बालोद। जिले के डौंडी में पेंशनरों ने शासन की नीतियों के खिलाफ एक दिवसीय धरना आयोजित कर अपनी लंबित मांगें उठाईं। धारा 49(6) को अन्याय का प्रतीक बताते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा, जो पेंशनर समाज के संघर्ष को नई गति प्रदान कर रहा है।
20 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ पेंशनर समाज के प्रांतीय निर्देश पर डौंडी तहसील इकाई ने पेंशन भवन में विशाल धरना प्रदर्शन का आयोजन किया। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भारी संख्या उमड़ी और उन्होंने शासन की पेंशन नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए नारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया। धरने के अंत में सभी ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम पांच प्रमुख मांगों का ज्ञापन तैयार किया, जिसे तहसीलदार डौंडी को औपचारिक रूप से भेंट किया गया। यह कदम पेंशनरों के अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष राम मूरत भारद्वाज ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) को पेंशनरों के लिए अभिशाप करार दिया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ सरकारें आपसी समझौते का हवाला देकर 26 वर्षों से एरियर व राहत राशि का भुगतान रोक रही हैं, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड जैसे राज्य इससे मुक्त हैं। भारद्वाज ने इस भेदभावपूर्ण प्रथा को शीघ्र समाप्त करने की कटिबद्ध मांग की, ताकि पेंशनरों को उनका हक मिल सके।
पेंशनर समाज ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूपरेखा में प्रस्तुत किया। पहली मांग है कि केंद्र द्वारा निर्धारित तारीखों (1 जनवरी व 1 जुलाई) से ही महंगाई राहत का लाभ पेंशनरों को प्रदान किया जाए। दूसरी मांग, छठे वेतनमान के 32 मासिक (2006-2008) व सातवें वेतनमान के 27 मासिक (2016-2018) एरियर का तत्काल भुगतान हो। तीसरी, कार्यरत कर्मचारियों की तरह पेंशनरों को मान्यता प्राप्त अस्पतालों में कैशलेस चिकित्सा व औषधि व्यय की सुविधा पेंशनर कल्याण निधि से उपलब्ध कराई जाए। इन मांगों पर अडिग रहते हुए समाज ने संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
धरने में संरक्षक बीआर बंजारे, सचिव विजय कुमार चौबे, कोषाध्यक्ष जेएल ठाकुर, उपाध्यक्ष बिहारी लाल ठाकुर, केशलाल चोपड़े, राम गुलाल साहू, योगेश्वर प्रसाद गंगोली, शंकर लाल पिसदा, एसएस गोयल, हीरा लाल पटौदी, कृष्णा रावटे, सुरजू राम भुआर्या, उमेन्द्र सिंह पिसदा व चेतन लाल ठाकुर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिलाओं में देवकी मानकर, सावित्री नायक व राम कुमारी सोनी ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज की। यह प्रदर्शन न केवल पेंशनरों की एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि शासन को जागृत करने का सशक्त संदेश भी दे गया। पेंशनर समाज आश्वस्त है कि उनकी आवाज अनसुनी नहीं रहेगी।