छत्तीसगढ़ / बीजापुर

नन्हे सपनों को मिला नया पक्की छत का सहारा

 बीजापुर । ग्राम सावनार जो ग्राम पंचायत तोड़का जनपद पंचायत बीजापुर का एक छोटा सा आश्रित गांव है, यह गांव कभी नक्सली दहशत के साएं में विकास से अछूता था। बच्चों को अक्षर ज्ञान भी झोपड़ी में ही लेनी पड़ रही थी। लेकिन नियद नेल्लनार गांव में शामिल होने के बाद गांव की तस्वीर बदल गई है और इस बदलते परिवेश में साथ मिला महात्मा गांधी नरेगा योजना का। महात्मा गांधी नरेगा और डीएमएफ के अभिसरण से 9.35 लाख रुपये की स्वीकृति से एक नए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण हुआ। यह भवन सिर्फ ईंट और सीमेंट से नहीं बनाए बल्कि इसमें गांव के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के सपने भी जुड़े हुए हैं। अब हर सुबह सावनार के लगभग 40 से 45 बच्चे इस नए आंगनबाड़ी केंद्र में मुस्कान के साथ पहुंचते हैं। रंग-बिरंगे कमरे, साफ-सुथरा वातावरण और सुरक्षित जगह उन्हें एक नया अनुभव देते हैं। यहां उन्हें न सिर्फ पढ़ना-लिखना सिखाया जाता है, बल्कि पोषण आहार और स्वास्थ्य सेवाएं भी मिलती हैं। पहले जो बच्चे असुविधा के कारण नियमित नहीं आ पाते थे, अब वे उत्साह के साथ हर दिन आते हैं। उनकी आंखों में चमक है, मन में उत्साह है और सपनों को उड़ान देने का हौसला भी। यह आंगनबाड़ी भवन अब सिर्फ एक इमारत नहीं रहा, बल्कि गांव के नन्हे बच्चों के सपनों का नया घर बन गया है, जहां से उनका भविष्य मजबूत, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है।

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