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US-ईरान शांति वार्ता : होर्मुज से न्यूक्लियर डील तक क्या-क्या हो सकता है तय?

 वाशिंगटन/तेहरान । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच चल रही बैकचैनल बातचीत और मध्यस्थ देशों की सक्रिय भूमिका के बाद संभावित शांति समझौते की चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि समझौता “करीब-करीब तय” है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान संवर्धित यूरेनियम को लेकर अपने रुख में नरमी दिखाने को तैयार हुआ है।

हालांकि ईरान ने अब तक किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सामने आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित डील में कई बड़े और रणनीतिक बिंदु शामिल हो सकते हैं, जिनका असर वैश्विक तेल बाजार, पश्चिम एशिया की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुल सकता है
प्रस्तावित समझौते का सबसे अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना माना जा रहा है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका का दावा है कि समझौते के तहत ईरान जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगें हटाने और जहाजों की आवाजाही सामान्य करने पर सहमत हो सकता है। हालांकि ईरानी मीडिया का कहना है कि तेहरान क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।

संवर्धित यूरेनियम पर नरमी
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को सीमित करने या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपने पर विचार कर सकता है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यूरेनियम किस देश या संस्था को सौंपा जाएगा। इस मुद्दे पर आगे अलग परमाणु वार्ता होने की संभावना जताई जा रही है।

60 दिन का युद्धविराम
संभावित समझौते में 60 दिवसीय युद्धविराम का विस्तार भी शामिल हो सकता है। माना जा रहा है कि इस अवधि में दोनों पक्ष सैन्य गतिविधियां कम करेंगे और व्यापक शांति समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी।

तीन चरणों में लागू होगी शांति योजना
सूत्रों के अनुसार यह समझौता तीन चरणों में लागू हो सकता है। पहले चरण में पश्चिम एशिया संघर्ष को नियंत्रित करना, दूसरे में होर्मुज संकट का समाधान और तीसरे चरण में दीर्घकालिक राजनीतिक एवं सुरक्षा समझौते पर चर्चा शामिल होगी।

तेल प्रतिबंधों में राहत की मांग
ईरान ने अमेरिका से अपने तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाने और विदेशी खातों में फंसी संपत्तियों को जारी करने की मांग रखी है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि ठोस रियायतों के बाद इन मांगों पर विचार किया जा सकता है।

लेबनान और हिजबुल्ला मुद्दा भी शामिल
समझौते में लेबनान में हिजबुल्ला और इजरायल के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिश भी शामिल बताई जा रही है। अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में तनाव घटे, लेकिन उसने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को भी अहम माना है।

हालांकि संभावित समझौते को लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब भी “गहरे और महत्वपूर्ण” हैं। ऐसे में यह साफ है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए अभी और दौर की बातचीत जरूरी होगी। लेकिन अगर यह डील सफल होती है, तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी अस्थिरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।

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