छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

अकारण ही बैगा ग्राम कमराखोल का स्कूल मंगलवार बंद

 अकारण ही बैगा ग्राम  कमराखोल का स्कूल मंगलवार बंद

मुनमुना संकुल के छिरहा स्कूल में शिक्षक समय पर उपस्थित नही रहे
 कार्यालयों में छत्तीसगढ़ शासन के आदेश का पालन नही हो रहा

विकाश शुक्ला
कवर्धा :-  कहते हैं न घर का नीव ही खराब हो तो पूरी मकान खराब हो जाती है। यहां ठीक यही बात चरितार्थ हो रहा है। स्कूल में शिक्षक समय पर नहीं आते हैं वहीं कार्यालयों में अधिकारी भी शासन के नियमनुसार समय पर नहीं पहुंचते हैं।
 
  इस बात की सच्चाई जानने के लिए हमारे संवाददाताने  देखा कि बैगा ग्राम कमराखोल पंडरिया से महज ही 10 किलोमीटर दूरी पर है यहां के प्राथमिक शाला में दो शिक्षकों के होने के बाद भी 1/7/ 2025 को ताला बंद पाया गया है। 5 वी क्लास के अध्ययनरत छात्रा एवं एक पालक ने स्कूल बंद होने का कारण बताया है। शिक्षक स्कूल नहीं आया है कभी कोई तो कभी कोई शिक्षक आता है कारण  नहीं जानते हैं  स्कूल आज बंद है । इसी प्रकार छिरहा में  भी समय पर शिक्षक उपस्थित नहीं रहे हैं।  छीरहा के बच्चों ने बताया शिक्षक नही आए रहते हैं तो हम लोग ही प्राथना कर लेते हैं । यह कमराखोल और छिरहा स्कूल की बस बात नहीँ है,,विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी  के द्वारा स्कूलों के सतत निरीक्षण नही  किये जाने की वजह से अधिकांश स्कूलों का यही हाल है कि शिक्षक स्कूलों में सही समय मे नहीँ पहुंचते ,यह जानकार किसी को कोई आश्चर्य नही होना चाहिए कि पंडरिया के वर्तमान बी. ई. ओ. को डी. ई. ओ.का पद ज्यादा पसंद है इसलिए पंडरिया मुख्यालय में न रहकर जिला मुख्यालय कवर्धा से कभी कभी पंडरिया आना जाना ज्यादा पसंद है। आपको बताते चलें कि प्रभारी पंडरिया ब्लाक शिक्षा अधिकारी जिले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रह चुका है ।
 
इसलिए मॉनिटरिंग नही  होने से विकाश खंड पंडरिया की शिक्षा की हालात  खराब है। तभी तो बैगा ग्राम कमराखोल का स्कूल  अकारण ही बंद होने को पाया गया है। तो छीरहा स्कूल में शिक्षक समय पर उपस्थित नहीं थे। कमराखोल स्कूल बंद होने से बच्चों को मिलने वाली मध्याह्न भोजन का लाभ भी नहीं मिला है ।  स्कूल शिक्षा प्रशासन को चाहिए भविष्य में स्कूल अकारण बंद न हो इसके लिए जांचकर उचित कार्रवाई की आवश्यकता  है। तो वहीं कार्यालयों में अधिकारी समय पर उपस्थित नहीं हो पाते हैं। जबकि छत्तीसगढ़ शासन में रहे पूर्ववर्ती सरकार ने शनिवार की दो छुट्टियों को समाप्त कर 10 बजे कार्यालय पहुंच कर शाम 5.30 बजे तक कार्यालयीन कार्य करने की बात कही थी। उसे बदलने की वर्तमान सरकार ने प्रस्ताव  रखी थी किंतु विरोध को देखते हुए यथावत समय को बनाए रखा है पर जिले के अधिकारी हैं कि अधिकांश समय पर कार्यालय में उपस्थित नही होते हैं।
 
कुछ कर्मचारी कार्यालय खोल  उपस्थित देखें जा सकते हैं। हम इसकी सच्चाई भी जानने का प्रयास आज किया तो ज्यादातर कार्यालयों में अधिकारी अनुपस्थित पाए गए हैं। उपस्थित कर्मचारियों से हमने जानने का प्रयास किया तो ज्यादातर अधिकारियों की अनुपस्थित पर बोल ने की हिम्मत नही कर रहे थे तो कुछ ने बताया कि छत्तीसगढ़ी कहावत को चरितार्थ करते हुए"जैइसे बाबू के नाच तइसे नोनी के नाचा" वाली बात कह रहे थे। मतलब साफ है प्रदेश सरकार ने तो नियम बना दिया है पर उसे कोई मानने को तैयार नही हैं । खुद अधिकारी नही मान रहा है तो उसके मातहत कर्मचारी से अपेक्षा करना सरकार और प्रशासन के आदेश का पालन करें तो बेइमानी ही कही जा सकती है।

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