हैं, अपने शहरों के उन खास सर्दियों के पकवानों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें वे बेहद पसंद करते हैं। इनमें शामिल हैं - प्रियंवदा कांत (‘घरवाली पेड़वाली‘ की लतिका), योगेश त्रिपाठी (‘हप्पू की उलटन पलटन‘ के दरोगा हप्पू सिंह) और रोहिताश्व गौड़ (‘भाबीजी घर पर हैं‘ के मनमोहन तिवारी)। प्रियंवदा कांत, जो ‘घरवाली पेड़वाली‘ में लतिका का किरदार निभा रही हैं और दिल्ली से ताल्लुक रखती हैं, मुस्कुराते हुए बताती हैं, “दिल्ली की सर्दियां और खाना दोनों ही एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं! नाश्ते में तवे से उतरे गरमागरम परांठे, दोपहर में छोले- कुलचे या घी से भरा गाजर का हलवा-हर भोजन घर जैसा लगता है। मेरा सबसे फेवरेट है-मम्मी का बनाया सरसों का साग और मक्के की रोटी, ऊपर से सफ़ेद मक्खन। और दिल्ली का स्ट्रीट फूड तो सर्दियों में और भी लाजवाब हो जाता है-चाट, जलेबी और कुल्हड़ वाली चाय की बात ही कुछ और है। इन सबकी खुशबू और गर्माहट मुझे हमेशा दिल्ली की धुंध भरी ठंडी शामों में घरवालों के साथ बिताए उन सुकून भरे पलों की याद दिला देती है।”

 

योगेश त्रिपाठी, जिन्हें दर्शक ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ के दरोगा हप्पू सिंह के रूप में खूब पसंद करते हैं और जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, बताते हैं, “यूपी की सर्दियां मतलब भरपूर, देसी और दिल छू लेने वाला खाना। मुझे आज भी याद है-सुबह-सुबह घर में बनने वाली लिट्टी- चोखा, हरी सब्जियों का साग और ऊपर से लगा ताज़ा मक्खन। ठंड में मां गुड़ के परांठे और बेसन का हलवा बनाती थीं, जो उनका यह बताने का अंदाज था कि सर्दियां आ गई हैं। मूली, बथुआ, गाजर जैसी सब्जियां मौसम का खास स्वाद बढ़ा देती हैं। और हां, शाम की अदरक वाली चाय और परिवार के साथ अंगीठी के पास बैठकर इसे पीने का मज़ा ही अलग होता है। ये स्वाद आज भी ‘घर’ की याद दिलाते हैं।” रोहिताश्व गौड़, जोकि ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में मनमोहन तिवारी का रोल निभा रहे हैं और मूल रूप से शिमला के रहने वाले हैं, ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, “शिमला की सर्दियां और वहां का खाना-दोनों कमाल के होते हैं! बचपन में हम सिद्दू, मदरा और छा गोश्त जैसे पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन खाते थे, जो पौष्टिक, गरम और ठंड भगाने वाले होते हैं। मेरी सबसे प्यारी याद है-बुखारी (हीटर) के पास बैठकर राजमा चावल और साथ में घर का बना अचार खाना। जब बर्फ गिरती थी, तो मां ड्राई फ्रूट्स वाला मीठा चावल बनाया करती थीं, जो कटोरी में भरे प्यार की तरह होते थे! हिमाचली भोजन की सादगी और उसकी असली खुशबू हमेशा याद दिलाती है कि सबसे सुकून देने वाला खाना वही होता है, जो प्यार से बनाया जाए और अपने परिवार के साथ बैठकर खाया जाए।”

 

देखिये अपने पसंदीदा शोज-‘हप्पू की उलटन पलटन‘, रात 10 बजे और ‘भाबीजी घर पर हैं‘ रात 10ः30 बजे, हर सोमवार से शुक्रवार और ‘घरवाली पेड़वाली‘ बहुत जल्द सिर्फ एण्डटीवी पर!

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