छत्तीसगढ़ / दुर्ग

धन्नू के बनाए मटके बुझा रहे है लोगों की प्यास

 -मिट्टी के हुनर से हर दिन कमा रहे 2 से ढाई हजार रुपये

 

दुर्ग ।  एक कुम्हार के हाथों से गढ़ी मिट्टी की खुशबू आज पूरे प्रदेश में अपनी पहचान बना रही है। उसके बनाए मटके न केवल लोगों की प्यास बुझा रहे हैं, बल्कि गर्मी में ठंडक का सुकून भी दे रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर ऐसे ही मेहनतकश कारीगरों को सम्मान देते हुए मंत्री  गजेन्द्र यादव ने इलेक्ट्रिक चाक वितरित किए, जिससे उनके काम को नई रफ्तार मिलेगी। इसी कड़ी में दुर्ग निवासी 27 वर्षीय धन्नू राम चक्रधारी एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आए हैं। वे उन हजारों कुम्हारों में से एक हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हुनर और मेहनत से जीवन की राह बना रहे हैं। कम उम्र में ही पिता का साया उठ जाने के बाद धन्नू राम ने हार नहीं मानी। परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुए उन्होंने अपने पुश्तैनी कुम्हार काम को आगे बढ़ाया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह से मिट्टी के बर्तन बनाने को अपना व्यवसाय बना लिया और आज इसी से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।  धन्नू ने बताया कि वे सिरसा से मिट्टी लाते हैं, उसे अच्छी तरह तैयार कर पारंपरिक बर्तन जैसे गुल्लक, मटका और सुराही बनाते हैं। उनके बनाए बर्तन दुर्ग के इंदिरा मार्केट में बिकते हैं, जहां से उन्हें रोजाना लगभग 2 से ढाई हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। सालाना उनकी कमाई करीब 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंचती है, जो उनके परिवार की आजीविका का मुख्य आधार है।

      गर्मी के मौसम में मटका और सुराही की मांग बढ़ने से उनका काम और बेहतर चल रहा है। इस कार्य में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता है। उनके परिवार में उनकी मां और एक बेटा है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहते हैं कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में हर वर्ग के लोगों को रोजगार मिल रहा है। मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं।

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