किसानों को फसल सुरक्षा का संबल : ग्राम मड़ई में फसल बीमा पाठशाला का आयोजन
कृषि विभाग ने किसानों को दी फसल बीमा योजना, पंजीयन प्रक्रिया व दावे की जानकारी
बेमेतरा, 06 दिसम्बर 2025
कृषि विभाग द्वारा ग्राम मड़ई में किसानों के हित में फसल बीमा पाठशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के महत्व, लाभ, पंजीयन की प्रक्रिया, फसल कटाई प्रयोग (क्रॉप कटिंग), प्रीमियम भुगतान, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में दावे (क्लेम) दाखिल करने की विधि सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देना रहा। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि फसल बीमा योजना किसानों की सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं—जैसे अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, सूखा, कीट–रोग प्रकोप या अन्य अनियंत्रित परिस्थितियों में फसल क्षति होने पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। किसानों को समय पर बीमा करवाने, बैंक पासबुक, भू-अधिकार पत्र, पंजीयन रसीद तथा आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने की अपील की गई।
कृषि विशेषज्ञों ने फसल सलाह, मौसम आधारित खेती, वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग, जैविक खेती को प्रोत्साहन, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड, बीज उपचार, कीट प्रबंधन तथा सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
किसानों को यह भी बताया गया कि यदि फसल क्षति होती है, तो 72 घंटे के भीतर संबंधित पोर्टल या निकटतम कृषि कार्यालय में सूचना देना अनिवार्य है, जिससे उनका दावा निर्बाध रूप से स्वीकृत हो सके। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और उन्होंने फसल बीमा योजना से संबंधित प्रश्न पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान किया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि विभाग हमेशा किसानों के साथ है और किसी भी समस्या पर तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी।
फसल बीमा पाठशाला के सफल आयोजन में ग्रामीण कृषक मित्रों, कृषि सहायक, ग्रामीण स्तर के पदाधिकारियों तथा पंचायत प्रतिनिधियों का विशेष सहयोग रहा। यह कार्यक्रम किसानों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जोखिम रहित खेती के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
साल 2023 में किए गए जैव विविधता सर्वेक्षण के अनुसार यहां 104 मछलियों, 19 उभयचरों और 243 पक्षियों की प्रजातियां दर्ज की गईं। अक्टूबर से मार्च के बीच भारत, रूस, मंगोलिया, बर्मा, बांग्लादेश सहित कई देशों से हजारों प्रवासी पक्षी यहां आते हैं। इसी कारण गिधवा- परसदा परिसर छत्तीसगढ़ का एक लोकप्रिय बर्ड-वॉक और प्रकृति अध्ययन केंद्र बन गया है।

गिधवा-परसदा परिसर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है यहां नियमित रूप से आयोजित बर्ड वॉक, फॉरेस्ट ट्रेल और नेचर ट्रेल जैसी गतिविधियाँ। इन ट्रेल्स में विद्यार्थियों और आगंतुकों को पक्षियों, पौधों और अन्य प्रजातियों की पहचान सिखाई जाती है। वन विभाग के प्रशिक्षित मार्गदर्शकों द्वारा पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन के बारे में सरल और वैज्ञानिक जानकारी दी जाती है।



