छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

बरसात में 19.25 लाख की पुलिया, कागजों में निर्माण पूरा, फर्जी बिलों से सरकारी राशि बंदरबांट का आरोप

कवर्धा 

 जिला खनिज न्यास योजना के तहत ग्राम पंचायत बोदा-03 अंतर्गत ग्राम सिली के हुरेसा नाला (झेंगल के खेत के पास) लगभग 19.25 लाख रुपए की लागत से निर्मित पुलिया अब गंभीर विवादों में घिर गई है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों ने निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं की परतें खोल दी हैं। दस्तावेजों से संकेत मिल रहे हैं कि स्वीकृत प्राक्कलन, निर्माण मानक और शासकीय नियमों को दरकिनार कर कार्य को अंजाम दिया गया।

सबसे बड़ा सवाल निर्माण अवधि को लेकर खड़ा हो रहा है। अभिलेखों में कार्य प्रारंभ तिथि 10 अगस्त 2025 और पूर्णता तिथि 26 सितंबर 2025 दर्ज है। यह वही समय है जब कबीरधाम जिले में मानसून अपने चरम पर रहता है और नाले-नदियां उफान पर होती हैं। ऐसे में भारी बारिश के बीच पुलिया निर्माण का गुणवत्ता सहित पूरा होना संदेह पैदा करता है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि निर्माण वास्तव में इसी अवधि में हुआ या केवल कागजों में तिथियां दर्ज कर औपचारिकता पूरी की गई।

निर्माण कार्य में सामग्री खरीदी को लेकर भी गंभीर संदेह सामने आए हैं। दस्तावेजों के अनुसार निर्माण एजेंसी ने चंद्रवंशी बिल्डिंग मटेरियल एवं बोर खनन, वार्ड क्रमांक 10, बोड़ला (बांधा टोला) से सामग्री खरीदी दर्शाई है। लेकिन प्रस्तुत बिलों की स्थिति पूरे मामले को संदिग्ध बना रही है। बिल क्रमांक 93, 68, 67, 72, 70 और 79 में दिनांक तक अंकित नहीं है, जबकि कई बिलों में वस्तु एवं सेवा कर पंजीयन क्रमांक भी दर्ज नहीं है। इसके बावजूद लाखों रुपए के भुगतान का उल्लेख किया गया है।

बिलों में दर्ज राशि भी चौंकाने वाली है। बिल क्रमांक 73 में 2 लाख रुपए, 68 में 2.10 लाख, 67 में 1.80 लाख, 72 में 2.38 लाख, 70 में 1.90 लाख, 79 में 2 लाख, 86 में 2 लाख और 90 में 2 लाख रुपए दर्शाए गए हैं। लगातार बड़े भुगतान और बिलों में मूलभूत जानकारी का अभाव प्रथम दृष्टया वित्तीय गड़बड़ी की ओर संकेत करता है।

सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों में पुलिया निर्माण से संबंधित इकरारनामा भी लगभग कोरा मिला है। कई आवश्यक कॉलम खाली हैं, जबकि गवाह के रूप में ग्राम पंचायत चोरभट्टी और बाघूटोला के सरपंचों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। साथ ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बोड़ला के हस्ताक्षर भी दस्तावेज में पाए गए हैं। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीरता पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की मात्रा भी जांच की मांग कर रही है। अभिलेखों में 2000 से अधिक सीमेंट बोरी, 18 ट्रक और 1 ट्रैक्टर गिट्टी तथा 10 ट्रक और 9 ट्रैक्टर रेत उपयोग दर्शाया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री की वास्तविक आपूर्ति, गुणवत्ता और परिवहन दस्तावेजों पर गंभीर सवाल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार रेत और गिट्टी जैसी खनिज सामग्री के लिए रॉयल्टी पर्ची, वैध परिवहन अनुमति और व्यापार लाइसेंस अनिवार्य है। अब बड़ा सवाल यह है कि संबंधित दुकान के पास रेत, गिट्टी, मुरूम और अन्य निर्माण सामग्री के भंडारण एवं परिवहन की वैधानिक अनुमति थी या नहीं। यदि नहीं, तो लगातार ग्राम पंचायतों में इसी दुकान के बिलों से राशि आहरण कैसे किया जा रहा है।
पूरा मामला केवल बिलों की गड़बड़ी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसमें सरपंच, सचिव, दुकानदार और संबंधित अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की आशंका भी गहराती जा रही है। अधूरे दस्तावेज, बिना दिनांक के बिल और भारी बरसात के दौरान निर्माण पूर्ण दिखाया जाना पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

अब मांग उठ रही है कि मामले में जिला स्तरीय स्वतंत्र जांच कर मापन पुस्तिका, बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, भुगतान अभिलेख, गुणवत्ता परीक्षण, रॉयल्टी पर्ची और परिवहन दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कठोर आर्थिक एवं दंडात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।

कबीरधाम में यह मामला अब केवल एक पुलिया निर्माण का नहीं, बल्कि शासकीय योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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