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आज भी तय करता है प्रदेश के बाजार भाव

 इंदौर। 135 वर्ष पहले स्थापित शहर के सियागंज बाजार का दबदबा आज भी कायम है। आज भी यह बाजार प्रदेश का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है और प्रदेश के कई शहरों के बाजारों के भाव तय करता है। स्थापना के इतने वर्षों बाद भी इसकी साख और धाक बरकरार है। इसकी वजह है इसकी प्रमाणिकता। यहां की क्वालिटी और दाम का कोई सानी नहीं।

यही वजह है कि मालवा-निमाड़ क्षेत्र के थोक व्यापारी ही नहीं, शहर के खेरची खरीदार भी यहां पहुंचते हैं। शायद ही कोई ऐसा मेवा या किराना आइटम होगा, जिसका व्यापार यहां नहीं होता हो। प्रदेशभर से व्यापारी यहां खरीदारी करने आते हैं। 135 वर्ष के इतिहास में इस बाजार ने कई उतार-चढ़ाव देखे।

समय के साथ शनै-शनै इस बाजार का विस्तार हुआ और किसी समय एक गली में सिमटा यह बाजार और करीब डेढ़ किमी क्षेत्रफल में फैला है। समय के साथ कदमताल करता बाजार आज पार्किंग और जाम की समस्या से जूझ रहा है।

इसलिए प्रसिद्ध है सियागंज

 

 

सियागंज अपने गुणवत्तापूर्ण किराना, मसाला और मेवों के लिए प्रसिद्ध है। यह वर्षों से मप्र का प्रमुख थोक बाजार रहा है। इंदौर और आसपास के 100-150 किमी क्षेत्र के व्यापारी यहां खरीदारी करने आते हैं। कई प्रमुख वस्तुएं उनके दाम यहां से खुलते हैं। इसका असर पूरे देश के बाजारों पर पड़ता है।

बाजार का इतिहास : कर मुक्त क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध था सियागंज

 

वर्ष 1891 में महाराजा शिवाजीराव होलकर के आदेश पर रेलवे स्टेशन के पास सियागंज मंडी स्थापित की गई थी। यह कर मुक्त क्षेत्र था। इस क्षेत्र विशेष में जो भी माल आता-जाता था, उस पर कोई कर नहीं लगाया जाता था, लेकिन निर्धारित क्षेत्र के बाहर माल ले जाने पर कर वसूला जाता था। यही वजह थी कि कुछ ही वर्षों में सियागंज क्षेत्र के प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित हो गया।

बाहर से आने वाले व्यापारी इस बाजार में अपना माल बेचते और यहीं से अपनी जरूरत की वस्तुएं खरीदकर ले जाते। इस व्यापार पर उन्हें कोई कर नहीं देना पड़ता था। शहर के व्यापारी भी रेल से अपना माल मंगवाकर सियागंज में बेच दिया करते थे। व्यापारियों के अलावा शहर के नागरिक भी यहीं से अपनी जरूरत का सामान खरीदते थे। कर मुक्त क्षेत्र होने की वजह से यहां वस्तुओं का मूल्य अन्य क्षेत्र की दुकानों के मुकाबले कम हुआ करता था।

इन समस्याओं से मिले निजात

 

सियागंज में बड़ी संख्या में बाहर के व्यापारी आते हैं, लेकिन उनके जान-माल की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। बाजार में एकमात्र पुलिस चौकी है, जिस पर ज्यादातर ताला जड़ा रहता है।

बाजार में रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना लगा रहता है, बावजूद इसके सिर्फ एक सुविधाघर है। महिला सुविधाघर तो है ही नहीं।

पार्किंग के लिए कोई योजना नहीं है। वाहन जहां-तहां खड़े रहते हैं। पूरे क्षेत्र में जाम लगा रहता है।

समय के साथ बाजार में मिलावटी सामान की बिक्री भी होने लगी है। इससे बाजार की साख पर बट्टा लग रहा है। इस पर नियंत्रण जरूरी है।

वर्षाकाल में जलजमाव की समस्या बहुत पुरानी है। इस वजह से तलघर में बनी दुकानों में रखा लाखों रुपये का माल हर साल खराब हो जाता है।

 

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