कवर्धा, 27 मार्च 2026। ग्रीष्म ऋतु के मौसम में तापमान में वृद्धि के साथ भीषण गर्मी और तेज धूप से लू लगने की आशंका बढ़ गई है। इस संबंध में कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने समस्त जिलेवासियों से सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे मौसम में बदलाव हो रहा है, तेज धूप और गर्मी के प्रभाव से शरीर का तापमान अनियंत्रित होकर अत्यधिक बढ़ सकता है, जिससे लू लगने या हीट-स्ट्रोक जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
लू लगने के कारण शरीर में पानी और खनिज लवण की कमी हो जाती है, जो खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है। सीएमएचओं डाॅ. डीके तुर्रे ने कहा कि इस समय ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग दिन-रात खेतों में काम, खरीदारी और अन्य कार्यों के लिए बाहर जा रहे हैं, लेकिन वे पर्याप्त मात्रा में पानी या अन्य पेय पदार्थ साथ नहीं ले जाते, जिसके कारण निर्जलीकरण का शिकार हो जाते हैं। निर्जलीकरण से समय पर उपचार न मिलने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।
लू से बचाव के उपाय
इस संबंध में सीएमएचओं डाॅ. डीके तुर्रे ने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उपस्वास्थ्य केंद्रों में लू से बचाव और उपचार के लिए जीवन रक्षक दवाइयां और ओआरएस पैकेट उपलब्ध हैं। लू से बचने के लिए जन सामान्य से अपील की जाती है कि जब भी बाहर जाएं, तो पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य पेय पदार्थ जैसे नींबू पानी, मट्ठा, जलजीरा, पना आदि का सेवन करें। साइकिल, स्कूटी, मोटरसाइकिल पर चलते समय सिर और कानों को मुलायम कपड़े से ढकें, चश्मा और टोपी पहनें। बीच-बीच में छायादार स्थान पर रुक कर विश्राम करें। ताजे फल, फलों का जूस और ओआरएस घोल का सेवन करें।
ओआरएस का महत्व
यदि ओआरएस पैकेट उपलब्ध न हो, तो एक गिलास पानी में एक चम्मच शक्कर, एक चुटकी नमक और कुछ बूँदें नींबू का रस मिलाकर घोल तैयार करें और उसे पिएं। इससे शरीर में पानी और खनिज लवण की कमी को पूरा किया जा सकता है।
चेतावनी, लू का उपचार जरूरी
यदि शरीर से पसीना कम आ रहा हो, पेशाब में कमी हो, या बुखार की स्थिति हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सकीय सलाह लें। लू लगने से बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है। इस गर्मी में सभी जिलेवासी अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।