खनिज माफिया बेलगाम, विभाग नाकाम! कागज़ी कार्रवाई से नहीं रुका अवैध उत्खनन का खेल
कबीरधाम |
2026-04-01 18:50:23
कवर्धा,
जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट नजर आ रही है। विभागीय आंकड़ों में भले ही कार्रवाई का ब्योरा पेश किया जा रहा हो, लेकिन गांव-गांव, जंगल-पहाड़ और कस्बाई इलाकों में अवैध खनन और परिवहन का धंधा बदस्तूर जारी है।
विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में ईंट मिट्टी के अवैध परिवहन के 02 मामलों में 44 हजार रुपये तथा अवैध उत्खनन के 04 मामलों में 80 हजार रुपये का अर्थदंड वसूल किया गया है। साथ ही पंडरिया और कुकदूर क्षेत्र में 15 नए प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई प्रक्रिया में होने की बात कही गई है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इतनी सीमित कार्रवाई से उस अवैध नेटवर्क पर लगाम लग सकती है, जो प्रतिदिन लाखों रुपये का खनिज बिना रॉयल्टी और बिना अनुमति निकाल रहा है।
खुलेआम चल रहे अवैध ईंट भट्ठे
जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध ईंट भट्ठों का संचालन किसी से छिपा नहीं है। खेतों की उपजाऊ मिट्टी को बड़े पैमाने पर काटा जा रहा है। ट्रैक्टर और हाइवा वाहन रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी मुरूम और रेत का परिवहन करते नजर आते हैं। कई स्थानों पर जेसीबी मशीनों से गहरी खुदाई कर प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभागीय अमला नियमित निगरानी करता, तो इतनी निर्भीकता से अवैध उत्खनन संभव नहीं होता। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
जुर्माना या औपचारिकता
पूरे साल में मात्र 6 मामलों में कुल 1 लाख 24 हजार रुपये की वसूली—यह आंकड़ा उस व्यापक अवैध कारोबार के सामने बेहद छोटा प्रतीत होता है। जानकारों का कहना है कि एक बड़े अवैध उत्खनन स्थल से प्रतिदिन इससे कहीं अधिक की कमाई हो जाती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जुर्माने की यह राशि केवल औपचारिकता भर है।
कई मामलों में वाहन पकड़ने के बाद मामूली दंड लेकर छोड़ दिए जाने की चर्चा भी आम है। इससे अवैध कारोबारियों के मन में भय कम और प्रोत्साहन अधिक दिखाई देता है।
पर्यावरणीय संकट की आहट
अवैध खनन केवल राजस्व हानि का मामला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय संकट का संकेत भी है। पहाड़ियों की अंधाधुंध कटाई, खेतों की मिट्टी का क्षरण और नदी-नालों से अनियंत्रित रेत निकासी से जलस्तर प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की उत्पादकता घटने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में इसका गंभीर प्रभाव दिखाई देगा। लेकिन वर्तमान हालात में विभागीय कार्रवाई उस स्तर की नजर नहीं आ रही, जिसकी आवश्यकता है।
दर्ज प्रकरणों का क्या होगा
पंडरिया और कुकदूर क्षेत्र में 15 नए प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। लेकिन सवाल यह भी है कि इन मामलों का अंतिम परिणाम क्या होगा । क्या इन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी या वे भी फाइलों में दबकर रह जाएंगे।
जनता का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब कार्रवाई पारदर्शी और प्रभावी हो। केवल प्रेस विज्ञप्ति जारी करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
जिम्मेदारी तय कब
जिले में लगातार अवैध खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद यदि गतिविधियां जारी हैं, तो कहीं न कहीं निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगता है। क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? क्या बड़े स्तर पर जांच कर अवैध नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जाएगा।
फिलहाल स्थिति यह है कि अवैध खनन का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा, जबकि विभाग कार्रवाई के आंकड़े गिना रहा है।