धमतरी का औद्योगिक सूर्योदय
जीजामगांव और श्यामतराई से जगमगाएगा उद्योगों का नया सवेरा
अब धमतरी सिर्फ अन्नदाता नहीं, उद्यमदाता भी बनेगा
धमतरी, 17 अक्टूबर 2025

कभी सिर्फ अपनी हरियाली, जलस्रोतों और कृषि समृद्धि के लिए पहचाना जाने वाला धमतरी अब औद्योगिक क्रांति की नई पटकथा लिखने जा रहा है।राज्य शासन के दूरदर्शी दृष्टिकोण और जिला प्रशासन की सक्रियता के परिणामस्वरूप आज धमतरी को दो नए औद्योगिक पार्क – जीजामगांव और श्यामतराई – की ऐतिहासिक सौगात मिली है।
उद्योगों की नई धरती, नए अवसरों की खेती
धमतरी की भौगोलिक स्थिति इसे एक स्वर्ण अवसरों वाला ज़िला बनाती है। राजधानी रायपुर और औद्योगिक नगर दुर्ग-भिलाई की नज़दीकी इसे निवेश के लिए प्राकृतिक पसंद बनाती है।अब जब जीजामगांव और श्यामतराई में उद्योगों के नए केंद्र आकार लेंगे,तो स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर भी उसी गति से बढ़ेंगे जैसे खेतों में फसलें उगती हैं।
धमतरी जिले में एक मेगा फुड पार्क था। आज दो नये फुड पार्कों की सौगात मिली है। जीजामगांव और श्यामतराई। नये फुड पार्कों के ऑनलाइन होने के बाद कोई भी अप्लाई कर सकते हैं। कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने बताया कि श्यामतराई औद्योगिक पार्क को हर्बल पार्क की तरह विकसित करने की योजना है। वही जीजामागांव औद्योगिक पार्क भी अभनपुर से लगा होने की कारण काफी लोकप्रिय होगा और लाभ मिलेगा। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा कचना, छाती, गट्टासिल्ली, भालूझूलन, करेली बड़ी, ऐसी जगहों पर औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे नये आयाम बनेगें और रोजगार के अवसर मिलेंगा। छाती का प्रस्ताव भारत सरकार को बनाकर भेजा गया है ।
मेगा फूड पार्क – खेत से बाजार तक सीधी राह
धमतरी अब धान की नहीं, उद्योग की भी राजधानी बन रहा है। राज्य शासन द्वारा छाती और कचना में मेगा फूड पार्क की स्थापना की तैयारी चल रही है।यहाँ पर धान, दालें, सब्ज़ियाँ और फल आधुनिक तकनीक से प्रोसेस होकर सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचेंगे।यानी धमतरी के खेतों से उपजा स्वाद अब दुनिया के थालियों तक पहुंचेगा।
MSME क्लस्टर – छोटे उद्योग, बड़ा योगदान
जिले में पाँच इंडस्ट्री क्लस्टर बनाने की योजना है।
इन क्लस्टरों के माध्यम से छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को संगठित कर उन्हें नई पहचान दी जाएगी।यह न केवल स्थानीय उत्पादन को बढ़ाएगा, बल्कि ‘’मेड इन धमतरी ” को एक नई पहचान देगा।
भविष्य का औद्योगिक मानचित्र तैयार
छाती क्षेत्र में भारत सरकार को भेजा गया बड़े मिल का प्रस्ताव,कचना, गट्टासिल्ली, करेली बड़ी, भालूझूलन जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों का विकास ये सब मिलकर धमतरी को प्रदेश का अगला औद्योगिक हब बना देंगे।यह सिर्फ उद्योगों की बात नहीं, यह उस परिवर्तन की कहानी है जो रोज़गार, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का रास्ता बनाता है।
“धान से धन तक” की कहानी
धमतरी अब सिर्फ अन्नदाता नहीं रहेगा, बल्कि उद्यमदाता भी बनेगा।यह वह धरा है जो हरियाली से समृद्ध थी, अब औद्योगिकता से भी समृद्ध होगी।
यह बदलाव केवल फैक्ट्रियों के निर्माण का नहीं, बल्कि एक नये आत्मविश्वासी जिले के उदय का संकेत है ,धमतरी – जहाँ विकास बोया जाता है, और भविष्य फसल बनकर उगता है।
छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला अपनी भौगोलिक स्थिति, कृषि संपन्नता और संसाधनों की प्रचुरता के कारण औद्योगिक मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। राजधानी रायपुर और औद्योगिक नगरी दुर्ग-भिलाई के निकट होने से यह जिला निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के लिए अत्यंत उपयुक्त सिद्ध हो रहा है। शासन और प्रशासन के ठोस प्रयासों के चलते जिले में औद्योगिकीकरण की नई लहर दिखाई दे रही है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं बल्कि जिले की आर्थिक प्रगति को भी नई गति मिल रही है। 





मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी सदन योजना छत्तीसगढ़ को महिला-केंद्रित विकास का मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महतारी सदन केवल महिलाओं की तरक्की का आधार ही नहीं बनेगा, बल्कि यह पूरे प्रदेश की तरक्की का आधार बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महतारी सदन माताओं-बहनों की शक्ति, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया केंद्र होगा। महतारी सदन शिक्षा, कौशल और उद्यमिता के द्वार खोलेंगे। उन्होंने कहा कि इन सदनों में महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़कर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। माताएँ-बहनों के लिए महतारी सदन में सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, कृषि-आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसे अनेक कार्यक्रम चलाए जाएंगे।



जिले के किसानों और उद्यानिकी क्षेत्र के लिए यह गर्व का विषय है कि कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र कुरूद चर्रा परिसर में भूमि पर हाईटेक नर्सरी एवं किसान प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जा रहा है । स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजा गया है । इसके लिए सहायक संचालक लाइवली हुड श्री शैलेन्द्र गुप्ता,ज़िले के विभिन्न महाविद्यालयों से कैरियर काउंसिलिंग प्रभारीगणों के साथ NIT रायपुर तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के इनक्युबेशन सेंटर में विजिट कर वहाँ की कार्यप्रणाली, स्टार्टअप, इनोवेशन आईडिया को सही दिशा प्रदान करने के संबंध में पूर्ण जानकारी ली ।

इस परियोजना के शुभारंभ से जिले की उद्यानिकी को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अनेक अवसर उत्पन्न होंगे। प्रशिक्षण प्राप्त किसान न केवल अपने खेतों में उन्नत पद्धतियों का उपयोग कर सकेंगे, बल्कि स्वरोजगार के रूप में पौध उत्पादन, नर्सरी संचालन और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना भी कर सकेंगे। इस प्रकार यह केंद्र आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का माध्यम बनेगा।