छत्तीसगढ़ / गरियाबंद

23 सितंबर को गरियाबंद में मनाया जाएगा राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस

 मंगल भवन में होगा कार्यक्रम, प्रथम विकासखण्ड स्तरीय निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित

आयुर्वेदिक जीवन शैली, योग और संतुलित आहार अपनाने जिले वासियों से अपील

गरियाबंद, 22 सितंबर 2026

संचालनालय आयुष के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा के मार्गदर्शन व जिला आयुष अधिकारी डॉ. प्रवीण चन्द्राकर के सहयोग से प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 23 सितम्बर 2026 को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस का आयोजन आयुर्वेद फॉर ए हेल्दीयर टुमॉरो थीम के अनुरूप जिला मुख्यालय गरियाबंद के मंगल भवन (गांधी मैदान) में आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रथम विकासखण्ड स्तरीय निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया जा रहा है।

जिला आयुष अधिकारी श्री प्रवीण चंद्राकर ने बताया कि आयुर्वेद जीवन का एक विज्ञान है जो 5 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। इसकी जड़े ऋग्वेद से जुड़ी हैं। आयुर्वेद शब्द आयु (जीवन) और वेद (विज्ञान) से मिलकर बना है। इसका उद्देश्य स्वस्थ्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमन है। इसका मतलब है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और बीमार व्यक्ति के विकार (रोग) को दूर करना।

आयुर्वेद सच्ची स्वास्थ्य स्थिति को चयापचय तत्यों के सामंजस्यपूर्ण संतुलन के रूप में परिभाषित करता है। इस संतुलन के लिए जैव-ऊर्जा (दोष), चयापचय अग्नि (अग्नि), शारीरिक ऊतकों (धातु) और अपशिष्ट निष्कासन (मल) के साथ-साथ एक शांत आत्मा (आत्मा), मस्तिष्क (मानस) और इंद्रियों (इंद्रियों) के बीच इष्टतम तालमेल आवश्यक होता है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में वर्णित वनस्पतियों, पशु उत्पादों और खनिजों के औषधीय एवं चिकित्सीय गुणों का उपयोग करते हुए आयुर्वेद आज भी अपनी प्राचीनता के साथ आधुनिक प्रासंगिकता बनाए हुए है। इस विज्ञान का मुख्य सिद्धांत यह है कि अच्छे स्वास्थ्य का मतलब है व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा का अपने आस-पास की दुनिया के साथ पुरी तरह से तालमेल होना।

सरकार आयुर्वेद क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक इकोसिस्टम स्थापित कर रही है। यह शिक्षा के आधुनिकीकरण, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और विकास, औषधि मानकौ की स्थापना, वैश्विक स्तर पर पहुंच तथा आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ एकीकृत करने के माध्यम से किया जा रहा है। सरकार का यह समय दृष्टिकोण आयुर्वेद तथा योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी समेत सभी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की बढ़ती वैश्चिक लोकप्रियता के साथ-साथ आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष की थीम स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेदष् निर्धारित की गई है। आयुर्वेद भारत की प्राचीन एवं वैज्ञानिक स्वास्थ्य परंपरा है, जिसमें स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा तथा रोगी के रोग का शमन प्रमुख उद्देश्य है। आयुर्वेद में दिनचर्या, ऋतुचर्या, संतुलित आहार, योग, प्राणायाम, पर्याप्त निद्रा एवं स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से रोगों की रोकथाम एवं स्वास्थ्य संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाता है।

जिला आयुष अधिकारी ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे आयुर्वेद के स्वास्थ्यवर्धक सिद्धांतों को अपनी दैनिक जीवनशैली में अपनाएं। नियमित दिनचर्या, स्थानीय एवं ऋतु के अनुरूप पौष्टिक आहार, नियमित योग-व्यायाम तथा मानसिक संतुलन को जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ जीवन की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न शासकीय आयुष संस्थानों एवं आयुर्वेद औषधालयों में जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से आम नागरिकों को आयुर्वेदिक जीवनशैली, स्वस्थ आहार-विहार, योग एवं रोगों की रोकथाम के संबंध में जानकारी प्रदान की जाएगी।

भारत सरकार ने वर्ष 2025 से आयुर्वेद दिवस के लिए 23 सितंबर की निश्चित तिथि निर्धारित की है। इससे आयुर्वेद दिवस को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान मिली है। जिला आयुष अधिकारी ने आयुर्वेद दिवस में हो रहे निःशुल्क विकासखण्ड स्तरीय शिविर में नागरिकों से अपील है कि शिविर में अधिक से अधिक भाग लेकर चिकित्सीय सेवा का लाभ उठाये।

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