छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

पंद्रहवें वित्त आयोग की राशियों का पंचायतों में हो रहा दुरुपयोग ?

 पंद्रहवें वित्त आयोग की राशियों का पंचायतों में हो रहा  दुरुपयोग ? -- धमतरी पते वाले सप्लायर के बिलों से लाखों का भुगतान, रॉयल्टी और सीमेंट खरीदी के सबूतों पर उठे सवाल--

कवर्धा
ग्राम पंचायत खड़ौदा कला में पंद्रहवें वित्त आयोग (जनपद स्तर) की राशि से कराए गए निर्माण कार्यों में उपयोग की गई निर्माण सामग्री के भुगतान संबंधी दस्तावेज अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। पंचायत के अभिलेखों में संलग्न दो बिलों ने न केवल सामग्री खरीदी की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि बिल में दर्ज दुकान के पते ने भी पूरे मामले को संदेहास्पद बना दिया है। ग्रामीण अब पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

दस्तावेजों के अनुसार बिल क्रमांक-28, दिनांक 16 अप्रैल 2026 में बड़े तालाब मंदिर के पास होलिका दहन स्थल पर मिट्टी एवं डस्ट मिक्स मटेरियल डालने का उल्लेख है। इसमें 130 ट्रिप मिट्टी 300 रुपये प्रति ट्रिप की दर से 39 हजार रुपये तथा 2 ट्रिप डस्ट मिक्स 5 हजार रुपये प्रति ट्रिप की दर से 10 हजार रुपये, कुल 49 हजार रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।

वहीं बिल क्रमांक-29, दिनांक 15 मई 2026 में भोला पटेल के घर से मुख्य सड़क तक सीसी रोड निर्माण के लिए रेत 5 ट्रिप, गिट्टी 5 ट्रिप तथा 100 बोरी सीमेंट की खरीदी दर्शाते हुए कुल 94 हजार 500 रुपये खर्च होना बताया गया है। दोनों बिलों का भुगतान पंद्रहवें वित्त आयोग (जनपद स्तर) की राशि से किया जाना उल्लेखित है।

सबसे बड़ा सवाल बिल जारी करने वाले प्रमोद बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर पर खड़ा हो रहा है। बिल में दुकान का पता खड़ौदा कला, तहसील-बोड़ला, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़) अंकित है, जबकि बोड़ला विकासखंड कबीरधाम जिले में स्थित है। बिल पर दर्ज इस विसंगति ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला केवल पते तक सीमित नहीं है। यदि पंचायत को वास्तव में रेत, गिट्टी और मिट्टी की आपूर्ति की गई है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि सामग्री किस खदान या घाट से लाई गई, उसकी रॉयल्टी पर्चियां, परिवहन चालान और वाहन विवरण कहां हैं। बिना वैध रॉयल्टी के खनिज सामग्री का परिवहन नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
इसी प्रकार 100 बोरी सीमेंट उपयोग किए जाने का उल्लेख भी जांच का विषय बन गया है। 

संबंधित सप्लायर के पास सीमेंट कंपनी का मूल खरीद बिल, जीएसटी चालान, स्टॉक रजिस्टर और बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। यदि यह सामग्री वास्तव में पंचायत कार्य में लगी है तो उसके दस्तावेज प्रस्तुत करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि गांवों के विकास के लिए दी जाती है, इसलिए प्रत्येक भुगतान पूरी तरह दस्तावेजी और पारदर्शी होना चाहिए। यदि भुगतान के आधार बने बिलों में ही ऐसी विसंगतियां सामने आ रही हैं तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जनपद पंचायत, जिला पंचायत, खनिज विभाग, जीएसटी विभाग तथा संबंधित जांच एजेंसियां पूरे मामले की संयुक्त जांच करें। साथ ही संबंधित सप्लायर से रेत, गिट्टी और मिट्टी की रॉयल्टी पर्चियां, परिवहन दस्तावेज, सीमेंट की मूल खरीदी बिल और जीएसटी रिकॉर्ड प्रस्तुत कराने के निर्देश दिए जाएं।

यदि जांच में सभी दस्तावेज सही पाए जाते हैं तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन यदि बिलों और वास्तविक अभिलेखों में अंतर मिलता है तो यह सरकारी धन के उपयोग से जुड़ी गंभीर अनियमितता का मामला बन सकता है। फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब संबंधित सप्लायर और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा। निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी।

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