देश-विदेश
राधाकृष्णन ने ली उपराष्ट्रपति पद की शपथ
नई दिल्ली । सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में 67 वर्षीय राधाकृष्णन को शपथ दिलाई। राजग उम्मीदवार राधाकृष्णन ने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से हराकर उपराष्ट्रपति पद का चुनाव जीत था। 21 जुलाई को जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद 9 सितंबर को नए उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव हुआ था।
इससे पहले उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था। गुरुवार को राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई थी। राष्ट्रपति मुर्मू ने राधाकृष्णन के इस्तीफे के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। देवव्रत अब दोनों राज्यों के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे।
बीएपीएस हिंदू मंदिर की सुंदरता देख अभिभूत हुए धर्मेंद्र प्रधान
अबू धाबी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अबू धाबी स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर के दौरे पर इसकी सुंदरता, रचनात्मकता और समावेशिता से अभिभूत हो गए। उन्होंने इस मंदिर को “असंभव चमत्कार” और “सभ्यता की उपलब्धि” बताते हुए बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के संतों की निस्वार्थ सेवा के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की।
केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि यह मंदिर भारत के शाश्वत मूल्यों सौहार्द, शांति और आध्यात्मिकता का वैश्विक प्रतीक है। उन्होंने इसे न केवल अद्भुत शिल्पकला का नमूना बताया बल्कि असंख्य स्वयंसेवकों और भक्तों की सामूहिक भक्ति व त्याग का प्रतीक भी माना।
मंत्री ने इस भव्य धाम की सराहना करते हुए कहा कि यह अंतरधार्मिक संवाद और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह मंदिर हमेशा भारत के सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक रहेगा, जो विभिन्न राष्ट्रों के दिलों को जोड़ता है और दुनिया को आस्था व सेवा की अमर शक्ति की याद दिलाता है।
बता दें कि बीएपीएस हिंदू मंदिर, अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी में स्थित एक पारंपरिक हिंदू मंदिर है, जिसे बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था ने निर्मित किया है।
यह भव्य मंदिर प्रमुख स्वामी महाराज (1921–2016) की प्रेरणा से साकार हुआ और 14 फरवरी 2024 को महंत स्वामी महाराज द्वारा प्रतिष्ठित किया गया। यह अबू धाबी का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है, जो भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का प्रतीक माना जाता है।
अमेरिका के इंफ्लूएंसर और ट्रंप के करीबी चार्ली किर्क की हत्या
वाशिंगटन। अमेरिका के कंजरवेटिव युवा नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी चार्ली किर्क (31) की बुधवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। किर्क यूटा वैली यूनिवर्सिटी में एक कॉलेज कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर उनके निधन की पुष्टि करते हुए दुख व्यक्त किया। यूटा के गवर्नर स्पेंसर कॉक्स ने इसे राजनीतिक हत्या करार दिया है।
भारत में देव भक्ति और देश भक्ति अलग नहीं : मोहन भागवत
नागपुर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत में देव भक्ति और देशभक्ति अलग-अलग नहीं है। इनके लिए दो अलग-अलग शब्द हैं, लेकिन जो देवभक्त होता है, वह स्वाभाविक रूप से देशभक्त भी होता है, और जो देशभक्त होता है, ईश्वर उससे भी देवभक्ति करा लेते हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम सत्य तक पहुंचने के 108 अलग-अलग मार्ग हैं, लेकिन सबको एक ही सत्य तक पहुंचना है।
अपने जन्मदिन (11 सितंबर) से ठीक एक दिन पूर्व नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में हर तरह का विकास हो रहा है, लेकिन इसके बाद भी लोगों के पास संतोष नहीं है। इसका कारण यह है कि उन्होंने विकास में सुख देखा, लेकिन अब यह अनुभव में आ रहा है कि केवल विकास से सुख नहीं आता। बल्कि दूसरों के लिए निःस्वार्थ भाव से कुछ करने से ही संतोष प्राप्त होता है।
सरसंघचालक ने कहा कि लोग मानते हैं कि राम ने उत्तर भारत को दक्षिण से जोड़ा। इसी तरह भगवान कृष्ण ने पूर्व को पश्चिम से जोड़ा। उन्होंने कहा कि, लेकिन भगवान शिव हर कण में विद्यमान हैं और वे हर कण को आपस में जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से देखने से यह समझ आता है कि कोई पराया नहीं है। वर्तमान में लोगों के स्वरूप अलग-अलग दिख सकते हैें, लेकिन अंतिम रूप से सभी एक हैं और इसलिए आपस में एक दूसरे से संबंधित हैं।
भागवत ने कहा कि भारत हजारों साल से विद्यमान है। यहां तपस्या का महत्त्व है। जो व्यक्ति स्वयं को प्राप्त कर लेता है, उसे यह समझ आ जाता है कि कोई पराया नहीं है, और सबके लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने बच्चों की सेवा करते हैं। लेकिन इसके पीछे कोई कांट्रैक्ट नहीं होता कि वे बड़े होकर उनकी भी सेवा करेंगे। लेकिन बच्चे बाद में समझते हैं कि उन्हें भी अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है।
श्री श्री रविशंकर ने कहा कि डॉ. मोहन भागवत कर्मनिष्ठ और सेवा में समर्पित हैं। वे अपना पूरा समय देश-समाज के लिए देते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत के मार्गदर्शन से करोड़ों लोग देशभक्ति और धर्म की स्थापना में लगे हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस पिछले सौ साल से देश की सनातन धरोहर को बचाने का काम कर रहा है, और यह कार्य आगे बढ़ते रहना चाहिए।
75 वर्ष के हुए मोहन भागवत
नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत गुरुवार 11 सितंबर 2025 को 75 वर्ष के हो गये। वह 16 वर्षों से अधिक समय से संघ के मार्गदर्शक और दार्शनिक के रूप में शीर्ष पर हैं। 11 सितंबर, 1950 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में जन्मे मधुकर दत्तात्रेय देवरस, जिन्हें बालासाहेब के नाम से जाना जाता है और एमएस गोलवलकर के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के तीसरे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रमुख हैं।
बालासाहेब आरएसएस के तीसरे सरसंघचालक थे जो 20 वर्षों से अधिक समय तक शीर्ष पर रहे। वहीं संघ के दूसरे सरसंघचालक गोलवलकर ने 32 वर्षों से अधिक समय तक हिंदुत्व संगठन का नेतृत्व किया। भागवत ने लगभग 50 वर्ष पहले आरएसएस के प्रचारक के रूप में काम करना शुरू किया था और मार्च 2009 में वह इसके सरसंघचालक बने। उनके पिता मधुकरराव भागवत भी एक प्रचारक थे। प्रचारक आरएसएस का पूर्णकालिक कार्यकर्ता होता है।
नेपाल में हालात बेकाबू: पीएम और कई मंत्रियों का इस्तीफा, संसद-सुप्रीम कोर्ट तक फूंके
काठमांडू । नेपाल में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ युवाओं का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। मंगलवार को हालात उस समय बेकाबू हो गए जब प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, राष्ट्रपति, कई मंत्रियों और शीर्ष नेताओं के सरकारी व निजी आवासों पर हमला कर तोड़फोड़ और आगजनी कर दी। हिंसा की आग इतनी तेजी से फैली कि संसद भवन, सिंह दरबार (प्रधानमंत्री और मंत्रियों के दफ्तर) और सुप्रीम कोर्ट तक इसकी चपेट में आ गए।
सरकार के खिलाफ यह गुस्सा उस वक्त और भड़क गया जब सुरक्षा बलों द्वारा गोली चलाने का आदेश देने वाले डीएसपी की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा, उनकी पत्नी व विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा और कई अन्य नेताओं को भी प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा।
नेताओं और परिवारों को बनाया निशाना
उग्र भीड़ ने पीएम ओली, राष्ट्रपति पौडेल और कई मंत्रियों के आवासों पर हमला, निजी घरों में तोड़फोड़ की। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा और उनकी पत्नी व विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा की घर में घुसकर पिटाई की गई। उग्र भीड़ ने पूर्व पीएम झालानाथ खनल की पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार को जिंदा जला दिया, जिनकी बाद में कीर्तिपुर बर्न अस्पताल में मौत हो गई। वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग और कांग्रेस महासचिव गगन थापा के आवासों पर भी हमला किया गया। राजधानी काठमांडू स्थित संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और सिंह दरबार को पूरी तरह जला दिया गया।
संवैधानिक संस्थानों और मीडिया पर हमला
संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, विशेष अदालत और सिंह दरबार (पीएम और मंत्रियों के दफ्तर) को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया। कांतिपुर टीवी की इमारत भी जला दी गई। कई बैंकों में लूटपाट, जगह-जगह टायर जलाकर सड़कें रोकी गईं।
जेलों पर हमला और कैदियों की रिहाई
धनगढ़ी और काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने जेलों पर हमला किया। करीब 1,500 कैदी नक्खू जेल से भाग निकले, जबकि धनगढ़ी जेल से भी सैकड़ों कैदी फरार हो गए। नक्खू जेल से भ्रष्टाचार के आरोप में बंद पूर्व उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी अध्यक्ष रबि लामिछाने को छुड़ा लिया गया। जेल प्रशासन ने हालात बिगड़ने के बाद उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने से मना कर दिया, जिसके बाद उनकी पत्नी निकिता पौडेल उन्हें जेल से बाहर ले गईं। लामिछाने भी मौजूदा हालात में पीएम पद के दावेदार के रूप में देखे जा रहे हैं।
सोशल मीडिया बैन से भड़का आंदोलन
सरकार ने सोमवार को फेसबुक, यूट्यूब और अन्य 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि देर रात प्रतिबंध हटा लिया गया, लेकिन तब तक हालात बिगड़ चुके थे। आंदोलनकारी “जेन-जी आंदोलन” के नाम से संगठित होकर लगातार आक्रामक होते गए।
बालेन शाह के पक्ष में माहौल
इस बीच काठमांडू के युवा मेयर बालेंद्र शाह (बालेन) नए प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में उभरे हैं। जनता का मानना है कि बालेन की बेदाग छवि और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति उन्हें इस संकट से उबारने के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। खुद बालेन ने युवाओं से संयम बरतने और संसद भंग होने के बाद ही नई सरकार पर चर्चा करने की अपील की है।
नेपाल एक गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट में प्रवेश कर चुका है। ओली और मंत्रियों के इस्तीफे के बाद सत्ता का भविष्य अनिश्चित हो गया है। जनता की मांग है कि बेदाग और ईमानदार नेतृत्व ही देश को इस दौर से बाहर निकाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या संसद भंग होती है और क्या बालेन शाह जैसे नए चेहरे को जनता का समर्थन राजनीतिक सत्ता में तब्दील हो पाता है।
कर्नाटक में विधायक सतीश सैल गिरफ्तार
बेंगलुरु। कर्नाटक के कारवार निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस विधायक सतीश के. सैल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने मंगलवार को बेंगलुरु में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। विधायक सतीश सैल की गिरफ्तारी उस समय हुई जब वह ईडी कार्यालय में एक पूछताछ में शामिल होने गए थे।
इससे पहले, ईडी ने 13 और 14 अगस्त को अवैध लौह अयस्क निर्यात के आरोपों के सिलसिले में कांग्रेस विधायक सतीश सैल के आवास पर छापेमारी की थी और अवैध संपत्ति, नकदी और आभूषण बरामद किए थे।
ईडी के अधिकारियों ने भारी मात्रा में नकदी और सोना जब्त किया। सतीश सैल की संपत्तियों को निशाना बनाकर कारवार, गोवा, मुंबई और दिल्ली में तलाशी अभियान चलाया गया। ईडी के अधिकारियों ने दस्तावेजों, सोने और नकदी को दो बक्सों में भर दिया।
विधायक सतीश सैल हाल के दिनों में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किए जाने वाले तीसरे कांग्रेस विधायक हैं। चित्रदुर्ग विधायक के.सी. वीरेंद्र और धारवाड़ ग्रामीण विधायक विनय कुलकर्णी अन्य दो विधायक हैं।
सूत्रों ने बताया कि विधायक सतीश सैल को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जाएगा और बाद में उन्हें न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाएगा। विधायक सतीश सैल की गिरफ्तारी के संबंध में अभी और जानकारी सामने आनी बाकी है।
26 अक्टूबर, 2024 को एक विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने बेलेकेरी अवैध लौह अयस्क निर्यात मामले से जुड़े सभी छह मामलों में विधायक सतीश सैल को सात साल की कैद की सजा सुनाई। अदालत ने उन पर 44 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था।
अस्पताल में महिला मरीज को बेहोशी की दवा देकर बलात्कार
तेलंगाना । करीमनगर जिले से बड़ी ही शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक निजी हॉस्पिटल में एडमिट एक महिला मरीज के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया है। जानकारी के मुताबिक, महिला टाइफाइड और तेज बुखार की शिकायत लेकर अस्पताल में भर्ती हुई थी। यहां तीन दिन पहले उसके साथ रेप की घटना हुई। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का टेक्निशियन को गिरफ्तार किया है। आइए जानते हैं इस पूरी घटना के बारे में।
तेलंगाना के करीमनगर में तेलंगाना के करीमनगर में एक निजी अस्पताल में तीन दिन पहले एक महिला मरीज के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में 24 वर्षीय आपातकालीन वार्ड टेक्निशियन को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी की पहचान महाराष्ट्र निवासी दक्षिणा मूर्ति के रूप में हुई है। आरोपी को फिलहाल न्यायिक हिरासत में रखा गया।
बेहोशी की दवा देकर मरीज से रेप
दरअसल, जगतियाल की रहने वाली 20 पीड़िता अस्पताल में टाइफाइड और तेज बुखार का इलाज करा रही थी। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मूर्ति ने रविवार तड़के उसे कथित तौर पर बेहोशी की दवा दी। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में भी मूर्ति को आपातकालीन वार्ड में प्रवेश करते, पीड़ित के बिस्तर के पास जाते और पर्दे बंद करते हुए देखा गया है।
अब तक मामले में क्या कार्रवाई हुई?
पुलिस ने इस पूरी घटना को लेकर बताया है कि पीड़िता महिला का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। अब मेडिकल जांच की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस की ओर से इस मामले में बीएनएस की धारा 64 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।
कुलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकी ढेर
कुलगाम । भारतीय सेना की चिन्नार कॉर्प्स ने जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में चलाए गए 'ऑपरेशन गुड्डर' में दो खतरनाक लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को मार गिराया है। सेना ने इस अभियान को बड़ी सफलता करार दिया है और कहा है कि घाटी को आतंकवाद से मुक्त करने का संकल्प जारी रहेगा।
सेना की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, मारे गए आतंकवादियों की पहचान रहमान और आमिर अहमद डार के रूप में हुई है। रहमान पाकिस्तान का नागरिक और लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य था और आमिर अहमद डार निवासी दरमदोरा, शोपियां, जम्मू-कश्मीर था। दोनों आतंकवादी लंबे समय से घाटी में आतंक फैलाने और युवाओं को भड़काने की साजिशों में शामिल थे।
ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के कब्जे से हथियार, गोला-बारूद और अन्य युद्ध सामग्री बरामद की है। बरामद सामान में आधुनिक राइफलें, मैगजीन, ग्रेनेड और संचार उपकरण शामिल हैं।
चिन्नार कॉर्प्स ने अपने आधिकारिक 'एक्स' पोस्ट में कहा, "यह ऑपरेशन दो कट्टर लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादियों के खात्मे के साथ समाप्त हुआ, जिनकी पहचान पाकिस्तानी नागरिक रहमान और शोपियां के दारमदोरा निवासी आमिर अहमद डार के रूप में हुई है। साथ ही, हथियार, गोला-बारूद और अन्य युद्ध सामग्री भी बरामद की गई है।
सेना ने स्थानीय नागरिकों को भी सचेत किया है कि वे आतंकवादियों से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सुरक्षा बलों को दें। सेना का मानना है कि स्थानीय लोगों के सहयोग से ही घाटी में स्थायी शांति संभव है।
सी.पी. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति निर्वाचित, पीएम मोदी ने मिलकर दी बधाई
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की और उन्हें जीत की बधाई दी। पीएम मोदी ने मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, थिरु सी.पी. राधाकृष्णन जी से मुलाकात की और उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने पर बधाई दी। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय चिकित्सा एवं जनकल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ अन्य केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे।
इससे पहले पीएम मोदी ने एक अन्य पोस्ट में सी.पी. राधाकृष्णन के सामाजिक कार्यों की सराहना की थी। उन्होंने लिखा, थिरु सी.पी. राधाकृष्णन को 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में विजयी होने पर बधाई। उनका जीवन सदैव समाज सेवा और गरीबों व वंचितों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित रहा है। मुझे विश्वास है कि वे एक उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति होंगे, जो हमारे संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे और संसदीय संवाद को आगे बढ़ाएंगे।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी एक्स पर मुलाकात की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति थिरु सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की और उनकी शानदार जीत पर उन्हें बधाई दी।
इससे पहले किए एक अन्य पोस्ट में राजनाथ सिंह ने लिखा, अपने विशिष्ट सार्वजनिक जीवन में, उन्होंने विनम्रता, सत्यनिष्ठा और सेवा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। उनका विशाल अनुभव, संवैधानिक एवं विधायी मामलों का गहन ज्ञान और जनता के साथ अटूट जुड़ाव उनकी नई भूमिका को और समृद्ध करेगा। मुझे विश्वास है कि उनके नेतृत्व में राज्यसभा नई ऊंचाइयों को छुएगी और हमारी संसदीय परंपराएं और सुदृढ़ होंगी। उनके सफल और प्रभावशाली कार्यकाल के लिए मेरी शुभकामनाएं।
बता दें कि एनडीए की ओर से समर्थित उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन देश के नए उपराष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्हें 452 मत मिले। इस जीत के साथ ही वह देश के उपराष्ट्रपति पद के लिए चयनित हो गए हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल वोटर संख्या 788 थी। इसमें 7 पद रिक्त रहने के कारण प्रभावी वोटर संख्या 781 रही। मंगलवार को हुए मतदान में 768 सांसदों ने वोट डाला, जबकि 13 सदस्य अनुपस्थित रहे। अनुपस्थित रहने वालों में बीआरएस के 4, बीजद के 7, शिरोमणि अकाली दल के 1 और एक निर्दलीय सांसद शामिल थे।
डोनाल्ड ट्रंप ने की भारत के साथ व्यापार वार्ता करने की घोषणा
वाशिंगटन । भारत के साथ रिश्तों में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि उनके प्रशासन ने व्यापार वार्ता फिर से शुरू कर दी है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका, दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं।
ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना 'बहुत अच्छा दोस्त' भी बताया और कहा कि वह 'आने वाले हफ्तों में' उनसे बात करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे दोनों महान देशों के लिए एक सफल निष्कर्ष पर पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
ट्रंप का यह ताजा बयान अमेरिका की ओर से हाल ही में आई नरमी के बाद आया है। इससे पहले शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, ट्रंप ने कहा, 'मैं हमेशा प्रधानमंत्री मोदी का दोस्त रहूंगा' और ट्रंप ने उन्हें 'महान प्रधानमंत्री' भी बताया।
ट्रंप ने कहा, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक विशेष संबंध है। इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। उनकी टिप्पणी के कुछ घंटों बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को जवाब देते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं की सराहना करते हैं और उनका पूरा समर्थन करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों के सकारात्मक आकलन की मैं तहे दिल से सराहना करता हूं और उनका पूरा समर्थन करता हूं। भारत और अमेरिका के बीच एक बेहद सकारात्मक और दूरदर्शी व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।
बता दें कि 27 अगस्त को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया, जिसने यूक्रेन संघर्ष के बीच भारत के रूसी तेल की निरंतर खरीद के परिणामस्वरूप शुरुआती 25 प्रतिशत टैरिफ को दोगुना कर दिया।
जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन को दी बधाई
नई दिल्ली। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को अपने उत्तराधिकारी सी.पी. राधाकृष्णन को शुभकामनाएं दी है। धनखड़ ने कहा कि उनके व्यापक अनुभव से उपराष्ट्रपति का पद और अधिक गौरव प्राप्त करेगा। जुलाई में पद छोड़ने के बाद धनखड़ का यह पहला सार्वजनिक बयान था।
राष्ट्र के प्रतिनिधियों का विश्वास और भरोसा
राधाकृष्णन को लिखे एक पत्र में धनखड़ ने कहा, ‘इस प्रतिष्ठित पद पर आपका आसीन होना हमारे राष्ट्र के प्रतिनिधियों के विश्वास और भरोसे को दर्शाता है।’ उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में राधाकृष्णन के व्यापक अनुभव को देखते हुए, उनके नेतृत्व में यह पद ‘निश्चित रूप से और भी अधिक सम्मान एवं गौरव प्राप्त करेगा।’
21 जुलाई को धनखड़ ने दिया था इस्तीफा
एक आश्चर्यजनक कदम के तहत, धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके अचानक इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुआ है।
सीपी राधाकृष्णन को मिले 452 वोट
बता दें कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) उम्मीदवार राधाकृष्णन ने मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में 452 वोट हासिल कर जीत हासिल की, जबकि विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले।
जानिए कौन हैं सीपी राधाकृष्णन?
बता दें कि सी.पी. राधाकृष्णन एक प्रमुख भारतीय राजनेता हैं। अब वह भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के पद पर कार्यरत हैं। वे लंबे समय से बीजेपी से जुड़े रहे हैं। दो बार सांसद और दो राज्यों के राज्यपाल भी रह चुके हैं। राधाकृष्णन तमिलनाडु के रहने वाले हैं।
नेपाल में युवाओं के उग्र प्रदर्शन के बाद गृहमंत्री ने दिया इस्तीफा
काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत देश के दूसरे हिस्सों में सोमवार को जमकर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। देश के गृह मंत्री रमेश लेखक ने प्रदर्शनों में 25 लोगों की मौत की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है।
एक वरिष्ठ मंत्री की तरफ से बताया गया है कि शाम को हुई कैबिनेट बैठक के दौरान प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को अपना इस्तीफा सौंप दिया। देश में फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप समेत 26 सोशल मीडिया साइट्स पर लगे बैन के बाद जेन-जी समूह की तरफ प्रदर्शनों का आयोजन किया गया था। प्रतिबंधों और शासन संबंधी मुद्दों को लेकर शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन काठमांडू समेत कई शहरों में जानलेवा साबित हुए।
नेपाल में विद्रोह चरम पर: पीएम ओली ने दिया इस्तीफा
काठमांडू । नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ देशभर में भड़के छात्रों और युवाओं के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है।
विद्रोह से इस्तीफे तक की कहानी
बीते एक सप्ताह से नेपाल में भ्रष्टाचार और सरकारी नीतियों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा था। 8 सितंबर को सोशल मीडिया बैन के फैसले ने इस आंदोलन को और हवा दी। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए। राष्ट्रपति आवास पर कब्जा, नेपाली कांग्रेस मुख्यालय में आगजनी और पूर्व प्रधानमंत्रियों के घरों पर हमले तक की घटनाएँ सामने आईं।
हालात बिगड़ते देख प्रधानमंत्री ओली ने मंगलवार शाम अपने आवास पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। माना जा रहा है कि बैठक में सहयोगी दलों ने भी ओली पर दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
तीन मंत्रियों ने पहले ही दिया था इस्तीफा
आंदोलन की आंच इतनी तेज थी कि गृह मंत्री समेत कैबिनेट के तीन मंत्रियों ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। इससे सरकार पर और दबाव बढ़ गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ओली ने इस्तीफा देने से पहले दुबई में अस्थायी शरण लेने की भी कोशिश की थी।
आगे का रास्ता
अब नेपाल में राजनीतिक अनिश्चितता और गहरी हो गई है। राष्ट्रपति पौडेल जल्द ही अंतरिम सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों से राय-मशविरा करेंगे। विपक्षी दलों का कहना है कि भ्रष्टाचार पर सख्ती और युवाओं की मांगों को स्वीकार किए बिना स्थिति सामान्य नहीं होगी।
विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की मौजूदा स्थिति बांग्लादेश में हाल ही में हुए घटनाक्रम से मिलती-जुलती है, जहाँ छात्र आंदोलन ने सीधे सरकार का तख्तापलट करा दिया था। नेपाल में भी युवाओं की शक्ति ने यह साबित कर दिया कि जनता की अनदेखी करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
नेपाल में सोशल मीडिया बैन के बाद भड़की हिंसा, 25 की मौत
काठमांडू । नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने से यहां के युवा भड़क गए हैं और सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को राजधानी काठमांडू के न्यू बानेश्वर में मौजूद संसद भवन परिसर में प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेड को तोड़कर गेट पार कर गए। युवा पहले शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सोमवार को उग्र हो गए और संसद की ओर कूच किया। पुलिस ने गोलीबारी की है, जिसमें 25 प्रदर्शनकारी की मौत हो गई है, जबकि 250 घायल हैं।
प्रदर्शनकारियों में Gen-Z यानी जेनेरेशन-जी के वे युवा शामिल हैं, जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए हैं। इनकी उम्र 13 से 28 साल के बीच है। ये ऐसी पीढ़ी है, जो मोबाइल और इंटरनेट के साथ पली-बढ़ी मानी जाती है। प्रदर्शन में उनका साथ Gen-Y यानी मिलेनियल्स (1981 से 1996 की पैदाइश) भी दे रहे हैं। पुलिस ने काठमांडू समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाया है।
दुबई भागने की तैयारी में नेपाल के प्रधानमंत्री ओली, राष्ट्रपति आवास पर कब्जा
काठमांडू । नेपाल में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच खबर आई है कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली दुबई रवाना हो सकते हैं। उन्होंने वहां अस्थायी शरण मांगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री ओली चिकित्सा उपचार और संभवतः अस्थायी शरण लेने के लिए दुबई जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने हिमायलन एयरलाइंस को भी तैयार रहने के आदेश दिए हैं। हालांकि, नेपाली मंत्रियों का कहना है कि ओली अपने चिकित्सा उपचार के लिए दुबई जा रहे हैं।
नेपाल में प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के घर पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने आवास पर पथराव किया और आग लगा दी है। यहां पुलिस और सुरक्षा बल तैनात हैं, लेकिन वे गुस्साई भीड़ के आगे बेबस नजर आ रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने पूर्व नेपाली प्रधानमंत्रियों पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड और शेर बहादुर देउबा और ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का के आवासों को भी नुकसान पहुंचाया है। नेपाली कांग्रेस मुख्यालय को आग के हवाले कर दिया।
प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री ओली ने मंगलवार शाम को अपने आवास पर सर्वदलीय बैठक बुलाई है। नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार चला रहे ओली पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। अभी तक गृह मंत्री समेत 3 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा पर ओली से इस्तीफा मांगने का दबाव बनाया है। सर्वदलीय बैठक के बाद ओली कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं।
नेपाल की हिंसा और बांग्लादेश का तख्तापलट: दोनों में समान पैटर्न...
दुबेजी की दिव्या दृष्टि
दक्षिण एशिया की राजनीति में हाल के दिनों में दो घटनाएँ चर्चा में हैं—बांग्लादेश में छात्र आंदोलन से हुई सत्ता परिवर्तन की घटना और नेपाल में भड़की हिंसा। दोनों घटनाओं में पैटर्न लगभग एक जैसा दिखाई दे रहा है।
बांग्लादेश: छात्रों ने गिराई सरकार
बांग्लादेश में सरकार को अजेय और मजबूत माना जाता था। लेकिन बेरोजगारी, बढ़ते भ्रष्टाचार और छात्रों की आवाज़ को दबाने के प्रयास ने चिंगारी को ज्वालामुखी में बदल दिया। सरकार ने सख़्ती दिखाई, इंटरनेट बंद किया, लेकिन नतीजा उल्टा निकला। सड़क पर उतरे छात्रों को आम जनता का साथ मिला और आंदोलन सत्ता पलट तक जा पहुंचा। प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंततः पद छोड़ना पड़ा। यह सिर्फ छात्र शक्ति का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह सबक था कि जब जनता और खासकर युवा वर्ग खड़ा हो जाता है, तो कोई भी सत्ता स्थायी नहीं रहती।
नेपाल: वही रास्ता, वही संकट
नेपाल में 8 सितंबर को सोशल मीडिया बैन के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ। यह मुद्दा युवाओं के गले की हड्डी बन गया। सरकार ने इसे तकनीकी कदम बताया, लेकिन युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। 9 सितंबर की सुबह जब बैन हटा भी लिया गया, तो उम्मीद थी कि तनाव कम होगा। मगर इसके उलट, गुस्सा और भड़क गया।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के आवास पर कब्जा कर लिया, कांग्रेस मुख्यालय को जला दिया और पूर्व प्रधानमंत्रियों तक को निशाना बनाया। हालात इतने बिगड़े कि अब तक तीन मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बारे में खबरें हैं कि वे दुबई जाकर इलाज और शायद शरण लेने की तैयारी में हैं। यह किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए गंभीर संकट का संकेत है।
समानताएं और फर्क
समानताएं: दोनों ही जगह आंदोलन का नेतृत्व छात्रों और युवाओं ने किया। सरकार की असंवेदनशील नीतियों ने गुस्से को हवा दी। विरोध सिर्फ नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता विरोधी जनआंदोलन में बदल गया।
फर्क: बांग्लादेश में आंदोलन ने सीधे सत्ता परिवर्तन का रूप ले लिया, जबकि नेपाल में अभी सत्ता पलट नहीं हुआ, लेकिन हालात उसी दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं। नेपाल में हिंसा कहीं ज्यादा उग्र है और सरकारी संस्थानों को सीधा निशाना बनाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल की मौजूदा स्थिति बांग्लादेश की घटनाओं की याद दिला रही है। जहाँ बांग्लादेश में छात्र आंदोलन सरकार के तख्तापलट तक पहुंचा, वहीं नेपाल भी उसी रास्ते पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सवाल अब यह है कि क्या नेपाल में भी सत्ता पलट अनिवार्य है या सरकार समय रहते हालात संभाल पाएगी।
सबसे बड़ा सबक
यह साफ है कि लोकतंत्र में युवाओं की उपेक्षा सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा है। सोशल मीडिया आज केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि असहमति की सबसे तेज़ आवाज़ है। बांग्लादेश और नेपाल दोनों ने यह दिखा दिया कि जब सरकारें युवाओं की नाराजगी को नज़रअंदाज़ करती हैं, तो आंदोलन सीधे सत्ता की जड़ों तक पहुंच जाता है।
नेपाल के हालात इस समय नाजुक मोड़ पर हैं। अगर सरकार ने ठोस, पारदर्शी और संवेदनशील कदम नहीं उठाए, तो बांग्लादेश का परिदृश्य नेपाल में भी दोहराया जा सकता है।