छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

कागजों में विकास, जमीन पर विनाश—20 लाख की पुलिया में पहले ही पड़ गई दरार

पंडरिया/कवर्धा--

पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपये की स्वीकृतियाँ लगातार मिल रही हैं। शासन और प्रशासन के दावों में विकास की गंगा बहती नजर आती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती दिखाई दे रही है। हालत यह है कि जिन निर्माण कार्यों को जनता की सुविधा और क्षेत्र के विकास का आधार बताया जाता है, वही कार्य गुणवत्ता की कमी और कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर समय से पहले दम तोड़ रहे हैं। ताजा मामला जनपद पंचायत पंडरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत रेंगाबोड़ का है, जहां 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित आर.सी.सी. पुलिया उपयोग में आने से पहले ही दरक गई।

यह दृश्य केवल एक पुलिया में आई दरार का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है। आखिर ऐसा कैसे संभव है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद बना ढांचा जनता के उपयोग में आने से पहले ही फटने लगे। निर्माण स्थल से सामने आई तस्वीरों में पुलिया के बेस हिस्से में गहरी दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। इन दरारों ने निर्माण गुणवत्ता की सच्चाई उजागर कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिना उपयोग के ही पुलिया की यह हालत है, तो बारिश और भारी वाहनों के दबाव में यह कब तक टिक पाएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं।

छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 में अधोसंरचना विकास एवं पर्यावरण उपकर निधि से कबीरधाम जिले के लिए कई निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई थी। इन्हीं स्वीकृत कार्यों में पंडरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत रेंगाबोड़ में आर.सी.सी. पुलिया निर्माण कार्य (आम रास्ता) भी शामिल था, जिसकी स्वीकृत राशि 20 लाख रुपये निर्धारित की गई। कागजों में यह योजना ग्रामीणों के आवागमन को आसान बनाने और क्षेत्रीय विकास की दिशा में बड़ा कदम बताई गई थी।

लेकिन सवाल यह है कि जब कार्य पर इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही थी, तब तकनीकी निगरानी कहां थी। निर्माण एजेंसी क्या कर रही थी। गुणवत्ता परीक्षण किसने किया। क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने केवल फाइलों में हस्ताक्षर कर अपना कर्तव्य पूरा मान लिया। ये सवाल अब जनता के बीच खुलकर उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य हेतु प्रथम किस्त के रूप में राशि भी जारी कर दी गई थी। इसके बावजूद कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब निकली कि पुलिया उपयोग में आने से पहले ही दरारों से भर गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि निर्माण कार्य में मानकों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री, कमजोर मिश्रण और तकनीकी लापरवाही बरती गई, जिसके कारण ढांचा शुरुआत में ही कमजोर साबित हुआ।

मामले को और गंभीर बनाता है जनपद पंचायत पंडरिया द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस। नोटिस में स्पष्ट उल्लेख है कि स्वीकृत पुलिया निर्माण कार्य समय सीमा के भीतर प्रारंभ अथवा पूर्ण नहीं किया गया तथा नियमों की अवहेलना की गई। संबंधित पक्ष को निर्देशित किया गया था कि कार्य शीघ्र पूर्ण कर दस्तावेज प्रस्तुत करें, अन्यथा राशि वसूली सहित कार्रवाई की जाएगी। सवाल यह है कि जब प्रशासन को पहले से अनियमितताओं की जानकारी थी, तो गुणवत्ता पर सख्त निगरानी क्यों नहीं रखी गई।

पंडरिया विधानसभा में यह पहला मामला नहीं है जब निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। क्षेत्र में अक्सर देखने को मिलता है कि सड़कें कुछ महीनों में उखड़ जाती हैं, नालियां सप्ताह भर में टूट जाती हैं और पुल-पुलिया उपयोग से पहले ही कमजोर पड़ जाते हैं। यह स्थिति जनता के मन में एक ही संदेश छोड़ रही है—कागजों में विकास, जमीन पर विनाश।

सरकारी रिकॉर्ड में विकास कार्यों की लंबी सूची है। हर साल नई स्वीकृतियाँ, नए बजट और बड़े-बड़े दावे सामने आते हैं। लेकिन धरातल पर वास्तविकता कुछ और ही कहानी बयां करती है। करोड़ों-अरबों रुपये की स्वीकृतियाँ कागजों में चमकती हैं, जबकि जमीन पर निर्माण कार्य या तो अधूरे रह जाते हैं या इतने घटिया होते हैं कि समय से पहले खराब हो जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो सरकारी धन की बर्बादी लगातार जारी रहेगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि रेंगाबोड़ पुलिया निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार, तकनीकी कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

जनता अब जवाब चाहती है—20 लाख रुपये की पुलिया आखिर उपयोग से पहले ही क्यों फट गई। जब तक इन सवालों के ठोस जवाब नहीं मिलते, तब तक पंडरिया में बहती तथाकथित विकास की गंगा पर जनता का विश्वास लगातार कमजोर होता जाएगा

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