सचिव की मनमानी एवं तानाशाही रवैया से त्रस्त ग्राम वासियों ने जिला कलेक्टर से उसे अन्यत्र स्थान पर स्थानांतरण की मांग की।
कबीरधाम |
2025-06-09 18:56:53
कवर्धा - सचिव की मनमानी एवं तानाशाही रवैया से त्रस्त ग्राम वासियों ने जिला कलेक्टर से उसे अन्यत्र स्थान पर स्थानांतरण की मांग की।
ग्राम पंचायत बोककरखार जो की कवर्धा जिला का अंतिम छोर है यहां की आधी से अधिक आबादी अनुसूचित जनजाति की है यहां के नवनिर्वाचित सरपंच ग्राम पंचायत के सचिव गोकरन चंद्रवंशी के मनमानी एवं कार्य शैली से बेहद परेशान है सरपंच एवं ग्राम वासियों ने अपनी शिकायतों में बताया कि सचिव ग्राम पंचायत कार्यालय में कभी कभार ही उपस्थित होते हैं जिससे उन्हें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती है।
साथ ही वे पंचायत के निर्माण कार्यों को ठेकेदारी में दे देते हैं जिससे कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता नहीं के बराबर हो जाती है शासन तथा प्रशासन का भय नहीं रखने वाले- सचिव की कार्य गुजारी इतने में ही खत्म नहीं हो जाती वह अपने मनमाने एवं अड़ियल रवैया से नवनिर्वाचित सरपंच को उंगली में नचाने का प्रयास करता है और पंचायत से जुड़े हुए कार्यों को निपटाने के लिए सरपंच को स्वयं अपने घर या विकासखंड मुख्यालय बोडला बुलाता है। और वही सरपंच से कोरे चेक बुक में हस्ताक्षर करवा कर स्वयं अकेले बैंक जाकर राशि आहरण भी कर लेता है। और सरपंच को यह भी बताने का प्रयास नहीं करता कि जो राशि आहरित की गई है वह किस मद की है ।
सरपंच को हमेशा यह भय बना रहता है कि सचिव की कार्यशैली से कहीं वह फस ना जाए।
सत्ता का विकेंद्रीकरण करते हुए जहां शासन ने पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना की जिससे ग्राम की सरकार हो और ग्राम की सरकार अपने ग्राम वासियों की मूलभूत आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कार्य योजना बनाएं और कार्य करें जिससे ग्राम का विकास हो सके।
लेकिन ग्राम पंचायत बोककरखार के सचिव के कार्य गुजारियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि पंचायत की सत्ता की चाबी सरपंच के हाथों में ना होकर सचिव तक ही सीमित हो गई है और वह अपना तानाशाही रवैया अपना रहा है।
ग्राम पंचायत सचिव की हरकतों एवं तानाशाही रवैया से त्रस्त सरपंच एवं ग्राम वासियों पारस मरावी प्रेम सिंह नायक घनश्याम प्रसाद कुंवर सिंह ने जिला कलेक्टर से सचिव गोकरन चंद्रवंशी को पंचायत से हटाए जाने की मांग की है जिससे गांव का समुचित विकास हो सके। और शासन की जनकल्याण कारी योजनाए उन लोगो तक पहुंच सके और वे उसका लाभ ले सके।