छत्तीसगढ़ / रायपुर

पूर्व IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से राहत, लेकिन जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे

 रायपुर । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व आईएएस अधिकारी निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उन्हें ईडी और ईओडब्ल्यू के मामलों में सशर्त जमानत दे दी है। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई फिलहाल नहीं हो सकेगी, क्योंकि उत्तर प्रदेश में दर्ज एक अन्य शराब घोटाले के मामले में भी वे आरोपी हैं और वहां से अभी जमानत नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने की। निरंजन दास की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वे पिछले आठ महीनों से जेल में बंद हैं। मामले में एक मुख्य और सात पूरक चालान पेश किए जा चुके हैं, जबकि अकेले ईओडब्ल्यू केस में ही 120 गवाह हैं। इसके बावजूद ट्रायल अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

वहीं छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि निरंजन दास प्रभावशाली अधिकारी रहे हैं और रिहा होने की स्थिति में गवाहों या जांच को प्रभावित कर सकते हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि रिहाई के बाद निरंजन दास छत्तीसगढ़ में नहीं रह सकेंगे। उन्हें जिस राज्य और शहर में रहना होगा, उसकी जानकारी रायपुर की अदालत को देनी होगी। साथ ही जिस थाना क्षेत्र में वे निवास करेंगे, उसकी सूचना भी देना अनिवार्य होगा। मामले में जब भी अदालत द्वारा समन जारी किया जाएगा, उन्हें पेश होना पड़ेगा।

बताया जा रहा है कि शराब घोटाले में आरोपी बनाए गए लगभग सभी लोगों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में निरंजन दास को भी राहत मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि उत्तर प्रदेश में दर्ज मामले के कारण उनकी कानूनी मुश्किलें अभी खत्म होती नहीं दिख रही हैं। प्रयागराज हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका लंबित है, जिस पर सुनवाई होना बाकी है।

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