"" दो तेंदुआ के खाल सहित 5 आरोपी गिरफ्तार" " खाल को तंत्र मंत्र के लिए उपयोग किया जा रहा था"
कबीरधाम |
2026-03-21 19:09:17
कवर्धा-- वन एवम जलवायु परिवर्तन विभाग, कवर्धा वनमंडल द्वारा वन्यजीव अपराध के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए दो नग तेंदुआ खाल सहित अन्य अवैध सामग्री जप्त कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, भोपाल (भारत सरकार) एवं राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल, रायपुर (छत्तीसगढ़) से प्राप्त सूचना के आधार पर गठित संयुक्त जांच समिति, जिसमें कवर्धा वनमंडल के क्षेत्रीय अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल थे, उनके द्वारा तरेगांव के ग्राम गुडली एवं कवर्धा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरभट्टी में कार्रवाई की गई।
वनमंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल कवर्धा ने बताया कि 20 मार्च को अवैध तेंदुआ खाल रखे जाने की सूचना प्राप्त होने पर संयुक्त टीम द्वारा दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से दो नग तेंदुआ खाल, हड्डी, नाखून आदि सामग्री जप्त की गई।
इस प्रकरण में -आरोपी
संतराम धुर्वे पिता बिहारी धुर्वे, निवासी ग्राम चोरभट्टी
सुखराम मेरावी पिता बुधारी मेरावी, निवासी ग्राम गुडली
अघनू धुर्वे पिता भागुराम धुर्वे, निवासी ग्राम आमानारा
सहैततर मरकाम पिता तिरिथ राम, निवासी ग्राम सिंघारी
कनस टेकाम पिता इतवारी, निवासी ग्राम बेन्दा को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई।
प्रारंभिक जांच एवम पूछताछ के दौरान आरोपियों के द्वारा जो बातें उजागर की गई वह हैरान कर देने वाला था आरोपी उक्त तेंदुआ के खाल को पूजा-पाठ एवं अन्य तांत्रिकी गतिविधियों में उपयोग में लाये जाने की बात स्वीकार की गयी।
उक्त प्रकरण में आरोपियों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 44, 50, 51 एवं 52 के तहत वन अपराध क्रमांक 20730/17 दिनांक 20.03.2026 पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
21. मार्च को आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया तथा माननीय न्यायालय द्वारा उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया है।। ""आखिर क्यों नहीँ थम रहा अवैध शिकार का मामला"' कवर्धा वनमंडल में अवैध शिकार के मामले बीच बीच मे उजागर होते ही रहते है। ठोस कार्यवाहीया भी होती रही है लेकिन इसकी वास्तविक वजह क्या है यह समझ से परे है क्या इसे वनांचल क्षेत्रो में जागरूकता की कमी मानी जाए या शिकारियों के बुलंद हौसले । बातें चाहे जो भी हो पर इतना तो जरूर कहा जा सका है। कि वनांचल क्षेत्रों में शिकारियों का संगठित नेटवर्क जरूर काम कर रहा है।