6 लाख के रंगमंच में बड़ा खेल, स्वीकृत नक्शा-दरकिनार कर मनमाना निर्माण, जिम्मेदारों की भूमिका संदेह के घेरे में
कबीरधाम |
2026-07-18 16:42:47
कवर्धा
मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के तहत ग्राम पंचायत भेड़्रा के आश्रित ग्राम बोटेसूर में स्वीकृत 6 लाख रुपये के रंगमंच निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। सूचना पटल, स्वीकृत ड्राइंग डिजाइन और मौके पर किए गए निर्माण को देखने पर प्रथम दृष्टया भारी विसंगतियां दिखाई दे रही हैं, जिससे पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूचना पटल के अनुसार वर्ष 2025-26 में सांस्कृतिक मंच (रंगमंच) निर्माण कार्य के लिए 6 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। तकनीकी स्वीकृति 2 अप्रैल 2025 तथा प्रशासकीय स्वीकृति 17 अप्रैल 2025 को जारी की गई। कार्य प्रारंभ तिथि 24 मई 2025 तथा पूर्णता तिथि 10 मार्च 2026 अंकित है।
वहीं उपलब्ध ड्राइंग डिजाइन में मंच की लंबाई, चौड़ाई और संरचना स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है। योजना के तहत ग्रामीणों के सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजनों के लिए एक व्यवस्थित मंच का निर्माण किया जाना था, लेकिन मौके पर निर्मित ढांचा स्वीकृत डिजाइन से पूरी तरह अलग दिखाई दे रहा है। निर्माण की स्थिति किसी सांस्कृतिक मंच की बजाय बंद कमरेनुमा संरचना जैसी प्रतीत हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा स्वीकृत नक्शा और डिजाइन को पूरी तरह किनारे कर मनमाने तरीके से निर्माण किया गया है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल तकनीकी लापरवाही का मामला नहीं बल्कि शासकीय धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का गंभीर प्रकरण भी हो सकता है।
मामले में संबंधित तकनीकी अमले, उप अभियंता तथा पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। निर्माण कार्य की निगरानी और तकनीकी परीक्षण की जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होती है, इसके बावजूद स्वीकृत मानकों से अलग निर्माण होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य गांवों में आधारभूत सुविधाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है, लेकिन यदि स्वीकृत नक्शे को ही दरकिनार कर दिया जाए तो योजना की मूल मंशा पर ही आघात पहुंचता है। सूचना पटल में दर्ज जानकारी और जमीनी हकीकत के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देना पूरे मामले को संदेहास्पद बना रहा है।
अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। माप पुस्तिका (एमबी), स्वीकृत ड्राइंग, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि सूचना पटल में स्वीकृत रंगमंच और जमीन पर निर्मित संरचना में इतना बड़ा अंतर आखिर किसके संरक्षण में संभव हुआ।