राधेश्याम सोनवानी,
गरियाबंद। जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन अतिक्रमण का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां अत्याधुनिक तकनीक के जरिए वर्षों पुरानी अवैध गतिविधियों का पर्दाफाश हुआ है। सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वेक्षण से जुटाए गए पुख्ता डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर 166 अतिक्रमणकारियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम जैतपुरी के इन आरोपियों ने पिछले 15 वर्षों में टाइगर रिज़र्व के सीतानदी कोर क्षेत्र में करीब 106.16 हेक्टेयर (265 एकड़) सघन वन क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इसके लिए लगभग 1 लाख पेड़ों की अवैध कटाई की गई। वर्ष 2011 में जहां अतिक्रमण 45 हेक्टेयर तक सीमित था, वहीं धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 106 हेक्टेयर तक पहुंचा दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने Indian Space Research Organisation (ISRO) से CARTOSAT सैटेलाइट इमेजरी मंगाई, जिसमें वर्ष 2006 से 2022 तक वन क्षेत्र में भारी कमी साफ नजर आई। वहीं ड्रोन सर्वे के जरिए हर अतिक्रमण, कटे हुए पेड़ और ठूंठ को हाई-रेजोल्यूशन में चिन्हित किया गया।
कानूनी शिकंजा कसा
सभी 166 आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण (POR) दर्ज कर बेदखली नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों को भी अटैच किया जाएगा। इस मामले में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत 7 साल तक की सजा और लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत 3 साल तक का सश्रम कारावास हो सकता है।
इकोलॉजी पर बड़ा खतरा
सीतानदी क्षेत्र न सिर्फ महानदी का उद्गम स्थल है, बल्कि यह हाथी, तेंदुआ और बाघ जैसे वन्यजीवों का प्रमुख रहवास भी है। अतिक्रमण के कारण वन घनत्व 1000 पेड़ प्रति हेक्टेयर से घटकर महज 25-50 पेड़ प्रति हेक्टेयर रह गया है, जो पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है।
तीन साल में बड़ी कार्रवाई
टाइगर रिज़र्व प्रबंधन ने पिछले तीन वर्षों में 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया और करीब 600 शिकारी, तस्कर व अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार किया है। इससे क्षेत्र में मानव-वन्यप्राणी संघर्ष लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है।
अब होगा पुनर्स्थापन
अधिकारियों के मुताबिक, अतिक्रमित भूमि को खाली कराने के बाद वहां भू-जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की जाएंगी और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की पारिस्थितिकी को फिर से संतुलित किया जा सके।
तकनीक के सहारे की गई इस बड़ी कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब जंगल पर कब्जा करना आसान नहीं। सैटेलाइट से लेकर ड्रोन तक की निगरानी में वन अपराधियों के बच निकलने की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है।